यूनुस सरकार की विदाई तय! जानिए क्यों चर्चा में है शेख हसीना की ढाका वापसी और 2026 का बड़ा पावर शिफ्ट

पड़ोसी देश बांग्लादेश की सियासत में एक बार फिर भारी हलचल देखने को मिल रही है, जिसकी गूँज ढाका से लेकर नई दिल्ली तक सुनाई दे रही है। चंद महीनों पहले जिस मुल्क ने सत्ता परिवर्तन का खूनी मंजर देखा था, वहां अब एक और बड़े राजनैतिक बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। माना जा रहा है कि जो कट्टरपंथी ताकतें शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर जश्न मना रही थीं, उनकी मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। ढाका में मचे हंगामे के बीच एक ऐसी खुफिया रिपोर्ट सामने आई है, जिसने भू-राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है। दावा है कि साल 2026 तक बांग्लादेश में एक बहुत बड़ा सत्ता परिवर्तन होगा और निर्वासन झेल रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दोबारा वापसी हो सकती है।

ढाका में हाल ही में एक मासूम बच्ची के साथ हुई अमानवीय घटना ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस जघन्य अपराध के पीछे जमात-ए-इस्लामी के कट्टरपंथियों का हाथ बताया जा रहा है। राजधानी में दिनदहाड़े ऐसी घटना होना यह दर्शाता है कि मौजूदा सरकार का कानून-व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। पुलिस और प्रशासन बेबस नजर आ रहे हैं और देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है। जिस ‘नए बांग्लादेश’ का वादा कर तख्तापलट किया गया था, वह आज कट्टरपंथ और हिंसा की आग में झुलस रहा है, जिससे आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

इसी अस्थिरता के बीच, भारतीय खुफिया एजेंसी (RAW) के पूर्व एजेंट लकी बिष्ट के एक दावे ने खलबली मचा दी है। बिष्ट ने अपने सूत्रों और जमीनी रिपोर्टों के आधार पर कहा है कि ढाका की सड़कों पर हो रहे अत्याचार इस बात का संकेत हैं कि मौजूदा शासन के दिन अब गिनती के रह गए हैं। उनके अनुसार, 2026 में बांग्लादेश एक ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन का गवाह बनेगा।

यह दावा केवल कयास नहीं बल्कि बदलती रणनीतिक परिस्थितियों पर आधारित है। पूर्व रॉ एजेंट का मानना है कि शेख हसीना पर चल रहे तमाम अदालती मुकदमों को दरकिनार कर दिया जाएगा और वह एक बार फिर बांग्लादेश की सत्ता के केंद्र में होंगी। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नवंबर 2025 में उन्हें फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, फिर भी उनकी वापसी की संभावना जताई जा रही है।

अगर हम अतीत पर गौर करें, तो बांग्लादेश में तख्तापलट की पटकथा कोटा आंदोलन के जरिए लिखी गई थी। छात्र आंदोलन को ढाल बनाकर विदेशी ताकतों और कट्टरपंथियों ने चुनी हुई सरकार के खिलाफ विद्रोह छेड़ा, जो जल्द ही हिंसक रूप ले बैठा। भारी जान-माल के नुकसान और बिगड़ते हालातों के बीच, 5 अगस्त को शेख हसीना को अपनी जान बचाने के लिए इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी थी।

भारत में प्रवास के दौरान ही हसीना ने बांग्लादेश के गिरते हालातों को देखा है। उनके जाने के बाद बनी यूनुस सरकार ने भारत के साथ पुराने रिश्तों को दरकिनार कर ऐसे फैसले लिए जो पाकिस्तान और चीन के पक्ष में दिखते हैं। अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाना और हिंसा का सारा दोष हसीना पर मढ़ना इसी रणनीति का हिस्सा था। इसी कड़ी में नवंबर 2025 में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई।

ढाका की अंतरिम सरकार ने कई बार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की, लेकिन भारत ने अपनी कूटनीतिक कुशलता का परिचय देते हुए इन मांगों को खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनैतिक बदले की कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा। भारत का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि उसे बांग्लादेश की आंतरिक स्थितियों और भविष्य के बदलावों का पहले से ही आभास था।

आज बांग्लादेश की जनता महंगाई, अपराध और आर्थिक तंगी से परेशान होकर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। बीएनपी और जमात के बीच सत्ता के लिए चल रही खींचतान ने प्रशासन को ठप कर दिया है। इसी बीच, अवामी लीग का कैडर जो छिप गया था, वह अब धीरे-धीरे संगठित हो रहा है। जनता अब उस दौर को याद कर रही है जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत थी।

यही कारण है कि 2026 के सत्ता परिवर्तन के दावे को गंभीरता से लिया जा रहा है। शेख हसीना की वापसी न केवल एक राजनेता की वापसी होगी, बल्कि इसे देश की धर्मनिरपेक्षता और विकास की बहाली के रूप में देखा जा रहा है। संकट के इस समय में बांग्लादेश की जनता फिर से एक अनुभवी नेतृत्व की तलाश में है।

हसीना की ढाका वापसी किसी बाहरी हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि स्थानीय जन-समर्थन और सिस्टम के भीतर से उपजे असंतोष के कारण होगी। जब कट्टरपंथियों के कारण व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, तब सत्ता का संतुलन बदलना अनिवार्य है। भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, क्योंकि पड़ोस में अस्थिरता भारत की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है।

निष्कर्षतः, बांग्लादेश की राजनीति में कोई भी अंत अंतिम नहीं होता। 2026 का साल वहां के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। जो ताकतें आज खुद को अजेय समझ रही हैं, उन्हें जनता के आक्रोश और राजनैतिक बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। ढाका के तख्त पर एक बार फिर बड़े उलटफेर की पटकथा तैयार हो रही है।

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