एक तरफ जहां दुनिया के कई हिस्सों में रूस-यूक्रेन और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग शांत होने का नाम नहीं ले रही है, वहीं दूसरी तरफ एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में भी हलचल तेज है। चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर बढ़ती सक्रियता को देखते हुए भारत अपनी सैन्य शक्ति को अभेद्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी दिशा में भारतीय सेना के हाथ एक ऐसा अचूक ‘ब्रह्मास्त्र’ लगा है, जिसने अपने पहले ही परीक्षण में पूरी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञों को अचंभित कर दिया है। यह कोई साधारण हथियार नहीं है, बल्कि एक ऐसा अत्याधुनिक सिस्टम है जो मात्र 21 सेकंड के भीतर युद्ध की दिशा बदलने की क्षमता रखता है। हाल ही में महू से सामने आए इसके वीडियो ने दुश्मन देशों के खेमे में खलबली मचा दी है। आखिर क्या है यह नया हथियार, कैसे यह दुश्मन को संभलने का मौका दिए बिना उसे तबाह कर सकता है, और चीन-पाकिस्तान के खिलाफ यह भारत के लिए गेम चेंजर क्यों साबित होगा?
वैश्विक रक्षा समुदाय में चर्चा का केंद्र बना यह हथियार ‘गरुड़ास्त्र’ है। इंटरनेट पर वायरल हो रहा इसका 21 सेकंड का वीडियो भारत की बढ़ती रक्षा तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता का जीवंत प्रमाण है। मध्य प्रदेश के महू स्थित इन्फैंट्री स्कूल में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस स्वदेशी गरुड़ास्त्र का आक्रामक प्रदर्शन किया गया। तकनीकी भाषा में इसे ‘लॉन्ग रेंज 120 एमएम व्हीकल माउंटेड मोर्टार सिस्टम’ कहा जाता है, जिसे पुणे की रक्षा कंपनी निबे लिमिटेड (Nibe Limited) ने विकसित किया है। भारतीय सेना ने इसका परीक्षण ‘नो कॉस्ट नो कमिटमेंट’ के आधार पर किया, ताकि इसकी वास्तविक मारक क्षमता और मैदानी स्तर पर इसकी उपयोगिता की जांच की जा सके। महू की फायरिंग रेंज में हुए ट्रायल के दौरान इसके परिणाम सेना की उम्मीदों से कहीं अधिक सटीक और घातक रहे।
गरुड़ास्त्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी त्वरित प्रतिक्रिया और मारक क्षमता है। ट्रायल वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि यह मोर्टार सिस्टम 30 सेकंड से भी कम समय में फायरिंग मोड में आ जाता है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में समय ही सबसे निर्णायक कारक होता है और गरुड़ास्त्र इसी समय की बचत कर दुश्मन पर भारी पड़ता है। लक्ष्य निर्धारित होते ही यह सिस्टम उसे ऑटोमैटिक तरीके से लॉक करता है और बमबारी शुरू कर देता है। इसकी मारक गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र दो जवानों की टीम ने 60 सेकंड के भीतर 12 गोले दाग दिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इतनी तीव्र फायरिंग के बाद भी प्रत्येक गोले ने सटीक निशाने को भेदा, जो यह साबित करता है कि विषम परिस्थितियों में यह अकेला सिस्टम दुश्मन की पूरी सैन्य टुकड़ी को नेस्तनाबूद करने के लिए पर्याप्त है।
इस हथियार की एक और वैश्विक स्तर की खूबी ‘मल्टीपल राउंड साइमलटेनियस इम्पैक्ट’ (MRSI) तकनीक है। इसे आसान शब्दों में समझें तो, गरुड़ास्त्र से अलग-अलग कोणों और समय पर दागे गए तीन गोले एक साथ, एक ही सेकंड में लक्ष्य पर गिरते हैं। युद्ध के मैदान में इस तकनीक का उपयोग करने से दुश्मन को यह अनुमान लगाने का समय ही नहीं मिलता कि हमला किस दिशा से और कितनी दूरी से हुआ है। जब तक दुश्मन आत्मरक्षा के लिए कोई उपाय सोचेगा, तब तक एक साथ होने वाले कई शक्तिशाली धमाके उसे खत्म कर चुके होंगे। यह विशेषता गरुड़ास्त्र को पारंपरिक तोपखानों की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और घातक बनाती है।
