अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत हमेशा से एक शांत लेकिन अत्यंत प्रभावशाली शक्ति रहा है। जब पड़ोसियों की बात आती है, तो नई दिल्ली का रुख पूरी तरह स्पष्ट है – ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी सबसे पहले)। हालांकि, देश के स्वाभिमान और राष्ट्रीय हितों के साथ भारत कभी समझौता नहीं करता। भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के संबंध हैं, लेकिन हाल के दिनों में नेपाल की सियासत में आए उबाल ने दोनों देशों के बीच एक मौन तनाव पैदा कर दिया है। लिपुलेख नक्शा विवाद हो या काठमांडू के मेयर बालेन शाह का अड़ियल भारत-विरोधी रवैया, इन सबके बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने नेपाल से लेकर चीन तक हलचल मचा दी है।
नेपाल की राजनीति के नए सुपरस्टार और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के प्रमुख रबी लामिछाने 1 जून से दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आ रहे हैं। यह कोई साधारण यात्रा नहीं है, बल्कि भारत की उस चाणक्य नीति का हिस्सा है जो बिना शोर मचाए विरोधियों को चारों खाने चित करने की क्षमता रखती है।
नेपाल की राजनीति का सस्पेंस और बालेन शाह का रुख
नेपाल की राजनीति इस समय एक क्रांतिकारी दौर से गुजर रही है, जहां पुराने दिग्गजों का प्रभाव कम हो रहा है और नए चेहरे उभर रहे हैं। इनमें काठमांडू के मेयर बालेन शाह एक बड़ा नाम हैं। बालेन शाह की लोकप्रियता किसी प्रधानमंत्री से कम नहीं है, लेकिन उन्होंने लगातार भारत-विरोधी भावनाओं को हवा दी है। चाहे वह भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाना हो या अपने कार्यालय में ‘ग्रेटर नेपाल’ का विवादित नक्शा लगाना, उनके कदम चर्चा में रहे हैं।
ऐसी खबरें थीं कि बालेन शाह दिल्ली का दौरा कर सकते हैं, लेकिन उनके अड़ियल प्रोटोकॉल रवैये के कारण सस्पेंस बरकरार रहा। बताया गया कि वह केवल अपने समकक्ष स्तर के अधिकारियों से ही मिलना चाहते थे, जिसे कूटनीतिक हलकों में अहंकार के रूप में देखा गया। इसी दौरान भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री का काठमांडू दौरा भी स्थगित हो गया। नई दिल्ली ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत किसी के दबाव में काम नहीं करता। यदि आप राजनयिक शिष्टाचार का पालन नहीं करेंगे, तो दिल्ली के द्वार आपके लिए आसानी से नहीं खुलेंगे।
लिपुलेख और कस्टम ड्यूटी: तनाव के मुख्य कारण
लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर नेपाल का रुख हमेशा से विवादास्पद रहा है। वहां के कुछ नेता घरेलू राजनीति को साधने के लिए इन भारतीय क्षेत्रों को अपना बताकर नक्शे जारी करते रहते हैं। भारत ने हमेशा इन दावों को खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता को सर्वोपरि रखा है।
इसके अतिरिक्त, हाल ही में नेपाल द्वारा भारत से आने वाले 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाने के फैसले ने नई दिल्ली को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया। यह निर्णय न केवल मुक्त व्यापार की भावना के विरुद्ध है, बल्कि नेपाल की जनता के लिए भी महंगाई बढ़ाने वाला है। इन परिस्थितियों में बातचीत के लिए एक विश्वसनीय और नए माध्यम की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
रबी लामिछाने की एंट्री: भारत का मास्टरस्ट्रोक
यहीं से रबी लामिछाने का महत्व बढ़ जाता है। पूर्व टेलीविजन पत्रकार से राजनेता बने लामिछाने की पार्टी RSP ने हालिया चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है और वह वर्तमान में नेपाल की सत्ता में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा रहे हैं।
लामिछाने को दिल्ली का निमंत्रण मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि भारत का एक बहुत ही नपा-तुला कदम है। जब बालेन शाह जैसे नेता कूटनीतिक गतिरोध पैदा कर रहे हैं, तब भारत ने उस युवा नेता को आमंत्रित किया है जिसकी जनता के बीच मजबूत पकड़ है। यह नेपाल की नई राजनीतिक ताकतों को संदेश है कि भारत हमेशा एक स्थिर और लोकतांत्रिक नेपाल का समर्थक है और वह वहां की नई पीढ़ी के नेताओं के साथ सीधे संबंध बनाने को तैयार है।
दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकों का एजेंडा
काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रबी लामिछाने को भारत सरकार की ओर से औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि नेपाल सरकार इसे ‘निजी दौरा’ बता रही है, लेकिन राजनीति में समय और संबंधों का बड़ा महत्व होता है। लामिछाने की दिल्ली यात्रा का प्रभाव पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में महसूस किया जाएगा।
नई दिल्ली में लामिछाने की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल सहित कई शीर्ष नेताओं से होने की संभावना है।
जब लामिछाने एनएसए अजीत डोभाल से मिलेंगे, तो सीमा सुरक्षा, लिपुलेख विवाद और नेपाल में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक व्यापारिक संबंधों और कस्टम ड्यूटी की समस्याओं को सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित मुलाकात इस दौरे का मुख्य आकर्षण होगी, जो नेपाल की जनता को यह संदेश देगी कि भारत उनके नए नेतृत्व का सम्मान करता है।
नई दिल्ली का स्पष्ट कूटनीतिक संदेश
यह घटनाक्रम मात्र एक दौरा नहीं, बल्कि एक उभरती वैश्विक शक्ति की अपने पड़ोस को साधने की कुशल रणनीति है। जो लोग भारत-विरोधी भावनाओं के सहारे अपनी राजनीति चमकाना चाहते थे, उनके लिए लामिछाने का यह दौरा एक रियलिटी चेक है।
भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई पक्ष अहंकार दिखाता है, तो उसके पास कूटनीति के अन्य प्रभावी विकल्प मौजूद हैं। बालेन शाह के दौरे पर बने सस्पेंस को भारत ने लामिछाने को रेड कार्पेट देकर समाप्त कर दिया है। यह यात्रा नेपाल और भारत के संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाने और भविष्य की साझेदारी की नई दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होगी।

