ट्रंप को पाकिस्तान का बड़ा धोखा: नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमान छिपाकर फंसे जनरल असीम मुनीर

पूरी दुनिया इस बात से वाकिफ है कि पाकिस्तान एक अविश्वसनीय राष्ट्र है। लेकिन इस बार पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक मक्कारी की तमाम सीमाएं लांघ दी हैं। एक तरफ पाकिस्तान वैश्विक शांति दूत बनकर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का ढोंग कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ वह पर्दे के पीछे ऐसा खतरनाक खेल खेल रहा था जो अब उजागर हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आंखों में धूल झोंकना जनरल असीम मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार के लिए आत्मघाती साबित होने वाला है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की इस चोरी को किसी और ने नहीं बल्कि उसके सबसे करीबी दोस्त चीन ने ही दुनिया के सामने ला दिया है।

यह पूरा मामला 28 फरवरी से 8 अप्रैल 2026 के बीच का है, जब अमेरिका और ईरान के बीच भारी तनाव चल रहा था। उस वक्त पाकिस्तान ने खुद को एक निष्पक्ष मध्यस्थ (Neutral Mediator) के रूप में पेश किया। उसने दुनिया को यकीन दिलाया कि वह बातचीत के जरिए तनाव कम कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी शांति की पहल करते हुए सीजफायर की घोषणा की। लेकिन इसी दौरान रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

सीबीसी न्यूज और अमेरिकी खुफिया अधिकारियों की रिपोर्ट ने वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबली मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका के संभावित हवाई हमलों से ईरानी विमानों को बचाने के लिए अपने सबसे सुरक्षित नूर खान एयरबेस का इस्तेमाल किया। जब अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी में था, तब पाकिस्तान ने ईरानी वायु सेना के विमानों को अपने यहां शरण दी ताकि वे अमेरिकी राडार और मिसाइलों की पहुंच से दूर रहें। रावलपिंडी स्थित यह एयरबेस पाकिस्तानी सेना और एयरफोर्स का रणनीतिक केंद्र माना जाता है।

पाकिस्तान की इस धोखेबाजी का पर्दाफाश एक चीनी सैटेलाइट तस्वीर ने किया है। चीन की प्रतिबंधित कंपनी ‘मिजारविजन’ ने अप्रैल 2026 की कुछ तस्वीरें सार्वजनिक की हैं। इन तस्वीरों ने पाकिस्तान के झूठ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। तस्वीर में नूर खान एयरबेस के डामर पर एक सी-130 विमान स्पष्ट रूप से पार्क हुआ दिख रहा है। यह विमान ‘सैंड कैमो’ यानी रेगिस्तानी छलावरण के रंग में रंगा है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी वायु सेना इस रंग की स्कीम वाले विमानों का उपयोग नहीं करती। यह विशिष्ट रंग-रूप केवल ईरानी वायु सेना के विमानों की पहचान है।

तस्वीरों से पुख्ता हो गया कि यह ईरान का आरसी-130 विमान है, जो सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्लेन नहीं बल्कि टोही और खुफिया जानकारी जुटाने वाला एक बेहद संवेदनशील विमान है। पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका के साथ बैठकर शांति की बातें कर रहा था और दूसरी तरफ ईरानी जासूसी विमानों को ‘सेफ पार्किंग’ दे रहा था। यह डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन के साथ सीधी गद्दारी है। यह घटनाक्रम ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में छिपाने जैसी पाकिस्तान की पुरानी फितरत की याद दिलाता है। पाकिस्तान हमेशा से दोहरा खेल खेलता रहा है, लेकिन इस बार वह रंगे हाथों पकड़ा गया है।

इस खुलासे के बाद अमेरिका में सियासी तूफान आ गया है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि अगर यह रिपोर्ट सच है, तो पाकिस्तान की भूमिका का नए सिरे से मूल्यांकन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान के पुराने रुख को देखते हुए यह विश्वासघात चौंकाने वाला नहीं है। अमेरिका में अब पाकिस्तान पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग उठने लगी है। ट्रंप प्रशासन इस बात को गंभीरता से ले रहा है कि कैसे उनके सीजफायर का दुरुपयोग ईरान को सैन्य सुरक्षा देने के लिए किया गया।

खुलासे के बाद इस्लामाबाद में हड़कंप मचा हुआ है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए इस रिपोर्ट को ‘गुमराह करने वाली’ करार दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसने किसी भी ईरानी सैन्य विमान को सुरक्षा नहीं दी। उनका तर्क है कि सीजफायर और बातचीत के दौरान कई देशों के विमान राजनयिकों, सुरक्षा टीमों और प्रशासनिक कर्मचारियों को लाने-ले जाने के लिए पाकिस्तान आए थे।

हालांकि, पाकिस्तान की इस दलील पर कोई विश्वास नहीं कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ विमान अगली वार्ता की प्रतीक्षा में वहां रुके हुए थे, लेकिन सवाल यह है कि राजनयिक कार्यों के लिए आरसी-130 जैसे खुफिया सैन्य विमान की क्या जरूरत थी? राजनयिकों के लिए सामान्य यात्री या कार्गो विमानों का उपयोग किया जाता है। सैंड कैमो वाला सैन्य विमान इस बात का पुख्ता सबूत है कि पाकिस्तान ने ईरान की सैन्य संपत्तियों को अमेरिकी हमले से बचाने के लिए ढाल का काम किया।

पाकिस्तान का यह डबल-क्रॉस अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगजाहिर हो गया है। जो देश आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और आईएमएफ के कर्ज पर टिका है, वह इतनी बड़ी वैश्विक धोखाधड़ी में शामिल पाया गया है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस चीन को पाकिस्तान अपना ‘सदाबहार भाई’ कहता है, उसी की कंपनी ने पाकिस्तान की इस करतूत की पोल खोल दी। मिजारविजन की तस्वीरों ने अमेरिका के सामने पाकिस्तान की असलियत को आईने की तरह साफ कर दिया है।

अब पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान की इस गद्दारी को माफ करेंगे या असीम मुनीर और शहबाज शरीफ को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी? अमेरिकी सांसदों के कड़े रुख से साफ है कि अब पाकिस्तान की बातों पर भरोसा करना नामुमकिन होगा। मध्य पूर्व की नाजुक स्थिति के बीच पाकिस्तान का यह दोहरा खेल वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। सैटेलाइट द्वारा पेश किए गए इन अकाट्य सबूतों से बचना अब पाकिस्तान के लिए मुमकिन नहीं दिख रहा है।

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