समंदर में रची गई खौफनाक साजिश
क्या 15 सितंबर की वो काली रात अरब सागर की गहराइयों में महज दो जहाजों की सामान्य टक्कर थी? या फिर समंदर के सन्नाटे में भारत के सबसे घातक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर को डुबाने का कोई खौफनाक जाल बिछाया गया था? जिस वक्त समंदर की लहरों पर भारत का आईएनएस कोलकाता और पाकिस्तान का पीएनएस हुनैन आमने-सामने थे, उस वक्त अरब सागर के घुप अंधेरे में छिपे चीन के जासूसी जहाज आखिर किसका डेटा चुरा रहे थे? क्या ये भारत के सीक्रेट रडार और इलेक्ट्रॉनिक फ्रीक्वेंसी को हैक करने की कोई भयंकर अंतरराष्ट्रीय साजिश थी? समंदर में पाकिस्तान की किस नापाक हरकत का पता चलते ही भारतीय थल सेना के वज्र एयर डिफेंस वॉरियर्स और भारत के सबसे सीक्रेट प्रोजेक्ट आकाशतीर को रातों-रात फुल एक्टिवेट कर दिया गया? क्या भारत की खुफिया एजेंसियों को आसमान से किसी भयंकर ड्रोन स्वार्म हमले का सीक्रेट इनपुट मिल चुका था? आज इन सभी सवालों के जवाब आपको अंदर तक हिला कर रख देंगे।
अरब सागर का उत्तर-पूर्वी हिस्सा, जो भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन और कराची तट के बीच पड़ता है, हमेशा से बारूद के ढेर पर बैठा रहता है। लेकिन 15 सितंबर को जो हुआ, उसने इस बारूद में सीधे आग लगा दी। भारतीय नौसेना का प्रोजेक्ट 15A के तहत बना सबसे विनाशकारी स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर आईएनएस कोलकाता अपनी नियमित गश्त पर था। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों और बराक 8 एयर डिफेंस सिस्टम से लैस इस समुद्री सिकंदर के सामने पाकिस्तानी नौसेना का डच डिजाइन वाला कार्वेट पीएनएस हुनैन किसी खिलौने से ज्यादा नहीं है। दोनों के आकार और मारक क्षमता में जमीन-आसमान का अंतर है। लेकिन खुफिया रडार डेटा बताता है कि उस रात पीएनएस हुनैन ने अचानक अपना रास्ता बदला और बेहद आक्रामक तरीके से आईएनएस कोलकाता को ओवरटेक करने की जुर्रत की। समंदर में दो विशाल युद्धपोतों का इस तरह से टकराने की हद तक करीब आना कोई गलती नहीं हो सकती। यह एक सोची-समझी उकसावे की कार्रवाई थी।
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1991 में सैन्य अभ्यास और नौसैनिक जहाजों की आवाजाही को लेकर एक अहम द्विपक्षीय समझौता हुआ था। इसके आर्टिकल 10 के तहत यह कड़ा नियम है कि शांति काल में दोनों देशों के नौसैनिक जहाज समंदर में एक-दूसरे से कम से कम 3 नॉटिकल मील यानी लगभग साढ़े पांच किलोमीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखेंगे। लेकिन पाकिस्तान ने जानबूझकर इस रेड लाइन को पार किया। यह ठीक वैसी ही ग्रे जोन वॉरफेयर की रणनीति थी जिसका इस्तेमाल चीन अक्सर दक्षिण चीन सागर में ताइवान और फिलीपींस के खिलाफ करता है। यानी सीधे युद्ध न करना, लेकिन ऐसी हरकतें करना जिससे सामने वाला अपना धैर्य खो दे।
चीन के जासूसी जहाजों का डर्टी गेम
आखिर पाकिस्तान इतनी बड़ी हिमाकत क्यों कर रहा था? दरअसल पाकिस्तान की इतनी औकात ही नहीं है कि वो भारत के सबसे खतरनाक जंगी जहाज से सीधे टकराने आ जाए। असली खेल तो समंदर के अंधेरे में कहीं और चल रहा था। रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि पीएनएस हुनैन सिर्फ एक मोहरा था। उसका असली मकसद आईएनएस कोलकाता को उकसाकर उसके रडार और वेपन सिस्टम को फुल पावर पर एक्टिवेट करवाना था। क्योंकि उस वक्त इलाके में चीनी रिसर्च वेसल्स यानी चीन के जासूसी जहाज खामोशी से घात लगाए बैठे थे।
