आसमान के सुल्तान बदलने वाले हैं। दुनिया की महाशक्तियों का घमंड अब चकनाचूर होने वाला है। बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक और वॉशिंगटन से लेकर मॉस्को तक, रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ गई है। इस बड़ी खलबली की असली वजह है – भारत का स्वाभिमान, भारत का सामर्थ्य और भारत का अपना पांचवीं पीढ़ी का महाबली लड़ाकू विमान – AMCA!
जी हां, एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट। यह केवल एक विमान का नाम नहीं है, बल्कि यह नए भारत की वो दहाड़ है जो अब दुश्मनों के रडार पर नहीं, सीधे उनके होश उड़ाएगी। ताजा खबरों से पूरी दुनिया हैरान है। भारत के रक्षा वैज्ञानिकों, DRDO और ADA के जांबाजों ने वो कर दिखाया है जिसे नामुमकिन समझा जा रहा था। AMCA ने दो ऐसी कठिन परीक्षाएं पास की हैं, जिसके बाद अब इसकी राह रोकने वाला कोई नहीं है। अब न इंजन फेल होने का डर होगा, न दुश्मन के बचने की गुंजाइश। यह राफेल और सुखोई Su-30MKI से कई गुना अधिक घातक होगा और अमेरिका के F-35 लाइटनिंग II व रूस के Su-57 जैसे विमानों को कड़ी चुनौती देगा।
स्टील्थ का सबसे बड़ा संकट खत्म, भारत का ‘एस-डक्ट’ मास्टरस्ट्रोक
एक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट को बनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है? दुश्मन के रडार की नजरों से बचना। रडार से बचने के लिए विमान को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि रडार की किरणें उससे टकराकर वापस न लौटें। लेकिन विमान का इंजन ही स्टील्थ का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। इंजन के सामने लगे कंप्रेसर ब्लेड, जो बहुत तेजी से घूमते हैं, रडार तरंगों के लिए आईने की तरह काम करते हैं। अगर रडार की किरणें सीधे इंजन में घुस गईं, तो विमान रडार स्क्रीन पर साफ दिखने लगेगा।
पूरी दुनिया के डिजाइनर इस समस्या का हल ढूंढते रहे हैं। इसका समाधान ‘सर्पेंटाइन’ या ‘एस-डक्ट’ एयर इनटेक के रूप में निकला। यह हवा लेने वाली नली को सांप की तरह घुमावदार बना देता है, ताकि रडार की किरणें इंजन के ब्लेड तक न पहुंच सकें। लेकिन यह टेढ़ा रास्ता हवा के प्रवाह में रुकावट डालता है। अगर हवा इंजन तक सही से नहीं पहुंचती, तो इंजन की क्षमता कम हो जाती है। सबसे बड़ा खतरा ‘कंप्रेसर स्टॉल’ का होता है – यानी अचानक हवा का प्रवाह रुकना, जिससे इंजन बीच हवा में बंद हो सकता है और विमान क्रैश हो सकता है।
लेकिन भारत के ADA के वैज्ञानिकों ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिया है। ‘जर्नल ऑफ एयरोस्पेस साइंसेज एंड टेक्नोलॉजीज’ की रिपोर्ट ने दुनिया में सनसनी फैला दी है। भारतीय इंजीनियरों ने एक नई इनटेक ज्यामिति और कॉन्फ़िगरेशन विकसित किया है। उन्होंने उन्नत ‘कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स’ (CFD) मॉडलिंग और विंड टनल प्रयोगों के जरिए ऐसा मॉडिफाइड इनटेक डिजाइन किया है जिसने नया इतिहास रच दिया है।
इसके परिणाम अविश्वसनीय हैं। ट्रांसोनिक गति (ध्वनि की गति के आसपास) पर, इस नए एस-डक्ट डिजाइन ने लगभग 98% दबाव (Pressure Recovery) हासिल करने में सफलता पाई है। 98% प्रेशर रिकवरी! इसका मतलब है कि इंजन में पहुंचने वाली हवा की लगभग पूरी ऊर्जा सुरक्षित रही। घुमावदार इनटेक सिस्टम के लिए ऐसी दक्षता प्राप्त करना किसी चमत्कार से कम नहीं है। अब AMCA का इंजन न केवल दुश्मन से छिपा रहेगा, बल्कि उसे भरपूर ऑक्सीजन मिलेगी, जिससे वह अपनी पूरी क्षमता से काम करेगा। अब कंप्रेसर स्टॉल का डर खत्म हो गया है। यह ‘सुपरक्रूज’ करेगा, यानी बिना आफ्टरबर्नर के भी ध्वनि से तेज उड़ेगा और दुश्मन को भनक तक नहीं लगेगी।
