भारत और साइप्रस के बीच 14 ऐतिहासिक समझौते: रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार में महा-गठबंधन से तुर्की हैरान

वैश्विक राजनीति के मंच पर जब भी कूटनीतिक बिसात बिछाई जाती है, तो नया भारत अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक रुख अपनाता है। दुनिया में एक ऐसा देश है जो अक्सर भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार करता है, कश्मीर के मसले पर अनावश्यक हस्तक्षेप करता है और पाकिस्तान का पक्ष लेता है। हम बात कर रहे हैं तुर्की की। लेकिन अब भारत ने कूटनीति के जरिए तुर्की को उसी के प्रभाव क्षेत्र में जाकर करारा जवाब दिया है, जिसकी चर्चा अब अंकारा से लेकर इस्लामाबाद तक हो रही है।

भारत ने तुर्की के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी साइप्रस के साथ एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 14 महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की दिल्ली यात्रा महज एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक था जिसने वैश्विक भू-राजनीति के समीकरणों को बदलकर रख दिया है।

तुर्की और साइप्रस के बीच की प्रतिद्वंद्विता को समझना आवश्यक है। साइप्रस भूमध्य सागर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान पर स्थित है। तुर्की से इसकी दूरी समुद्री मार्ग से केवल 65-70 किलोमीटर है। आकार में छोटा होने के बावजूद, साइप्रस तुर्की की विस्तारवादी नीति के आड़े आता रहा है। तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी भाग पर अवैध कब्जा कर रखा है और उसे एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता। ऐसे में जब भारत जैसा शक्तिशाली देश साइप्रस का भव्य स्वागत करता है और रक्षा एवं अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाता है, तो यह तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के लिए एक कड़ा कूटनीतिक संदेश है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि भारत और साइप्रस के बीच वे 14 ऐतिहासिक समझौते कौन से हैं, जिन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

पहला: रणनीतिक साझेदारी का नया युग भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर पर बढ़ा दिया है। इसका अर्थ है कि अब दोनों देशों के बीच व्यापार और आयात-निर्यात में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

दूसरा: आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह यह एक अत्यंत प्रभावशाली कदम है। दोनों देश आतंकवाद के विरुद्ध मिलकर लड़ेंगे। एक साझा कार्य समूह बनाया जाएगा जो आतंकी नेटवर्क और फंडिंग को रोकने के लिए खुफिया जानकारी साझा करेगा, जिससे पाकिस्तान-तुर्की सांठगांठ पर नजर रखी जा सकेगी।

तीसरा: राजनयिक प्रशिक्षण का आदान-प्रदान भारत के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच समझौता हुआ है। अब दोनों देशों के राजनयिक एक-दूसरे के संस्थानों में प्रशिक्षण लेंगे, जिससे विदेश नीति में बेहतर तालमेल बनेगा।

चौथा: उच्च शिक्षा और अनुसंधान में गठबंधन भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हाथ मिलाया है। इससे भारतीय छात्रों के लिए यूरोपीय मानकों की शिक्षा और शोध के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

पांचवां: सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण दोनों ही देश प्राचीन सभ्यताओं के धनी हैं। अब साइप्रस में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार बढ़ेगा। पुरातात्विक सर्वेक्षण और सांस्कृतिक संपदा की अवैध तस्करी रोकने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

छठा: नवाचार और प्रौद्योगिकी में विस्तार डिजिटल युग और स्टार्टअप्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए तकनीक साझा करने पर सहमति बनी है। भारत के स्टार्टअप्स को साइप्रस के माध्यम से यूरोपीय बाजार में प्रवेश करने के लिए एक मजबूत आधार मिलेगा।

सातवां: खोज और बचाव कार्यों में सहयोग समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देश आपसी सहयोग करेंगे। इसके तहत संयुक्त प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे भारतीय नाविकों को वैश्विक स्तर पर नए अवसर मिलेंगे।

आठवां: रक्षा क्षेत्र में पंचवर्षीय योजना इस समझौते ने तुर्की की चिंता बढ़ा दी है। भारत और साइप्रस के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए 5 साल का रोडमैप तैयार किया गया है। इसमें संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और युद्धाभ्यास शामिल हैं, जो भूमध्य सागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को मजबूती देंगे।

नौवां: साइबर सुरक्षा का सुदृढ़ तंत्र बढ़ते साइबर हमलों से निपटने के लिए दोनों देश तकनीकी ज्ञान साझा करेंगे। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को स्टेट-स्पॉन्सर्ड साइबर अपराधियों से बचाने के लिए एक ठोस रक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा।

दसवां: कांसुलर संवाद और नागरिक सेवाएं आम नागरिकों की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक विशेष फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। कांसुलर स्तर पर नियमित चर्चा होगी ताकि दोनों देशों के निवासियों को किसी भी समस्या का त्वरित समाधान मिल सके।

ग्यारहवां: इंडो-पैसिफिक पहल में साइप्रस का शामिल होना यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है। साइप्रस अब भारत की इंडो-पैसिफिक महासागर पहल का हिस्सा बनेगा। यह वैश्विक शांति और खुले समुद्री रास्तों के प्रति भारत के विजन पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।

बारहवां: भीष्म क्यूब उपहार भारत ने ‘आरोग्य मैत्री’ परियोजना के तहत साइप्रस को ‘भीष्म क्यूब’ भेंट करने का निर्णय लिया है। यह एक अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल है जो आपदा के समय तुरंत सक्रिय हो जाता है, जो भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रदर्शन है।

तेरहवां: अंतरिक्ष विज्ञान में सहयोग इसरो की सफलताओं के बाद अब साइप्रस भी भारत के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करेगा। प्रतिवर्ष 18 मई को ‘भारत-साइप्रस अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

चौदहवां: मुंबई में साइप्रस का व्यापार केंद्र आर्थिक संबंधों को मजबूती देने के लिए साइप्रस भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में अपना ट्रेड सेंटर खोलेगा। इससे निर्यात में वृद्धि होगी और रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।

निष्कर्षतः, साइप्रस के राष्ट्रपति का यह दौरा और ये 14 समझौते भारत की उभरती वैश्विक शक्ति के परिचायक हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हितों के विरुद्ध काम करने वालों को कूटनीतिक जवाब देने में सक्षम है। तुर्की के भारत-विरोधी रुख के बीच साइप्रस के साथ रक्षा और रणनीतिक मजबूती एर्दोगन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। भारत और साइप्रस की यह बढ़ती निकटता वैश्विक राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात है।

Share This Article
Leave a Comment