भारत-वियतनाम ब्रह्मोस डील: चीन की बढ़ी टेंशन, अब इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा सौदे की तैयारी

नए भारत की सैन्य शक्ति अब वैश्विक स्तर पर गूंज रही है और भारत की बढ़ती ताकत ने पड़ोसी दुश्मनों की चिंता बढ़ा दी है। रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में भारत के प्रभाव को बढ़ा दिया है। भारत ने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा कर दी है कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा फाइनल हो गया है। वही ब्रह्मोस, जिससे चीन जैसा शक्तिशाली देश भी घबराता है, अब वियतनाम की रक्षा पंक्ति में शामिल होगी। यह रणनीतिक कदम दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की विस्तारवादी नीतियों को नियंत्रित करने के लिए भारत का एक बड़ा जियोपॉलिटिकल मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

शांगरी-ला डायलॉग में भारत की बड़ी घोषणा

इस महत्वपूर्ण रक्षा सौदे की पुष्टि भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित ‘शांगरी-ला डायलॉग’ के दौरान की है। इस वैश्विक मंच पर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि एक सक्षम निर्यातक बन चुका है। रक्षा सचिव के अनुसार, वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सौदा सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। यह घोषणा चीन के लिए एक सीधा संकेत है कि भारत अब रणनीतिक क्षेत्रों में अपने सहयोगियों को मजबूत कर रहा है ताकि किसी भी चुनौती का सामना दृढ़ता से किया जा सके।

वियतनाम के साथ यह बातचीत लंबे समय से चल रही थी। हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान रक्षा संबंधों को नया विस्तार मिला। वियतनाम ने कई बार ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में अपनी रुचि जताई थी, जिसे अब भारत ने मूर्त रूप दे दिया है। यद्यपि वियतनाम की ओर से आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है, लेकिन भारत की पुष्टि ने इस सौदे को अंतिम रूप दे दिया है।

दक्षिण चीन सागर में ब्रह्मोस का बढ़ता प्रभाव

यह सौदा चीन की चिंता का मुख्य कारण है क्योंकि यह महज हथियारों की बिक्री नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, यह रक्षा पैकेज लगभग 60 अरब रुपये (लगभग 700 मिलियन डॉलर) का है। भारत वियतनाम को पूरी रक्षा प्रणाली प्रदान कर रहा है, जिसमें तटीय सुरक्षा के लिए मोबाइल बैटरियां, मिसाइलों का जत्था और रसद सहायता शामिल है। इसके अलावा, भारतीय विशेषज्ञ वियतनामी सैनिकों को इस घातक मिसाइल प्रणाली के संचालन का गहन प्रशिक्षण भी देंगे।

दक्षिण चीन सागर में, जहां चीन अक्सर अपना प्रभुत्व जमाने की कोशिश करता है, वहां ब्रह्मोस की तैनाती शक्ति संतुलन बदल देगी। ब्रह्मोस की रडार को चकमा देने की क्षमता और इसकी प्रचंड गति चीन के आधुनिक सुरक्षा तंत्र के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। भारत द्वारा वियतनाम को यह शक्ति प्रदान करना ड्रैगन की घेराबंदी करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

फिलीपींस के बाद वियतनाम का जुड़ाव

वियतनाम ब्रह्मोस का दूसरा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन गया है। इससे पहले फिलीपींस ने 2022 में भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर का सौदा किया था। फिलीपींस ने पहले ही इस मिसाइल प्रणाली को अपनी तटीय रक्षा में शामिल कर लिया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा निर्यात के मामले में भारत अब दुनिया के विश्वसनीय देशों की सूची में शामिल हो गया है।

इंडोनेशिया भी रक्षा सौदे की कतार में

बात केवल वियतनाम तक सीमित नहीं है। रक्षा सचिव ने खुलासा किया कि इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस सौदे की बातचीत अंतिम चरण में है। इंडोनेशिया इस मिसाइल प्रणाली का तीसरा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बनने के लिए तैयार है। हालांकि कुछ व्यापारिक शर्तों पर अभी मंथन जारी है, लेकिन जल्द ही जकार्ता के साथ भी बड़ी डील की संभावना है।

यदि फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस से लैस हो जाता है, तो यह चीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में भारत की एक मजबूत घेराबंदी होगी। भारत अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है।

आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ की जीत

ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन की सफलता का प्रमाण है। भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों को भी अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध करा रहा है। भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने में ये सौदे मील का पत्थर साबित होंगे।

भारत की सक्रिय विदेश और रक्षा नीति अब विश्व पटल पर नए समीकरण बना रही है। वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ ये रक्षा सौदे वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और शक्ति का शंखनाद हैं।

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