निशाने की सटीकता के मामले में गरुड़ास्त्र पुराने मोर्टार सिस्टम की तुलना में सौ गुना बेहतर है। इसमें नवीनतम जीपीएस (GPS) और लेजर गाइडेंस तकनीक का समावेश किया गया है। परीक्षण के दौरान इसने 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मात्र 3 मीटर के छोटे से लक्ष्य को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया। पुराने मोर्टारों में हवा के दबाव के कारण गोला भटकने की संभावना रहती थी, जिससे दुश्मन बच निकलता था या नागरिक संपत्तियों को नुकसान होता था। लेकिन गरुड़ास्त्र एक ‘स्मार्ट वेपन’ है जो पिन-पॉइंट सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को खत्म करता है। इसका मंत्र स्पष्ट है—एक गोला, एक निशाना और मिशन सफल।
आधुनिक युद्ध के बदलते परिवेश में ‘शूट एंड स्कूट’ (Shoot and Scoot) फीचर भारतीय सेना के लिए वरदान साबित होगा। यूक्रेन-रूस युद्ध ने यह सिखाया है कि एक ही स्थान पर खड़े होकर फायरिंग करना आत्मघाती हो सकता है, क्योंकि दुश्मन के रडार और ड्रोन आपकी लोकेशन का पता लगाकर तुरंत जवाबी हमला (Counter Battery Fire) कर सकते हैं। गरुड़ास्त्र एक शक्तिशाली ट्रक पर माउंटेड है, जिसका अर्थ है कि भारतीय सैनिक तेजी से अग्रिम मोर्चे पर पहुंचकर हमला करेंगे और दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से पहले ही वहां से सुरक्षित निकल जाएंगे। यह ‘हिट एंड रन’ रणनीति युद्ध क्षेत्र में हमारे सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारत की भौगोलिक चुनौतियों, जैसे हिमालय की बर्फीली चोटियों और लद्दाख-अरुणाचल की संकरी पहाड़ियों को देखते हुए यह हथियार अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन के साथ लगती एलएसी (LAC) और पाकिस्तान के साथ एलओसी (LoC) पर पुरानी भारी तोपों को ले जाना और तैनात करना बहुत समय लेने वाला और कठिन कार्य होता है। भारी हथियारों की धीमी गति दुश्मन को तैयारी का मौका दे देती है। गरुड़ास्त्र इसी रसद और तैनाती संबंधी चुनौती का सबसे सटीक समाधान है।
वाहन पर सवार होने के कारण इसे पहाड़ी रास्तों, रेगिस्तानों या घने जंगलों में अत्यधिक तेज गति से तैनात किया जा सकता है। यह हमारी पैदल सेना (Infantry) के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। सीमा पर गश्त के दौरान या किसी गुप्त ऑपरेशन में यह मोबाइल सिस्टम सैनिकों के साथ साये की तरह चल सकता है और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कवर फायर प्रदान कर सकता है। चीन और पाकिस्तान जैसी सीमाओं पर हमें ऐसे ही फुर्तीले और मारक हथियारों की दरकार है।
गरुड़ास्त्र का सफल विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की एक ऐतिहासिक जीत है। एक दौर था जब भारत छोटी-छोटी सैन्य जरूरतों के लिए भी रूस, अमेरिका या यूरोप पर निर्भर था। लेकिन आज भारत का डिफेंस इकोसिस्टम बदल चुका है। निबे लिमिटेड द्वारा तैयार यह सिस्टम पूरी तरह भारतीय तकनीक और नवाचार पर आधारित है। यह वैश्विक स्तर पर संदेश देता है कि भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय हथियारों का निर्माता भी बन चुका है।
ऐसे आधुनिक सिस्टम के सेना में शामिल होने से भारत का सामरिक दबदबा बढ़ेगा। जब दुश्मन को पता चलेगा कि भारत के पास ऐसे स्मार्ट हथियार हैं जो 10 किलोमीटर दूर से ही उनके बंकरों को बिना अपनी पहचान उजागर किए तबाह कर सकते हैं, तो उनकी घुसपैठ की कोशिशों पर विराम लगेगा। साथ ही, पूर्णतः स्वदेशी होने के कारण यह भविष्य में भारत के रक्षा निर्यात (Defense Export) को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और रक्षा उद्योग दोनों को लाभ होगा।
भविष्य के युद्ध तकनीक और गति के होंगे। गरुड़ास्त्र भारतीय सेना को वह तकनीकी श्रेष्ठता प्रदान करता है जिसकी आज के युग में आवश्यकता है। यह गाइडेड मिसाइलों और स्मार्ट शेल्स का उपयोग कर सकता है, जिससे कोलैटरल डैमेज (आम नागरिकों को होने वाला नुकसान) की संभावना न्यूनतम हो जाती है। महू के सफल परीक्षण के बाद, यह स्पष्ट है कि यह मोबाइल मोर्टार सिस्टम जल्द ही सीमाओं पर तैनात होकर दुश्मन के दांत खट्टे करने के लिए तैयार होगा।
निष्कर्षतः, गरुड़ास्त्र केवल एक मशीन नहीं बल्कि नए भारत की रक्षा तैयारियों का प्रतीक है। यह चीन और पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मात्र 21 सेकंड में युद्ध का पासा पलटने वाला यह देसी ब्रह्मास्त्र भारत की सीमाओं को सुरक्षा की एक नई और अटूट गारंटी प्रदान करेगा।

