क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर आज रोहित शर्मा ने वो कर दिखाया, जो पिछले कई दशकों में कोई भी भारतीय बल्लेबाज नहीं कर पाया था। जब पूरी दुनिया की निगाहें इस पर थीं कि क्या टीम इंडिया इंग्लैंड की धरती पर संघर्ष करेगी, तब कप्तान रोहित शर्मा ने अपने बल्ले से ऐसी दहाड़ लगाई जिसने वैश्विक क्रिकेट जगत को हिला कर रख दिया है।
यह महज एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की लड़ाई थी। यह उन आलोचकों के लिए करारा जवाब था जो पिछले कुछ समय से रोहित की फॉर्म पर सवाल उठा रहे थे। लेकिन जब ‘हिटमैन’ अपनी लय में होते हैं, तो वे सिर्फ खेलते नहीं बल्कि विरोधी टीम के मनोबल को पूरी तरह ध्वस्त कर देते हैं। लॉर्ड्स के इस मैदान पर, जहाँ महान से महान खिलाड़ी भी दबाव में आ जाते हैं, रोहित ने अंग्रेजों के अहंकार को चुनौती देते हुए एक ऐसी पारी खेली जो स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी।
लॉर्ड्स के मैदान पर हिटमैन का ऐतिहासिक गदर
मैच शुरू होने से पहले ही माहौल काफी तनावपूर्ण था। हर किसी के मन में यह सवाल था कि क्या भारत इंग्लैंड के सबसे मजबूत गढ़ लॉर्ड्स में टिक पाएगा? पिछले कुछ मैचों में रोहित बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे, जिसके चलते सोशल मीडिया से लेकर मीडिया गलियारों तक उनकी फॉर्म और उम्र पर चर्चाएं तेज थीं। कुछ का तो यह भी मानना था कि रोहित का सुनहरा दौर अब बीत चुका है। लेकिन इतिहास रचने वाले खिलाड़ी अक्सर खामोशी से अपना काम करते हैं।
मैदान पर उतरते ही रोहित ने पहली गेंद से ही अपना आक्रामक रुख साफ कर दिया। उन्होंने इंग्लिश तेज गेंदबाजों की रणनीति को पूरी तरह विफल कर दिया। महज 84 गेंदों के भीतर रोहित शर्मा ने वह मुकाम हासिल कर लिया जो सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली या एम.एस. धोनी जैसे दिग्गज भी अपने करियर में लॉर्ड्स के मैदान पर नहीं कर पाए थे।
लॉर्ड्स के इस खूबसूरत मैदान पर आज तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज वनडे प्रारूप में शतक नहीं लगा सका था। यह एक ऐसा सूखा था जो दशकों से भारतीय प्रशंसकों को अखरता था। लेकिन रोहित शर्मा ने अपनी जादुई टाइमिंग और पुल शॉट्स के जरिए इस सूखे को खत्म किया। 84 गेंदों पर जैसे ही उन्होंने अपना शतक पूरा किया, पूरा स्टेडियम ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
आलोचकों को बल्ले से दिया कड़ा जवाब
यह सेंचुरी सिर्फ रनों का आंकड़ा नहीं, बल्कि रोहित के कभी न हार मानने वाले जज्बे की जीत है। अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी शतक लगाने के बाद से रोहित एक बड़ी पारी की तलाश में थे। करीब एक साल के अंतराल में उनके भविष्य को लेकर कई सवाल उठाए गए, यहाँ तक कि उन्हें संन्यास लेने की सलाह भी दी गई।
लेकिन रोहित ने अपने कमबैक के लिए दुनिया के सबसे बड़े मंच को चुना। अपने 34वें वनडे शतक के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि उनमें आज भी वही क्लास और क्षमता मौजूद है। इस पारी के दौरान रोहित पर कोई दबाव नहीं दिखा। उन्होंने अंग्रेजों के हर चक्रव्यूह को तोड़ा—चाहे वो शॉर्ट पिच गेंदें हों या स्पिन का जाल। रोहित ने स्पष्ट कर दिया कि फॉर्म अस्थायी हो सकती है, लेकिन क्लास हमेशा परमानेंट रहती है।
सौरव गांगुली और ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ के रिकॉर्ड हुए मलबे
रोहित की इस जादुई पारी ने रिकॉर्ड्स बुक के कई पन्ने पलट दिए हैं। उन्होंने एक ही पारी से कई दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया:
सौरव गांगुली का कीर्तिमान टूटा: लॉर्ड्स में किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा सर्वाधिक स्कोर का रिकॉर्ड ‘दादा’ सौरव गांगुली के नाम था, जिन्होंने 2004 में 90 रन बनाए थे। रोहित ने 22 साल पुराने इस रिकॉर्ड को तोड़कर लॉर्ड्स में वनडे शतक लगाने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया।
सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ा: रोहित अब विदेशी धरती पर किसी एक देश में सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने वाले दुनिया के नंबर वन बल्लेबाज बन गए हैं।
इंग्लैंड में 8वां शतक: उन्होंने इंग्लैंड में अपना 8वां वनडे शतक जड़ा। इससे पहले सचिन तेंदुलकर के नाम यूएई में 7 शतकों का रिकॉर्ड था। किसी विपक्षी टीम के घर में जाकर ऐसा दबदबा बनाना रोहित की महानता को दर्शाता है।
39 साल की उम्र में युवा जोश की मिसाल
मैदान पर रोहित की फुर्ती देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि वह 39 साल और 80 दिन के हो चुके हैं। इस शतक के साथ वे भारत के लिए वनडे क्रिकेट में सेंचुरी लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं।
जहाँ इस उम्र में अक्सर खिलाड़ी दूसरे करियर विकल्पों की तलाश करते हैं, वहीं रोहित टीम का नेतृत्व करते हुए दुनिया के सबसे घातक गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह उनकी फिटनेस और देश के प्रति उनके समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है। उन्होंने युवाओं को सिखाया कि अगर जुनून हो, तो उम्र महज एक संख्या है।
लॉर्ड्स की गति और रोहित की क्लास
लॉर्ड्स में रन बनाना और खास तौर पर शतक लगाना चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि यहाँ की परिस्थितियां हमेशा गेंदबाजों को मदद करती हैं। लेकिन रोहित ने यहाँ वनडे इतिहास का तीसरा सबसे तेज शतक जड़कर सबको हैरान कर दिया।
84 गेंदों में शतक पूरा कर उन्होंने जोस बटलर (61 गेंद) और क्लाइव लॉयड (82 गेंद) के बाद तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने मार्कस ट्रेस्कोथिक के 89 गेंदों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
रोहित शर्मा की यह पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी। यह न केवल टीम की जीत की नींव थी, बल्कि एक कप्तान का अपने देश के सम्मान के लिए लड़ा गया युद्ध था। रोहित का यह 34वां शतक क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा।

