CWG 2026: जादूमणि सिंह ने पाकिस्तान को हराकर पक्का किया पदक, कारगिल के वीरों को समर्पित की ऐतिहासिक जीत

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के मुक्केबाजी रिंग से भारत के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर आई है। 22 वर्षीय उभरते हुए भारतीय मुक्केबाज जादूमणि सिंह ने अपने असाधारण कौशल के दम पर न केवल सेमीफाइनल में प्रवेश किया, बल्कि देश के लिए एक और पदक भी सुरक्षित कर लिया है। हालांकि, उनकी इस जीत से कहीं अधिक चर्चा उस भावुक संदेश की हो रही है, जो उन्होंने पाकिस्तान पर मिली शानदार जीत के बाद साझा किया।

यह मुकाबला 26 जुलाई को हुआ, जिस दिन पूरा देश कारगिल विजय दिवस के गौरव में डूबा था। इसी ऐतिहासिक दिन भारतीय मुक्केबाज का सामना पाकिस्तान के सुमामा रहमान से हुआ। हाई-वोल्टेज मुकाबले में दोनों मुक्केबाज पूरी ऊर्जा के साथ उतरे, लेकिन जादूमणि की सटीक तकनीक और फुटवर्क के आगे पाकिस्तानी खिलाड़ी बेबस नजर आया। पहले राउंड में कड़ा संघर्ष देखने को मिला और जजों ने 3-2 से भारतीय बॉक्सर को बढ़त दी। इसके बाद अगले दो राउंड में जादूमणि ने अपनी आक्रामक रणनीति से मैच पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप जजों ने सर्वसम्मति से उन्हें 5-0 से विजेता घोषित किया।

जादूमणि के लिए यह केवल खेल की जीत नहीं थी। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मिली इस सफलता ने इसे और भी विशेष बना दिया। मैच के बाद उन्होंने अपनी जीत कारगिल के वीर सपूतों को समर्पित करते हुए कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। वर्ष 1999 में आज ही के दिन भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए ‘ऑपरेशन विजय’ के तहत चोटियों पर दोबारा तिरंगा फहराया था। जादूमणि के इस संदेश ने खेल के मैदान में देशभक्ति का जज्बा भर दिया, जिसकी देशभर में सराहना हो रही है।

टूर्नामेंट में जादूमणि का सफर अब तक बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने राउंड ऑफ 32 में स्कॉटलैंड के एरॉन कुलेन को 5-0 से मात देकर अपने अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद पाकिस्तान और फिर क्वार्टर फाइनल में जाम्बिया के वेंगो वाले को भी एकतरफा अंदाज में 5-0 से परास्त किया। मणिपुर से आने वाले जादूमणि सिंह उस राज्य की गौरवशाली बॉक्सिंग परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में रजत पदक जीतने के बाद, अब उनकी निगाहें कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक पर टिकी हैं। उनकी लगातार मिल रही बड़ी जीतें उनकी बेहतरीन फॉर्म और डिफेंसिव तकनीक का प्रमाण हैं।

सेमीफाइनल में अब जादूमणि का सामना नामीबिया के फिलिप हाओसेब से होगा। हालांकि फिलिप अच्छी लय में हैं, लेकिन जादूमणि के आत्मविश्वास को देखते हुए भारतीय प्रशंसकों को उनसे काफी उम्मीदें हैं। इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजी दल का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा है। अब तक कुल 10 भारतीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं, जिसका अर्थ है कि भारत के खाते में कम से कम 10 पदक (न्यूनतम कांस्य) सुनिश्चित हो चुके हैं।

भारत ने पिछले बर्मिंघम खेलों (2022) के 7 पदकों के रिकॉर्ड को इस बार सेमीफाइनल से पहले ही पीछे छोड़ दिया है। भारतीय मुक्केबाजी के स्तर में सुधार का श्रेय बेहतर प्रशिक्षण और युवाओं के बढ़ते आत्मविश्वास को जाता है। जादूमणि सिंह जैसे खिलाड़ी यह साबित कर रहे हैं कि मेहनत और अनुशासन के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा गर्व से लहराया जा सकता है। उनकी संघर्षपूर्ण कहानी और लगातार बेहतर होता प्रदर्शन भविष्य के मुक्केबाजों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

अब पूरे देश की नजरें जादूमणि के अगले मुकाबले पर टिकी हैं। यदि वह सेमीफाइनल जीत जाते हैं, तो वह स्वर्ण पदक के फाइनल मुकाबले में कदम रखेंगे। पाकिस्तान के खिलाफ उनकी धमाकेदार जीत और कारगिल के शहीदों को दिया गया सम्मान उन्हें इस कॉमनवेल्थ गेम्स का सबसे चर्चित सितारा बना चुका है। पूरा देश उम्मीद कर रहा है कि जादूमणि का यह स्वर्णिम सफर पदक के रंग को सोने में बदलकर ही समाप्त हो।

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