हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक बार फिर मजहबी कट्टरपंथ और पाकिस्तान की नापाक विचारधारा का साया गहराने लगा है। 1971 में जिस बांग्लादेश को भारतीय वीरों के बलिदान ने स्वतंत्रता दिलाई थी, आज उसी देश में आजादी के महानायकों को इतिहास से मिटाने की साजिश रची जा रही है। ढाका से आई खबर चिंताजनक है। बांग्लादेश की नई सरकार, जिसकी कमान अब तारिक रहमान और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के पास है, उसने एक ऐसा निर्णय लिया है जो साबित करता है कि यह मुल्क अब बर्बादी और नफरत के रास्ते पर निकल पड़ा है। यह सिर्फ पासपोर्ट के स्वरूप में बदलाव नहीं है, बल्कि देश के बुनियादी डीएनए को बदलकर उसे पाकिस्तान की कार्बन कॉपी बनाने की एक कोशिश है।
‘एक्सेप्ट इजरायल’ की वापसी: कट्टरपंथियों को साधने की कोशिश
बांग्लादेशी मीडिया और विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश के पासपोर्ट पर “इजरायल को छोड़कर” (Except Israel) वाली शर्त को फिर से लागू किया जा रहा है। याद दिला दें कि 2020 में शेख हसीना सरकार ने एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए ई-पासपोर्ट से इस विवादास्पद लाइन को हटा दिया था। हालांकि तब भी इजरायल यात्रा पर प्रतिबंध था, लेकिन यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर किया गया था। मगर अब सत्ता परिवर्तन के साथ ही तारिक रहमान देश को फिर से अंधकार युग की ओर ले जा रहे हैं। ‘एक्सेप्ट इजरायल’ की वापसी को नई विदेश नीति का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन असलियत यह है कि BNP कट्टरपंथी वोट बैंक और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों को खुश करना चाहती है। फिलिस्तीन के नाम पर यह सरकार बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नष्ट करने पर तुली है।
बंगबंधु का अपमान: इतिहास को मिटाने का एजेंडा
साजिश का सबसे भयावह पहलू यह है कि नए पासपोर्ट से सिर्फ एक लाइन नहीं जोड़ी जा रही, बल्कि एक गौरवशाली इतिहास को मिटाया जा रहा है। नई सरकार पासपोर्ट के ई-पेजों से राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान (बंगबंधु) की तस्वीरें और उनसे जुड़े ऐतिहासिक प्रतीकों को हटाने की तैयारी में है। जिस व्यक्ति ने बांग्लादेश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, आज उसी के देश का पासपोर्ट उनका वॉटरमार्क रखने से इनकार कर रहा है। धनमंडी 32, तुंगीपारा में बंगबंधु का मकबरा, सुहरावर्दी उद्यान, बंगबंधु पुल, पद्मा ब्रिज और मेट्रो रेल जैसे विकास के प्रतीकों को पासपोर्ट से हटाया जा रहा है।
यह कदम अवामी लीग के प्रति गहरी नफरत को दर्शाता है। तारिक रहमान का मानना है कि जब तक बंगबंधु की विरासत जीवित है, उनकी कट्टरपंथी विचारधारा जड़ें नहीं जमा पाएगी। विकास और राष्ट्रवाद को दरकिनार कर यह सरकार केवल बदले की राजनीति कर रही है। शेख हसीना के दौर में बांग्लादेश की प्रगति के प्रतीक रहे स्मारकों और प्रोजेक्ट्स की तस्वीरों को हटाना एक संकीर्ण मानसिकता का प्रमाण है।
भारत के लिए चेतावनी: पाकिस्तान पार्ट-2 बनने की आहट
बांग्लादेश का पाकिस्तान की राह पर चलना भारत के लिए एक गंभीर सुरक्षा खतरा है। दुनिया में अब तक केवल पाकिस्तान ही ऐसा देश था जिसके पासपोर्ट पर ‘इजरायल’ को लेकर ऐसी शर्त थी, और अब बांग्लादेश भी उसी श्रेणी में शामिल हो रहा है। यह स्पष्ट करता है कि तारिक रहमान और पाकिस्तान की विचारधारा में अब कोई अंतर नहीं रह गया है। 1971 की टीस को मिटाने के लिए पाकिस्तान लगातार बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास करता रहा है, और अब BNP के जरिए उसे इसमें सफलता मिलती दिख रही है। भारत के पड़ोस में एक और कट्टरपंथी राज्य का उदय हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

