विश्व के मानचित्र को गौर से देखें तो एक बड़ा बदलाव नजर आएगा। चीन जिस यूरोप और खाड़ी देशों पर अपने ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के जरिए प्रभुत्व जमाने का सपना देख रहा था, भारत ने वहां एक ऐसी लकीर खींच दी है जिसने बीजिंग से इस्लामाबाद तक खलबली मचा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई और नॉर्डिक देशों की यात्रा के बाद इटली की राजधानी रोम पहुंचना महज एक कूटनीतिक दौरा नहीं था। यह बीजिंग के आर्थिक साम्राज्य पर नई दिल्ली का वो प्रहार है, जिसकी गूंज से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के गलियारों में सन्नाटा है। आखिर रोम की धरती पर कदम रखते ही पीएम मोदी ने ऐसा क्या किया कि चीन तिलमिला उठा? और क्यों पाकिस्तान को अब अपना भविष्य अंधकारमय लग रहा है? इस पूरी क्रोनोलॉजी को समझना जरूरी है क्योंकि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक ट्रेड रूट्स को बदलने वाला सुपरपावर बन चुका है।
चीन की कमजोरी और इटली का ऐतिहासिक फैसला
यह मामला केवल एक विदेश दौरे का नहीं, बल्कि उस सटीक रणनीति का है जिसने चीन के सबसे बड़े प्रोजेक्ट की कमर तोड़ दी है। याद रहे कि इटली कभी जी-7 देशों में अकेला ऐसा राष्ट्र था जिसने चीन के बीआरआई पर भरोसा जताया था। चीन को उम्मीद थी कि इटली के जरिए वह यूरोपीय बाजारों पर राज करेगा, लेकिन बीजिंग का यह भ्रम तब टूट गया जब इटली ने चीन के कर्जजाल और उसकी विस्तारवादी सोच को पहचान लिया। इटली ने स्पष्ट रूप से चीन के इस प्रोजेक्ट से किनारा कर लिया। आज स्थिति यह है कि जिस चीन को इटली ने बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं प्रधानमंत्री मोदी का रोम में रेड कार्पेट स्वागत हो रहा है। पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की केमिस्ट्री ने दुनिया को संदेश दे दिया है कि यूरोप का भरोसा अब लोकतांत्रिक भारत पर है। इटली का इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) में शामिल होना शी जिनपिंग के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
IMEC: चीन के BRI का सबसे प्रभावी विकल्प
आईएमईसी (IMEC) कॉरिडोर आखिर चीन की नींद क्यों उड़ा रहा है? सरल शब्दों में कहें तो यह एक आधुनिक ‘सिल्क रूट’ है जो भारत को खाड़ी देशों के रास्ते सीधे यूरोप से जोड़ेगा। इसमें रेलवे, शिपिंग और हाई-स्पीड डेटा केबल्स का ऐसा नेटवर्क होगा जो वैश्विक व्यापार की परिभाषा बदल देगा। भारत से निकलने वाला सामान यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन होते हुए इजरायल के हाइफा पोर्ट पहुंचेगा और वहां से सीधे इटली और पूरे यूरोप में प्रवेश करेगा। यह रूट चीन के उस रास्ते को बेकार कर देगा जिसके जरिए वह दुनिया को धमकाता था। भारत का यह कॉरिडोर पारदर्शी और सुरक्षित है, जबकि चीन का बीआरआई देशों को कर्ज में डुबाने के लिए कुख्यात है। यही कारण है कि फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देश इसे ‘गेम चेंजर’ मान रहे हैं। चीन को डर है कि यदि यह कॉरिडोर चालू हुआ, तो ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र चीन से हटकर भारत बन जाएगा।
पाकिस्तान की बढ़ती बदहाली और वैश्विक मंच पर अलगाव
भारत की इस बड़ी कूटनीतिक जीत से पाकिस्तान में भी मातम का माहौल है। इस्लामाबाद को अब साफ नजर आ रहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में उसकी प्रासंगिकता खत्म हो रही है। पाकिस्तान हमेशा अपनी भौगोलिक स्थिति का गुरूर करता था और चीन के सीपीईसी (CPEC) के जरिए मालामाल होने के सपने देखता था। लेकिन भारत के आईएमईसी कॉरिडोर ने पाकिस्तान को पूरी तरह बाईपास कर दिया है। इस नए व्यापार मार्ग में पाकिस्तान की कोई जगह नहीं है। अब पाकिस्तान के पास न तो कोई विश्वसनीय रूट बचा है और न ही कोई साख। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स भी अब यह मानने लगे हैं कि जब भारत दुनिया का नया आर्थिक नक्शा बना रहा था, तब पाकिस्तान केवल कश्मीर के नाम पर रोने और कर्ज मांगने में व्यस्त था।
भारत: यूरोप और खाड़ी देशों का नया पावर सेंटर
पीएम मोदी का यह दौरा केवल इटली तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था। यूरोप के देश समझ चुके हैं कि चीन की तानाशाही से बचने के लिए भारत के साथ हाथ मिलाना ही एकमात्र रास्ता है। रोम में हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार के साथ-साथ डिफेंस, साइबर सिक्योरिटी और क्लीन एनर्जी पर भी बड़े समझौते हुए हैं। चीन जो खुद को एशिया का इकलौता चौधरी समझता था, आज वह इंडो-पैसिफिक से लेकर यूरोप तक भारत की कूटनीति से घिर चुका है। पीएम मोदी की इस यात्रा ने सिद्ध कर दिया है कि नया भारत अब बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर खेलकर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। चीन की बौखलाहट और पाकिस्तान की बेबसी इस बात का प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक व्यवस्था का नया केंद्र बन चुका है।

