ब्रिटेन में बड़ा उलटफेर: नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के कार्यभार संभालते ही भारत-UK CETA डील हुई लागू

लंदन के 10 डाउनिंग स्ट्रीट में सत्ता का समीकरण एक बार फिर पूरी तरह बदल गया है। ब्रिटेन की राजनीति में आए इस बड़े तूफान ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। कीर स्टार्मर की विदाई के बाद अब ब्रिटेन की कमान एक नए नेतृत्व के हाथों में है। 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम को निर्विरोध रूप से लेबर पार्टी का नया नेता चुन लिया गया है। बिना किसी विरोध के बर्नहैम अब ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन चुके हैं। सोमवार को सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें आधिकारिक रूप से नया लीडर घोषित कर दिया जाएगा। इस राजनीतिक बदलाव के बीच सबसे महत्वपूर्ण खबर भारत के लिए है।

जिस सप्ताह एंडी बर्नहैम ने ब्रिटेन की सत्ता संभाली, ठीक उसी समय भारत और ब्रिटेन के बीच बहुप्रतीक्षित ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) लागू हो गया है। यह समझौता कोई सामान्य डील नहीं है, बल्कि एक ऐसा रणनीतिक कदम है जिसका दोनों देशों को वर्षों से इंतजार था। एक समय था जब ब्रिटेन का दुनिया पर दबदबा था, लेकिन आज की भू-राजनीतिक हकीकत यह है कि ब्रिटेन की डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालने की ताकत केवल भारत के पास है। अब फैसले लंदन की नहीं, बल्कि नई दिल्ली की शर्तों पर हो रहे हैं।

ब्रिटेन की जरूरत और भारत का दबदबा

ब्रेग्जिट के बाद से ब्रिटेन लगातार आर्थिक झटकों से उबरने की कोशिश कर रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, महंगाई चरम पर है और सप्लाई चेन बाधित है। ऐसे में ब्रिटेन को एक मजबूत ग्लोबल पार्टनर की तलाश थी, और उनकी यह तलाश भारत पर आकर रुकी है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। 140 करोड़ का विशाल बाजार और भारत की सशक्त विदेश नीति ने ब्रिटेन को यह समझा दिया है कि वैश्विक पटल पर बने रहने के लिए भारत के साथ व्यापारिक डील करना उनकी मजबूरी है।

CETA का लागू होना भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति का प्रमाण है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खुल गए हैं। हमारे कपड़ा, चमड़ा, कृषि और आईटी क्षेत्रों को इस डील से अभूतपूर्व मजबूती मिलने वाली है। अब भारतीय उत्पाद बिना किसी भारी सीमा शुल्क के ब्रिटिश बाजारों में पहुंचेंगे, जिससे भारतीय व्यापारियों का मुनाफा काफी बढ़ जाएगा।

लेबर पार्टी के दृष्टिकोण में बदलाव

इतिहास गवाह है कि ब्रिटेन की लेबर पार्टी का रुख हमेशा भारत के प्रति बहुत नरम नहीं रहा है। जेरेमी कॉर्बिन के समय में पार्टी ने कश्मीर जैसे भारत के आंतरिक मुद्दों पर हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। लेकिन अब समय बदल चुका है। एंडी बर्नहैम एक व्यवहारिक और सुलझे हुए नेता हैं। ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर के रूप में उन्होंने भारतीय समुदाय के योगदान को करीब से देखा है। वे जानते हैं कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और आईटी क्षेत्र भारतीयों के बिना नहीं चल सकते।

एंडी बर्नहैम स्पष्ट रूप से समझते हैं कि आज का भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से बात करता है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बर्नहैम के कार्यकाल में भारत-ब्रिटेन संबंध अपने सबसे सुनहरे दौर में होंगे। यह ब्रिटेन की कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि उनकी आवश्यकता है। उन्हें भारतीय निवेश, छात्र और उन पेशेवरों की जरूरत है जो उनके कॉर्पोरेट जगत की रीढ़ हैं।

CETA समझौते की जमीनी हकीकत

CETA डील लागू होने से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव आएंगे। यह सिर्फ कागजी समझौता नहीं, बल्कि एक ऐसा कानूनी ढांचा है जो व्यापारिक बाधाओं को पूरी तरह खत्म कर देगा। भारत लंबे समय से अपने कुशल पेशेवरों के लिए आसान वीजा नियमों की मांग कर रहा था। इस डील के बाद भारतीय युवाओं के लिए ब्रिटेन में करियर बनाना अब और भी आसान हो जाएगा।

वहीं, ब्रिटेन को अपनी स्कॉच व्हिस्की और ऑटोमोबाइल के लिए भारत का बड़ा बाजार मिल गया है। हालांकि, इसका सबसे बड़ा लाभ भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को होगा। जब भारतीय उत्पाद ब्रिटिश सुपरमार्केट की शोभा बढ़ाएंगे, तो इसका सीधा लाभ भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मिलेगा। यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की एक बड़ी जीत है, जो दिखाती है कि एक राष्ट्रवादी सरकार बिना किसी दबाव के देशहित में कैसे फैसले लेती है।

भारत विरोधी लॉबी को बड़ा झटका

ब्रिटेन में सक्रिय कुछ भारत विरोधी ताकतों और पाकिस्तानी लॉबी ने हमेशा भारत-UK संबंधों को बिगाड़ने का प्रयास किया है। लेकिन एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने और CETA के लागू होने से इन सभी साजिशों पर पानी फिर गया है।

यह स्पष्ट हो गया है कि आज की कूटनीति में केवल आर्थिक शक्ति की ही सुनवाई होती है। शक्ति का केंद्र अब नई दिल्ली है। ब्रिटेन का नया नेतृत्व समझ चुका है कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने या भारत विरोधियों को शरण देने का मतलब है करोड़ों डॉलर के व्यापारिक नुकसान को न्योता देना।

भविष्य की नई राह

एंडी बर्नहैम के लिए आगे की चुनौतियां कम नहीं हैं, लेकिन भारत के साथ यह रणनीतिक साझेदारी उनके लिए संजीवनी साबित होगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच ब्रिटेन को भारत जैसा एक मजबूत और विश्वसनीय मित्र चाहिए।

रक्षा उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों देश अब मिलकर काम करेंगे। आने वाले समय में ब्रिटिश कंपनियां भारत को अपना मैन्युफैक्चरिंग हब बनाएंगी, क्योंकि यहाँ उन्हें सस्ता श्रम, स्थिर सरकार और दुनिया का सबसे बड़ा बाजार उपलब्ध है। बर्नहैम के शासन में यह साझेदारी और भी प्रगाढ़ होगी।

निष्कर्ष यह है कि ब्रिटेन में यह सत्ता परिवर्तन भारत के लिए एक बड़ा अवसर बनकर आया है। भारत ने अपनी आर्थिक और कूटनीतिक शक्ति का परिचय देते हुए एक ऐसी डील हासिल की है जो आने वाले समय में हमारे विकास को नई गति देगी। यह बदलता हुआ ‘नया भारत’ है, जो दुनिया को अपनी शर्तों पर चलने के लिए प्रेरित कर रहा है।

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