सुपरपावर के चकनाचूर होते घमंड की कहानी
दुनिया की सबसे ताकतवर वायुसेना, जिसके पास ऐसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं जिन्हें रडार भी नहीं देख सकता। एक ऐसी महाशक्ति जिसका नाम मात्र ही दुनिया में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। लेकिन क्या होगा जब इसी सुपरपावर के सबसे महंगे और अपराजेय माने जाने वाले विमान महज 40 दिनों के भीतर मिट्टी में मिल जाएं? आज हम आपको एक ऐसी रिपोर्ट के बारे में बताएंगे जिसने पेंटागन से लेकर व्हाइट हाउस तक की नींद उड़ा दी है। यह कहानी है अमेरिका के उस अति-आत्मविश्वास की, जिसे मध्य-पूर्व के आसमान में ईरान ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है, जो अमेरिका के अजेय होने के भ्रम को तोड़ती है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ चले 40 दिनों के भीषण संघर्ष में अमेरिकी वायुसेना को वह नुकसान हुआ है जिसकी कल्पना उनके जनरलों ने भी नहीं की थी। कुल 42 सैन्य विमान… जी हां, 42 अमेरिकी विमान या तो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं या फिर इतने क्षतिग्रस्त हो गए हैं कि वे अब कबाड़ के समान हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस सूची में दुनिया का सबसे आधुनिक, पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट F-35 भी शामिल है।
नुकसान के वे आंकड़े जिन्होंने पेंटागन को हिला दिया
जब हम अमेरिकी नुकसान की बात करते हैं, तो यह केवल छोटे ड्रोन्स तक सीमित नहीं है। यह अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान है और उससे भी बड़ा आघात अमेरिका की उस वैश्विक साख पर है जिसे उसने दशकों में बनाया था। आइए जानते हैं कि इस 40 दिवसीय ऑपरेशन में अमेरिका ने क्या-क्या खोया है।
इस सूची में सबसे ऊपर 1 F-35A लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे दुनिया में अजय माना जाता था। इसके साथ ही 4 F-15E स्ट्राइक ईगल, जो अमेरिकी हवाई हमलों की रीढ़ हैं, और जमीनी हमलों में माहिर 1 A-10 थंडरबोल्ट-II एयरक्राफ्ट भी शामिल है। इतना ही नहीं, हवा में ईंधन भरने वाले 7 KC-135 स्ट्रेटोटैंकर विमानों को भी भारी नुकसान पहुँचा है।
नुकसान का सिलसिला यहीं नहीं थमता। सर्विलांस के लिए इस्तेमाल होने वाला 1 E-3 सेंट्री अवॉक्स, 2 MC-130J कमांडो II स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट और 1 HH-60W जॉली ग्रीन II हेलिकॉप्टर भी इस युद्ध की भेंट चढ़ गए। ड्रोन्स के मामले में भी आंकड़े चौंकाने वाले हैं; अमेरिका ने अपने 24 MQ-9 रीपर ड्रोन और 1 MQ-4C ट्राइटन ड्रोन खो दिए हैं। 24 रीपर ड्रोन्स का हाथ से जाना यह बताता है कि एक बड़े क्षेत्र में अमेरिकी सेना निगरानी के मामले में पूरी तरह ‘ब्लाइंड’ हो गई थी।
फ्रेंडली फायर और विफल रेस्क्यू ऑपरेशन
अमेरिकी विमानों की तबाही की वजह सिर्फ दुश्मन के हमले नहीं थे, बल्कि उनकी अपनी गलतियां भी थीं। ईरान के खिलाफ युद्ध के शुरुआती दिनों में ही 2 मार्च को कुवैत के ऊपर तीन F-15E विमानों को मार गिराया गया। चौंकाने वाली बात यह थी कि यह ‘फ्रेंडली फायर’ का मामला था, यानी अमेरिकी सेना की अपनी ही गलती से ये विमान गिरे। भारी युद्ध दबाव और संचार की विफलता के कारण अमेरिका ने खुद को ही यह बड़ा जख्म दिया।