चीन की नेवी भारत के इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और कम्यूनिकेशन फ्रीक्वेंसी को हैक करना चाहती थी। ड्रैगन को ये जानना था कि संकट के समय भारतीय नौसेना का रिस्पॉन्स टाइम क्या होता है और हमारे स्टील्थ डिस्ट्रॉयर्स कौन सी रडार फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन भारतीय नौसेना के कमांडर्स ने चीन और पाकिस्तान के इस नापाक मंसूबे को पलक झपकते ही डिकोड कर लिया। आईएनएस कोलकाता ने बेहतरीन इलेक्ट्रॉनिक साइलेंस बनाए रखा। बिना अपना सीक्रेट डेटा लीक किए, भारतीय युद्धपोत ने ऐसी आक्रामक पैंतरेबाजी की कि पाकिस्तानी जहाज को अपनी जान बचाकर वापस कराची की तरफ भागना पड़ा।
आसमान का सिकंदर: P-8I पोसाइडन
ऊपर समंदर की लहरों पर जो हो रहा था, वो तो सिर्फ एक ट्रेलर था। असली खतरा तो पानी के नीचे रेंग रहा था। पाकिस्तान की इस गीदड़भभकी के तुरंत बाद, अरब सागर के नीचे पाकिस्तानी नौसेना की अगोस्टा 90B पनडुब्बियां किसी बड़े सीक्रेट मिशन पर निकल चुकी थीं। भारत को तुरंत समझ आ गया कि पाकिस्तान समंदर में कोई बड़ा खेल करने वाला है। रातों-रात भारत ने अपना सबसे खतरनाक सबमरीन किलर विमान बोइंग पी-8आई पोसाइडन हवा में उतार दिया।
पी-8आई कोई आम एयरक्राफ्ट नहीं है। यह समंदर के ऊपर उड़ने वाला एक चलता-फिरता कमांड सेंटर है। यह विमान मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टर और सिंथेटिक अपर्चर रडार से लैस है। ये सिस्टम समंदर की अथाह गहराइयों में छिपी पनडुब्बी की धड़कन तक सुन सकते हैं। जैसे ही इस विमान ने अरब सागर के ऊपर उड़ान भरी, पानी के नीचे रेंग रही पाकिस्तानी पनडुब्बियों में दहशत फैल गई। विमान ने समंदर में सोनोबॉय गिराने शुरू कर दिए जो पनडुब्बियों की सटीक लोकेशन ट्रैक कर रहे थे। पाकिस्तानी कमांडरों को पता था कि अगर उन्होंने जरा सी भी हिमाकत की, तो पी-8आई से गिरने वाले एमके 54 टॉरपीडो और हारपून ब्लॉक टू मिसाइलें उन्हें हमेशा के लिए समंदर में गर्क कर देंगी। भारतीय नौसेना के सी गार्डियन ड्रोन्स ने भी आसमान से पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली। भारत का संदेश बिल्कुल साफ था। अगर समंदर में कोई भी गलत हरकत हुई, तो उसका अंजाम बेहद विनाशकारी होगा।
पाकिस्तान की बौखलाहट और लाइव फायरिंग का ड्रामा
जब समंदर के ऊपर और नीचे, दोनों जगह पाकिस्तान की हर चाल फेल हो गई, तो इस्लामाबाद में बैठे जनरलों की बौखलाहट सातवें आसमान पर पहुंच गई। अपनी झेंप मिटाने और दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान ने अचानक एक बेहद खतरनाक कदम उठाया। पाकिस्तानी नौसेना ने उसी संवेदनशील इलाके में लाइव नेवल फायरिंग का ऐलान करते हुए नोटैम जारी कर दिया। यह सिर्फ एक मिसाइल टेस्ट नहीं था, बल्कि समंदर से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को बंधक बनाकर तबाही मचाने का एक ब्लैकमेलिंग हथकंडा था। अरब सागर के उस रास्ते से दुनिया भर का तेल और भारी व्यापार गुजरता है। इस इलाके में अंधाधुंध मिसाइल फायरिंग करके पाकिस्तान दुनिया की सप्लाई चेन को खतरे में डाल रहा था।
आखिर पाकिस्तान ऐसा क्यों कर रहा था? इसके पीछे की असली वजह उनकी अपनी घरेलू बर्बादी है। पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे भयानक आर्थिक और राजनीतिक संकट में फंसा हुआ है। बलूचिस्तान में उनके खिलाफ विद्रोह चरम पर है, और खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी रोज पाकिस्तानी सेना के कैंपों को निशाना बना रहा है। वाशिंगटन में नई सरकार के आने के बाद से अमेरिका ने भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया है और उसे मिलने वाली हर तरह की खैरात बंद कर दी है। ऐसे में अपनी भूखी अवाम और अपनी सेना का ध्यान भटकाने के लिए सरहद और समंदर पर नकली तनाव पैदा करना पाकिस्तानी जनरलों की पुरानी आदत है। लेकिन इस बार उन्होंने गलत देश से पंगा ले लिया था।
