रूस की ‘सैटन-2’ सरमत मिसाइल तैयार: पुतिन के इस महाविनाशक हथियार से पश्चिमी देशों में हड़कंप

वर्तमान में दुनिया एक ऐसे नाजुक मोड़ पर है जहाँ महाशक्तियों के बीच सैन्य शक्ति का प्रदर्शन अपने चरम पर पहुँच चुका है। रूस ने हाल ही में एक ऐसी घोषणा की है जिसने वाशिंगटन, लंदन और पेरिस जैसे पश्चिमी देशों की राजधानियों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब रूस की सुरक्षा को चुनौती देना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा। पुतिन का सबसे खतरनाक हथियार, जिसे पश्चिम में ‘सैटन-2’ (Satan-2) यानी शैतान के नाम से जाना जाता है, अब युद्धक तैनाती के लिए तैयार है। हम बात कर रहे हैं आरएस-28 सरमत (RS-28 Sarmat) मिसाइल की। यह मात्र एक मिसाइल नहीं है, बल्कि रूस का वह ब्रह्मास्त्र है जो दुनिया के किसी भी बड़े देश का नामोनिशान मिटाने की क्षमता रखता है।

सैन्य अकादमी के स्नातकों को संबोधित करते हुए पुतिन ने ऐलान किया कि सरमत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को इस साल के अंत तक ‘कॉम्बैट अलर्ट’ पर रख दिया जाएगा। इसका अर्थ है कि अब यह मिसाइल केवल परीक्षणों तक सीमित नहीं है, बल्कि युद्ध के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। पुतिन का यह आत्मविश्वास इसकी अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है, जिसका मुकाबला आज की तारीख में किसी भी देश के पास नहीं है। रूस ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब नाटो और अमेरिका के साथ उसके संबंध ऐतिहासिक रूप से सबसे खराब दौर में हैं।

क्या हैं सरमत की अजेय शक्तियाँ?

सरमत की मारक क्षमता इसे दुनिया की अन्य सभी मिसाइलों से कहीं आगे खड़ा करती है। यह लिक्विड-फ्यूल आधारित मिसाइल है, जो सोवियत युग की ‘वोयवोडा’ का स्थान लेगी। इसकी रेंज 10,000 से 18,000 किलोमीटर तक है, लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि इसे 35,000 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह रूस से उड़ान भरकर दक्षिणी ध्रुव के रास्ते अमेरिका पहुँच सकती है, जिससे इसे अमेरिकी रडार प्रणाली द्वारा ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

200 टन से अधिक वजनी यह मिसाइल 10 मीट्रिक टन तक का परमाणु पेलोड ले जा सकती है। इसमें एमआईआरवी (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ है ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’। यह मिसाइल एक साथ 10 से 15 परमाणु वारहेड ले जा सकती है, जो हवा में अलग होकर विभिन्न शहरों को एक साथ निशाना बना सकते हैं। यह कल्पना ही डरावनी है कि एक ही मिसाइल पूरे महाद्वीप के बड़े हिस्से को तबाह कर सकती है।

पश्चिमी देशों में दहशत का कारण

नाटो देशों के लिए सरमत का नाम ‘सैटन-2’ ही इसकी भयावहता को स्पष्ट करता है। इसकी हाइपरसोनिक गति और उन्नत दांव-पेंच इसे किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, यहाँ तक कि अमेरिका के ‘पैट्रियट’ के लिए भी अभेद्य बनाते हैं। मिसाइल का ‘शॉर्ट बूस्ट फेज’ इसे लॉन्च के तुरंत बाद इतनी गति प्रदान करता है कि दुश्मन के सैटेलाइट्स को इसे पहचानने का समय ही नहीं मिलता।

पुतिन ने जोर देकर कहा कि सरमत उन शक्तियों को पुनर्विचार करने पर मजबूर करेगी जो रूस को धमकाने का प्रयास करती हैं। यह जमीन के नीचे बने सुरक्षित साइलो बंकरों से लॉन्च की जाएगी, जिन्हें नष्ट करना लगभग असंभव है। पुतिन के अनुसार, यह उपलब्धि रूस की रक्षा क्षमता को आने वाले कई दशकों तक सुरक्षित रखेगी।

रूस की वैश्विक रणनीति और संदेश

सरमत की तैनाती का ऐलान केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल है। पुतिन दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि रूस अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। यह मिसाइल रूस का वह ‘लंबा हाथ’ है जो वाशिंगटन तक आसानी से पहुँच सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सरमत में ‘अवन्जार्ड’ हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी लगाया जा सकता है, जो हवा में अपनी दिशा बदलने में सक्षम है। इसकी जिग-जैग गति के कारण इसे इंटरसेप्ट करना नामुमकिन है। सरमत मिसाइल रूस के सैन्य आधुनिकीकरण का सबसे सशक्त और घातक उदाहरण बनकर उभरी है।

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