भारत की सीमाओं पर इस समय एक ऐसा शांत लेकिन अत्यंत प्रभावी ऑपरेशन चल रहा है, जिसने पड़ोसी देशों की नींद उड़ा दी है। पुरानी और साधारण कटीली तारों की जगह अब एक ऐसी हाईटेक और ‘अदृश्य’ दीवार तैयार की जा रही है, जिसे न तो काटा जा सकता है और न ही पार किया जा सकता है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम करने के बाद, अब पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश बॉर्डर पर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र बिछाया जा रहा है। यह केवल लोहे की जाली नहीं, बल्कि एक आधुनिक सुरक्षा कवच है जो रात के अंधेरे, घने कोहरे और मूसलाधार बारिश में भी घुसपैठियों को आसानी से ट्रैक कर लेता है। आखिर पाकिस्तान बॉर्डर की सफलता के बाद भारत बांग्लादेश सीमा पर क्या बड़ा बदलाव करने जा रहा है? क्या इस तकनीक से घुसपैठ पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी?
पाकिस्तान के साथ भारत की 3323 किलोमीटर लंबी सीमा है। एक दौर था जब वहां की खुली सीमाओं से घुसपैठिए आसानी से दाखिल होकर देश की शांति भंग करते थे। लेकिन भारत सरकार और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने मिलकर एक ऐसा मास्टरप्लान बनाया जिसने सुरक्षा की परिभाषा ही बदल दी। बॉर्डर पर 8 से 10 फीट ऊंची मजबूत फेंसिंग और संवेदनशील जगहों पर डबल लेयर फेंसिंग यानी दोहरी दीवारें खड़ी कर दी गईं।
इस फेंसिंग के साथ हाई-पावर फ्लड लाइट्स और सख्त पेट्रोलिंग ने घुसपैठ की कमर तोड़ दी। जहाँ पहले सैकड़ों लोग चोरी-छिपे घुसने की कोशिश करते थे, आज वह आंकड़ा लगभग शून्य हो गया है। पश्चिमी मोर्चे पर इस सफलता के बाद अब असली चुनौती पूर्वी मोर्चे पर है, क्योंकि बांग्लादेश सीमा की भौगोलिक परिस्थितियां पाकिस्तान से कहीं अधिक जटिल और खतरनाक हैं।
बांग्लादेश के साथ भारत की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी जमीनी सीमाओं में से एक है। पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से लगने वाली यह सीमा उफनती नदियों, खतरनाक दलदलों और घने जंगलों से होकर गुजरती है। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में लोहे के खंभे गाड़ना और तार लगाना लगभग असंभव है। अक्सर बाढ़ में तारबंदी बह जाती है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर, ड्रग माफिया और घुसपैठिए सक्रिय रहते हैं।
दोनों देशों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक समानता के कारण घुसपैठियों को भीड़ में पहचानना बहुत कठिन होता है। दुर्गम रास्तों के कारण पेट्रोलिंग में भी जवानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या का समाधान है— ‘स्मार्ट फेंसिंग’। एक ऐसा सिस्टम जो बिना इंसान के भी 24 घंटे निगरानी करने में सक्षम है।
साधारण फेंसिंग की सीमाओं को देखते हुए अब ‘स्मार्ट फेंसिंग’ की एंट्री हुई है, जिसे ‘न्यू इंडिया’ की तीसरी आंख कहा जा सकता है। CIBMS (कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम) के तहत इस पर युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। यह लेजर, सेंसर और कैमरों से बनी एक इलेक्ट्रॉनिक और अदृश्य दीवार है। अगर कोई भी सीमा के पास आता है, तो सीधे कंट्रोल रूम में अलर्ट अलार्म बजने लगता है। अब नदियां हो या घने जंगल, यह फेंसिंग हर जगह अचूक पहरा दे रही है।
स्मार्ट फेंसिंग के कार्य करने के तरीके को समझें तो इसके ‘सेंसर्स’ सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसमें मोशन सेंसर, इंफ्रारेड सेंसर, वाइब्रेशन और फाइबर ऑप्टिक सेंसर लगाए गए हैं। यदि रात के अंधेरे में कोई तस्कर सीमा पार करने की कोशिश करता है, तो उसके शरीर की गर्मी को इंफ्रारेड सेंसर तुरंत पकड़ लेते हैं और माइक्रो-सेकंड में खतरे का सिग्नल कंट्रोल रूम को भेज देते हैं।
इस सिस्टम की आंखें इसके ‘PTZ’ (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरे हैं, जो 360 डिग्री घूम सकते हैं और कई किलोमीटर दूर तक फोकस कर सकते हैं। इसके साथ थर्मल इमेजिंग कैमरे रात में भी स्पष्ट दृश्य दिखाते हैं। इन सबका संचालन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) करता है। AI इतना स्मार्ट है कि वह इंसान, जानवर और हवा से हिलते पेड़ों के बीच अंतर समझ लेता है, जिससे अनावश्यक अलार्म नहीं बजते।
जब कोई इस हाईटेक जाल में फंसता है, तो रिस्पॉन्स बहुत तेज होता है। पूरा सिस्टम हाई-स्पीड फाइबर केबल के जरिए कमांड सेंटर से जुड़ा होता है। जैसे ही सेंसर हलचल भांपते हैं, स्क्रीन पर लाइव लोकेशन और वीडियो पॉप-अप हो जाता है। इसके तुरंत बाद आधुनिक ड्रोन उस सटीक लोकेशन की ओर उड़ान भरते हैं।
GPS ट्रैकिंग की मदद से ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ (QRT) पलक झपकते ही मौके पर पहुंच जाती है। घुसपैठिए को संभलने का मौका भी नहीं मिलता और वह BSF की गिरफ्त में होता है। सोलर पावर बैकअप के कारण यह सिस्टम बिजली कटने पर भी बंद नहीं होता, जिससे सीमाएं हमेशा सुरक्षित रहती हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर की चुनौतियां अलग हैं। पाकिस्तान पर सैन्य घुसपैठ का खतरा रहता है, जबकि बांग्लादेश सीमा पर अवैध प्रवास और तस्करी एक बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौती है। अदृश्य लेजर और सेंसर तकनीक नदियों और दलदली इलाकों में भी कारगर है, जिससे सीमा पार बैठे आपराधिक सिंडिकेट्स में हड़कंप मचा हुआ है।
हालांकि, इस तकनीक की लागत और रखरखाव एक बड़ी चुनौती है। बाढ़ वाले क्षेत्रों में इन संवेदनशील उपकरणों को सुरक्षित रखना और 24 घंटे इंटरनेट व पावर सप्लाई सुनिश्चित करना कठिन काम है। इसके लिए जवानों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
इन चुनौतियों के बावजूद परिणाम उत्साहजनक हैं। सरकार इसे पूरे 4096 किलोमीटर बॉर्डर पर लागू करने की तैयारी में है। भविष्य में यह सिस्टम डेटा एनालिसिस के जरिए यह भी बताएगा कि तस्कर किस मौसम और किस रास्ते का सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं, जिससे सुरक्षा और भी पुख्ता हो जाएगी।
भारत की यह हाईटेक फेंसिंग आंतरिक सुरक्षा के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित हो रही है। पश्चिम में मजबूत तारों के बाद अब पूरब में AI, ड्रोन और सेंसर का यह जाल दुश्मनों के लिए काल बन रहा है। यह नए भारत का वह अभेद्य किला है जिसे भेदना अब नामुमकिन है। हमारी सीमाएं अब दुनिया की सबसे उन्नत तकनीक के दम पर पूरी तरह सुरक्षित हैं।