प्रोजेक्ट ‘आकाशतीर’: भारत का अभेद्य रक्षा कवच
अगर पूरा विवाद सिर्फ समंदर का था, तो फिर भारतीय थल सेना के वज्र एयर डिफेंस वॉरियर्स और भारत के सबसे सीक्रेट प्रोजेक्ट आकाशतीर को रातों-रात फुल एक्टिवेट क्यों कर दिया गया? इसके पीछे की कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी। भारतीय खुफिया एजेंसियों को पक्का इनपुट मिल चुका था कि पाकिस्तान समंदर में लाइव फायरिंग की आड़ में हवाई घुसपैठ या ड्रोन स्वार्म हमले की साजिश रच सकता है। आधुनिक युद्ध में रडार की पकड़ में न आने वाले छोटे ड्रोन सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। आर्मेनिया अजरबैजान और रूस यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया है कि झुंड में आने वाले ड्रोन कितने घातक हो सकते हैं। पाकिस्तान लगातार तुर्की से बायरकतार और चीन से विंग लूंग ड्रोन खरीद रहा है। ये ड्रोन धरती की सतह के बहुत करीब उड़ते हैं, जिससे पुराने रडार इन्हें आसानी से नहीं पकड़ पाते।
इसी अनदेखे खतरे को कुचलने के लिए भारत ने अपना स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क आकाशतीर मैदान में उतार दिया है। रक्षा मंत्रालय ने बीईएल के साथ 1982 करोड़ रुपये की एक ऐतिहासिक डील करके इस सिस्टम को तैयार किया है। आसमान में अब पुराने जमाने की तरह युद्ध नहीं लड़ा जाता, जहां रडार ऑपरेटर फोन उठाकर मिसाइल दागने का ऑर्डर देता था। आज क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन मैक 2 की स्पीड से आते हैं, जहां सोचने का समय ही नहीं होता। आकाशतीर अलग-अलग जगहों पर लगे रडार, अवाक्स और सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा को एक सेकंड के हजारवें हिस्से में प्रोसेस करता है। यह सिस्टम ऑपरेटर की स्क्रीन पर युद्ध के मैदान का पूरा थ्री डी मैप खोल कर रख देता है, जिससे लो लेवल एयरस्पेस में उड़ने वाला छोटा सा ड्रोन भी बच नहीं सकता।
पाकिस्तानी फोर्सेस ने इस पूरे तनाव के दौरान भारतीय रडारों को अंधा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का खतरनाक खेल भी खेला। लेकिन वो भूल गए कि नया भारत ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट के अचूक सिद्धांत पर काम करता है। भारत के नए सेंसर टू शूटर नेटवर्क ने पाकिस्तान के जैमिंग अटैक को पलक झपकते ही चकनाचूर कर दिया। जैसे ही पाकिस्तान ने अपने जैमर ऑन किए, आकाशतीर का एन्क्रिप्टेड नेटवर्क तुरंत हरकत में आ गया। इस सिस्टम की खासियत यह है कि अगर दुश्मन एक रडार को जैम करता है, तो सिस्टम बिना किसी देरी के पूरा डेटा दूसरे रडार पर शिफ्ट कर देता है, जिससे दुश्मन की लोकेशन कभी भी आंखों से ओझल नहीं होती।
सेंसर दुश्मन के ड्रोन या क्रूज मिसाइल को ट्रैक करता है, सिस्टम का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तुरंत डिसाइड करता है कि भारत का कौन सा हथियार, चाहे वो आकाश मिसाइल हो, स्पाइडर सिस्टम हो या इग्ला एस, उसे मारने के लिए सबसे अच्छी पोजीशन में है। और फिर शूटर बिना किसी मानवीय देरी के मिसाइल फायर कर देता है। एक सेकंड के हजारवें हिस्से में दुश्मन का काम तमाम हो जाता है। यह नेटवर्क इतना अचूक है कि दुश्मन को यह सोचने का मौका भी नहीं मिलता कि उस पर हमला कहां से हुआ। निगरानी, कमांड और फायरिंग को अलग-अलग रखने के बजाय इस नेटवर्क ने तीनों को एक ही डिजिटल मस्तिष्क में जोड़ दिया है।