IRST: वो ‘तीसरी आंख’ जो F-35 को भी ढूंढ निकालेगी
भारत केवल इंजन छिपाने तक सीमित नहीं है। हम एक ऐसा शिकारी तैयार कर रहे हैं जो अंधेरे में भी दुश्मन की आहट पहचान ले। AMCA की दूसरी बड़ी ताकत उसका स्वदेशी ‘पैसिव इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक’ (IRST) सिस्टम है। यह कोई आम ट्रैकिंग सिस्टम नहीं, बल्कि AMCA की वो तीसरी आंख है जो युद्ध का पूरा रुख बदल देगी।
IRST की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक ‘पैसिव’ सिस्टम है। यानी यह काम करते समय कोई रडार तरंग या सिग्नल नहीं छोड़ता। यह चुपचाप दुश्मन को ट्रैक करता है, और दुश्मन को पता भी नहीं चलता कि वह किसी के निशाने पर है। रडार का उपयोग जोखिम भरा होता है क्योंकि वह आपकी लोकेशन उजागर कर सकता है, लेकिन IRST के साथ ऐसा कोई खतरा नहीं है। यह AMCA को एक अदृश्य शिकारी बनाता है।
इस स्वदेशी IRST की क्षमता से अमेरिका भी हैरान है। यह ‘ड्यू-बैंड’ क्षमता वाला सिस्टम है, जो मिड-वेव (MWIR) और लॉन्ग-वेव (LWIR) दोनों स्पेक्ट्रम में काम करता है। दुनिया के ज्यादातर सिस्टम केवल इंजन की गर्मी को ट्रैक करते हैं, लेकिन भारत का यह सिस्टम स्टील्थ विमानों के ‘हार्ड-बॉडी हीट सिग्नेचर’ को भी पहचान लेगा।
जब कोई स्टील्थ विमान हवा में तेज उड़ता है, तो घर्षण के कारण उसकी बॉडी और पंख गर्म हो जाते हैं। भारत का ड्यूल-बैंड IRST इसी बेहद मामूली गर्मी को लंबी दूरी से पकड़ सकता है। इसका मतलब है कि F-35 और F-22 जैसे अमेरिकी विमान, जो रडार से बचने का दावा करते हैं, भारत के AMCA की नजरों से नहीं बच पाएंगे। वे रडार को धोखा दे सकते हैं, लेकिन अपनी बॉडी की गर्मी को नहीं। यह तकनीक भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
इस घातक IRST को AMCA के नोज सेक्शन में ‘इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम’ (EOTS) के रूप में इंटीग्रेट किया जाएगा। इसे इस तरह लगाया जाएगा कि विमान की रडार से बचने की क्षमता (RCS) पर कोई असर न पड़े। अब AMCA बिना कोई सिग्नल दिए दुश्मन के स्टील्थ विमानों का शिकार करेगा।
लक्ष्य 2035: भारत बनेगा दुनिया की हवाई महाशक्ति
ये महज कल्पना नहीं है। करीब 15,803 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट पर युद्ध स्तर पर काम जारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में पुट्टपर्थी में AMCA के कोर इंटीग्रेशन और टेस्टिंग सेंटर की नींव रखी है।
यह एक ट्विन-इंजन, मध्यम वजन वाला स्टील्थ विमान होगा, जिसमें रडार से बचने के लिए हथियारों को अंदर रखने के लिए इंटरनल वेपन बे होंगे। इसमें एडवांस एवियोनिक्स, सेंसर फ्यूजन और सुपरक्रूज जैसी सुविधाएं होंगी।
योजना के अनुसार, AMCA का पहला प्रोटोटाइप 2028-29 तक तैयार हो जाएगा। इसके बाद कड़े परीक्षणों से गुजरते हुए, 2035 तक इसे भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य है।
2035 वो साल होगा जब भारत आत्मनिर्भरता का नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। राफेल हमारी आज की ताकत है, सुखोई हमारा मुख्य आधार है, लेकिन AMCA हमारा भविष्य है। यह वो अस्त्र है जो दुश्मनों को भारत की ओर आंख उठाने से भी डराएगा।
इंजन इनटेक की सफलता और IRST का एकीकरण सिर्फ तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि नए भारत के उदय की कहानी है। यह प्रमाण है कि भारत अब रक्षा तकनीक के लिए किसी का मोहताज नहीं है। AMCA तैयार हो रहा है, और इसके साथ ही एक अजेय और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हो रहा है! जय हिंद!

