मिडिल ईस्ट की सरजमीं पर एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है, लेकिन इस बार तनाव का केंद्र समंदर बना है। दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग पर हुए एक भीषण मिसाइल हमले ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। सबसे दुखद पहलू यह है कि दो देशों के बीच जारी इस वर्चस्व की लड़ाई में एक बेगुनाह भारतीय नागरिक को अपनी जान गंवानी पड़ी है। यह सिर्फ एक सैन्य टकराव की खबर नहीं है, बल्कि दुनिया के नक्शे पर मंडराते तीसरे विश्व युद्ध के खतरे का संकेत है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई ने उसे अब भारी मुसीबत में डाल दिया है। अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं और यूएई ने भी युद्ध के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं।
समंदर में ईरान का विनाशकारी मिसाइल प्रहार
सोमवार की रात ओमान के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक खतरनाक साजिश को अंजाम दिया गया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो व्यापारिक तेल टैंकर, ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहियाह’, अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे। ये कोई युद्धपोत नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से कमर्शियल जहाज थे, जिन पर निहत्थे नाविक तैनात थे। अचानक ईरान की ओर से दागी गई क्रूज मिसाइलों ने इन जहाजों को अपना निशाना बनाया। यह कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी सैन्य स्ट्राइक थी, जिसने समंदर की शांति को धधकती आग में बदल दिया है।
भारतीय नाविक का बलिदान और भारत की प्रतिक्रिया
इस हमले का सबसे हृदयविदारक हिस्सा एक निर्दोष भारतीय नाविक की शहादत है। जब मिसाइल मोम्बासा टैंकर से टकराई, तो वहां तैनात भारतीय नाविक उसकी चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। इस हमले में आठ अन्य नाविक भी घायल हुए हैं, जिनमें से छह हमारे देश भारत के हैं और दो यूक्रेन के नागरिक हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चार घायलों की स्थिति अत्यंत गंभीर है और उन्हें उन्नत चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
आज का आधुनिक भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है। ईरान को यह समझना होगा कि एक भारतीय का खून बहना वह ‘रेड लाइन’ है जिसे पार करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कायराना हरकत के लिए ईरान को कभी माफ नहीं करेगा।
यूएई का आक्रामक रुख और सैन्य अलर्ट
इस हमले के जवाब में यूएई के रक्षा और विदेश मंत्रालयों ने अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। यूएई ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान के इस हिंसक चेहरे को बेनकाब किया है। विदेश मंत्रालय ने सबसे पहले भारत सरकार और पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की, जो भारत-यूएई के प्रगाढ़ कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
यूएई का आरोप है कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन किया है। यूएई ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ईरान की यह गलतफहमी है कि वह मिसाइलों के दम पर यूएई को डरा देगा; बल्कि इसके विपरीत, यूएई की सेनाएं अब हाई अलर्ट पर हैं और किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।
ईरान का झूठा प्रचार और कन्फ्यूजन
दूसरी ओर, ईरान की प्रोपेगेंडा मशीनरी अपनी साख बचाने की कोशिश में जुटी है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने दावा किया कि ये जहाज अवैध रूप से उनके जलक्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे। ईरान ने इसे केवल एक चेतावनीपूर्ण कार्रवाई बताया।
हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया (IRIB) ने ही इस दावे की पोल खोल दी। उनके एक सैन्य अधिकारी ने बयान दिया कि उन्होंने अमेरिकी दुश्मन के जहाज पर क्रूज मिसाइलें दागी हैं। बयानों में यह विरोधाभास ईरान की घबराहट और आंतरिक भ्रम को साफ जाहिर करता है। सैटेलाइट डेटा ने पुष्टि की है कि ईरान का निशाना कोई सैन्य जहाज नहीं, बल्कि नागरिक तेल टैंकर ही थे।
अमेरिका की भीषण एयरस्ट्राइक और सैन्य कार्रवाई
ईरान द्वारा भड़काई गई यह आग अब उसके अपने घर तक पहुंच गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले के तुरंत बाद ईरान के उन ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी है जहां से मिसाइलें दागी गई थीं। अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर रहे हैं।
अमेरिकी सेना ने साफ कर दिया है कि उनका उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को समाप्त करना है जिससे वह समुद्री व्यापार और निर्दोष नागरिकों के लिए खतरा बना हुआ है। अमेरिका अब कूटनीतिक बातचीत के बजाय सैन्य कार्रवाई के मूड में नजर आ रहा है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब एक जंगी मैदान में तब्दील हो गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ‘इकोनॉमिक लाइफलाइन’ है। वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यह युद्ध आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे महंगाई का एक नया दौर शुरू होगा।
भारत के लिए यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक हैं। साथ ही, मिडिल ईस्ट में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। भारत इस संकट पर चुप्पी नहीं साधेगा। आज पूरी दुनिया एक नाजुक मोड़ पर है, जहां एक तरफ ईरान की अराजकता है और दूसरी तरफ अपनी सुरक्षा के लिए खड़े अमेरिका और यूएई। भारत भी अपने नागरिकों के हक और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