नया भारत: कूटनीति और ताकत का महासंगम
इस पूरे घटनाक्रम को अगर हम एक बड़े कैनवास पर देखें, तो यह सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच का सीमा विवाद नहीं है। इसके तार चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति से सीधे तौर पर जुड़े हैं। चीन लगातार पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल करके अरब सागर में अपनी नौसैनिक पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका के कड़े रुख के कारण चीन अब सीधे टकराने के बजाय पाकिस्तान को प्रॉक्सी की तरह इस्तेमाल करके भारत की ताकत तौल रहा है। लेकिन भारतीय नौसेना का अरब सागर में यह आक्रामक रुख ड्रैगन के लिए एक सीधा और खौफनाक मैसेज है। भारत ने साफ कर दिया है कि उसके समुद्री क्षेत्र में किसी भी तीसरे देश का अतिक्रमण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भारत की इस बढ़ती हुई ताकत के पीछे एक बहुत बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक आधार भी है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था है और अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी के दम पर ग्लोबल साउथ की सबसे बुलंद आवाज बन चुका है। एक तरफ जहां दुनिया भर के देश गुटबाजी में उलझे हैं, वहीं भारत अपने नेशनल इंट्रेस्ट को सबसे ऊपर रखकर स्वतंत्र फैसले ले रहा है। भारत का तेजी से बढ़ता हुआ डिफेंस एक्सपोर्ट और स्वदेशी हथियारों पर फोकस, पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक बुरा सपना बन चुका है। मोदी सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत आज हम सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहे, बल्कि खुद बना रहे हैं। आकाशतीर जैसे प्रोजेक्ट्स इसी बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि भारत अब आयात की गई तकनीक के भरोसे नहीं है, बल्कि अपना खुद का ऐसा इकोसिस्टम बना चुका है जो किसी भी विदेशी जैमर या हैकिंग का शिकार नहीं हो सकता।
पी-8आई पोसाइडन का आसमान में मंडराना, समंदर में आईएनएस कोलकाता की दहाड़ और जमीन पर आकाशतीर का एक्टिवेशन, इन तीनों ने मिलकर चीन और पाकिस्तान दोनों का नेक्सस बुरी तरह तोड़ कर रख दिया है। भारत अब मल्टी डोमेन वॉरफेयर यानी युद्ध के हर मोर्चे के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत की रणनीति अब रिएक्टिव नहीं रही, बल्कि प्रोएक्टिव हो चुकी है। अब भारत हमला होने का इंतजार नहीं करता, बल्कि खतरे को उसके पैदा होने से पहले ही कुचलने की ताकत रखता है। दुनिया देख रही है कि कैसे भारत अपनी कूटनीति, मजबूत अर्थव्यवस्था और अत्याधुनिक डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर ग्लोबल पावर बन रहा है।
15 सितंबर को समंदर में जो चिंगारी भड़की थी, उसने पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि नया भारत किसी भी उकसावे के सामने झुकने वाला नहीं है। समंदर में पी-8आई की चील जैसी निगाहें और जमीन पर आकाशतीर के जरिए वज्र एयर डिफेंस वॉरियर्स का अचूक निशाना, यह दोनों मिलकर भारत के इर्द-गिर्द एक ऐसी अभेद्य दीवार बना रहे हैं जिसे भेदने की जुर्रत करना किसी भी दुश्मन के लिए सबसे बड़ी भूल साबित होगी।
4. SEO Tags & Hashtags





