आधुनिक युद्धों का स्वरूप बदल गया है और अब सीमाओं पर ‘ड्रोन वॉरफेयर’ का खतरा मंडरा रहा है। चीन अपनी ‘स्वार्म ड्रोन’ तकनीक और पाकिस्तान विस्फोटक लदे सस्ते ड्रोन्स के जरिए भारतीय सीमाओं में घुसपैठ की साजिशें रच रहे हैं। उन्हें लगा था कि भारत अपनी पुरानी तकनीक के भरोसे रहेगा, लेकिन भारत ने अब एक ऐसा स्वदेशी डिजिटल जाल बिछाया है जो दुश्मन के हर नापाक मंसूबे को आसमान में ही खाक कर देगा।
आज के समय में करोड़ों के टैंक और फाइटर जेट्स के सामने कुछ हजार के ड्रोन बड़ी चुनौती बन गए हैं। चीन विशेष रूप से ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है जहाँ दर्जनों ड्रोन एक साथ हमला करते हैं। भारत को एक ऐसे समाधान की तलाश थी जो न केवल सटीक हो बल्कि दुश्मन को करारा और सस्ता जवाब देने में भी सक्षम हो।
प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 में भारत ने अपना सबसे उन्नत AI-आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम पेश किया है। जेन टेक्नोलॉजीज द्वारा निर्मित यह पूरी तरह स्वदेशी सिस्टम 15 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के ड्रोन की पहचान कर लेता है। भारतीय वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा तकनीक के मामले में भारत अब दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
इस रक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-ट्रैकिंग क्षमता है। यह AI कवच एक साथ 100 से अधिक ड्रोन्स को ट्रैक कर सकता है। चाहे चीन का पूरा स्वार्म ड्रोन झुंड ही क्यों न आ जाए, यह सिस्टम पल भर में उनकी लोकेशन, स्पीड और ऊंचाई को कैलकुलेट कर उन्हें नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखता है।
इस सिस्टम का असली जादू इसके AI कमांड सेंटर में है। युद्ध के दौरान इंसान को निर्णय लेने में समय लग सकता है, लेकिन यह कमांड सेंटर अलग-अलग सेंसर से डेटा लेकर खुद तय करता है कि किस ड्रोन को पहले निशाना बनाना है। यह एक ग्रैंडमास्टर की तरह दुश्मन की हर चाल को पहले ही भांप लेता है।
यह प्रणाली 70 मेगाहर्ट्ज से लेकर 12 गीगाहर्ट्ज तक की फ्रीक्वेंसी पर प्रहार करती है। जैसे ही दुश्मन का ड्रोन सीमा के पास आता है, यह सिस्टम उसके रेडियो सिग्नल को जाम कर देता है। इसके बाद ऑपरेटर का ड्रोन पर कोई नियंत्रण नहीं रहता और वह अंधा होकर जमीन पर गिर पड़ता है।
इतना ही नहीं, इसमें ‘स्पूफिंग’ की अद्भुत क्षमता है। इसका मतलब है कि यह दुश्मन के ड्रोन का कंट्रोल खुद अपने हाथ में ले लेता है। उड़ाया दुश्मन ने, लेकिन उसे अपनी मर्जी से कहीं भी उतारने का रिमोट कंट्रोल भारतीय सेना के पास होगा। यह तकनीक दुश्मन की रूह कंपा देने वाली है।
यदि कोई एडवांस ड्रोन जामिंग के बाद भी नहीं रुकता, तो इसमें ‘हार्ड किल’ की सुविधा दी गई है। इसके साथ जुड़ी एयर डिफेंस गन और रिमोट कंट्रोल हथियार उस ड्रोन को हवा में ही छलनी कर देते हैं। यह डबल लेयर सिक्योरिटी भारतीय आकाश को पूरी तरह अभेद्य बनाती है।
इसकी पोर्टेबिलिटी इसे और भी खास बनाती है। इसे सेना के ट्रकों पर तैनात किया जा सकता है, जिससे यह ऊंचे पहाड़ों, जंगलों या महत्वपूर्ण एयरबेस के लिए एक चलते-फिरते सुरक्षा कवच का काम करता है। जहाँ भी यह सिस्टम होगा, वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा।
कोहरे और घने अंधेरे में भी यह सिस्टम पूरी सटीकता से काम करता है। पाकिस्तान और चीन जो तकनीक के दम पर भारत को चुनौती देने का सपना देख रहे थे, अब उन्हें इस स्वदेशी डिजिटल चक्रव्यूह से टकराना होगा। भारत अब डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रहा है।