इसके बाद 5 अप्रैल को ईरानी सेना ने चौथे F-15E स्ट्राइक ईगल को अपना निशाना बनाया। हालांकि पायलट सुरक्षित इजेक्ट कर गए, लेकिन उन्हें बचाने के लिए चलाया गया रेस्क्यू मिशन भी फ्लॉप रहा। क्रू को बचाने गए 2 MC-130J कमांडो II विमान आगे नहीं बढ़ सके और अंततः अमेरिकी सेना को उन्हें स्वयं ही नष्ट करना पड़ा ताकि उनकी गोपनीय तकनीक ईरान के हाथ न लग सके।
F-35 के स्टील्थ होने का भ्रम टूटा
इस पूरी रिपोर्ट में सबसे बड़ी खबर 19 मार्च की है, जिसने सैन्य विमानन के इतिहास को बदल दिया। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान ईरान ने अमेरिका के सबसे बड़े गौरव, F-35A स्टील्थ जेट को सफलतापूर्वक निशाना बना लिया।
F-35 की स्टील्थ तकनीक के बारे में यह दावा किया जाता था कि इसे कोई भी रडार नहीं पकड़ सकता। लेकिन 19 मार्च को यह मिथक धराशायी हो गया। इस पांचवीं पीढ़ी के विमान को हवा में ही इंटरसेप्ट किया गया और उसे इतना नुकसान पहुंचा कि उसे आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। इतिहास में यह पहली बार हुआ जब किसी स्टील्थ फाइटर जेट की अजेयता को इस तरह चुनौती दी गई।
ईरान का ‘प्रोडक्ट-358’ और एयर डिफेंस की ताकत
अब सवाल उठता है कि ईरान ने करोड़ों डॉलर के इन जेट्स को कैसे मार गिराया? विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने इस असंभव कार्य के लिए ‘प्रोडक्ट-358’ नाम के एक हाइब्रिड हथियार का उपयोग किया।
यह ‘प्रोडक्ट-358’ एक ‘लॉइटरिंग मिसाइल’ है, जो हवा में घंटों तक मंडरा सकती है। इसमें मिसाइल की गति और सुसाइड ड्रोन की चतुराई दोनों है। जैसे ही इसके सेंसर्स को कोई फाइटर जेट या ड्रोन दिखता है, यह अचानक उस पर हमला कर देती है। इसी तकनीक ने अमेरिका के एडवांस सिस्टम्स को गच्चा देकर F-35 को अपना शिकार बनाया।
इसके अतिरिक्त, ईरान ने अपने ‘थर्ड खोरदाद’ मोबाइल मिसाइल सिस्टम का भी बखूबी इस्तेमाल किया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इसे MANPADS का एक ‘संयोगवश हमला’ बताकर अपनी साख बचाने की कोशिश की, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
ईरान के पास कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली मिसाइलों (MANPADS) का विशाल जखीरा है। जब अमेरिकी विमान रडार से बचने के लिए कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, तो वे इन मिसाइलों के आसान निशाने बन जाते हैं। फारस की खाड़ी में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान A-10 थंडरबोल्ट II को भी इसी तरह निशाना बनाया गया था।
बदलता हुआ वैश्विक शक्ति संतुलन
यह 40 दिवसीय संघर्ष दुनिया भर की सेनाओं के लिए एक सबक है। इसने साबित कर दिया है कि यदि आपके पास सही रणनीति और स्वदेशी तकनीक है, तो आप दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति को भी घुटनों पर ला सकते हैं।
अमेरिका को अब अपनी सैन्य श्रेष्ठता और महंगी तकनीक पर पुनर्विचार करना होगा। मध्य-पूर्व के आसमान में अब कोई भी अजेय नहीं रहा। इस युद्ध ने दिखा दिया है कि कैसे चंद लाख डॉलर के हाइब्रिड मिसाइल सिस्टम अरबों डॉलर के फाइटर जेट्स को बेअसर कर सकते हैं। यह रिपोर्ट केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों का जीवंत प्रमाण है।

