‘कोई भी सीमा सुरक्षित नहीं’: अमेरिका-ईरान महायुद्ध से क्या शुरू हो चुका है तीसरा विश्व युद्ध?

मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) इस वक्त भीषण आग की चपेट में है। आसमान से मिसाइलें बरस रही हैं और चारों ओर तबाही का मंजर है। अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव, जो कभी केवल बयानों तक सीमित था, अब एक पूर्ण युद्ध (Full Scale War) में बदल चुका है। पिछले सात दिनों से ईरान के ऊपर युद्धक विमानों की गड़गड़ाहट और धमाकों की गूंज सुनाई दे रही है। यह महज एक सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि एक ऐसा महायुद्ध है जो मिडिल ईस्ट के भविष्य को हमेशा के लिए बदल सकता है। जहां अमेरिका पूरी ताकत से ईरान को झुकाने में लगा है, वहीं ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वालों में से नहीं है। अब उसकी मिसाइलों का निशाना सीधे अमेरिकी सहयोगी देश बन रहे हैं। ईरान की ताजा धमकी ने पेंटागन से लेकर यूरोप तक हड़कंप मचा दिया है—उसका साफ कहना है कि अब कोई भी सरहद महफूज नहीं रहेगी। यह तीसरे विश्व युद्ध की स्पष्ट चेतावनी है।

लगातार सातवीं रात: अमेरिका का विनाशकारी हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का लक्ष्य अब बिल्कुल साफ है—ईरान की सैन्य क्षमताओं को जड़ से खत्म करना। पिछले एक सप्ताह से अमेरिका ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर भारी बमबारी कर रहा है। यह कोई साधारण स्ट्राइक नहीं, बल्कि ईरान की कमर तोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति है। रात के अंधेरे में बी-2 और एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स जब ईरान की सीमा में दाखिल होते हैं, तो दहशत का माहौल पैदा हो जाता है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क्स को पूरी तरह पंगु बनाना है।

ईरान का पलटवार और खतरनाक अल्टीमेटम

ईरान भी इस युद्ध में खामोश नहीं है। उसने कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों में स्थित प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इसका अर्थ यह है कि युद्ध अब केवल ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल चुका है।

ईरान के सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार, मेजर जनरल मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि ईरान अब ‘प्रोएक्टिव मोड’ में है। उनका कहना है कि अब राजनीतिक सीमाओं का कोई महत्व नहीं रह गया है। जो भी देश अमेरिका को अपना हवाई क्षेत्र या जमीन इस्तेमाल करने देगा, वह ईरान का सीधा दुश्मन होगा। इसी बीच, IRGC की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर माजिद मौसावी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अपने ऑपरेशन बंद नहीं करता, तब तक ईरान के हमले जारी रहेंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर प्रहार: ईरान को कमजोर करने की चाल

इस जंग का सबसे भयावह पहलू यह है कि अब रिहायशी और नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा रहा है। ईरान का दावा है कि अमेरिका रेलवे स्टेशन, पुल, बिजली घर और हवाई अड्डों को तबाह कर रहा है। हालांकि अमेरिकी कमांड इसे स्वीकार नहीं कर रहा है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही इशारा कर रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास बंदर खमीर इलाके में महत्वपूर्ण पुलों को उड़ा दिया गया है। इसके पीछे अमेरिका की बड़ी रणनीतिक चाल है—ईरान के सबसे प्रमुख बंदरगाह ‘बंदर अब्बास’ का संपर्क राजधानी तेहरान और मध्य ईरान से काटना। जब सप्लाई लाइन ही कट जाएगी, तो सेना की आवाजाही और रसद की आपूर्ति ठप हो जाएगी। यह बिना जमीनी युद्ध लड़े किसी देश को भीतर से खोखला करने की आधुनिक युद्ध नीति है।

जान-माल का भारी नुकसान और हताहतों के आंकड़े

युद्ध की कीमत हमेशा आम जनता को चुकानी पड़ती है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हालिया अमेरिकी हमलों में 46 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हैं। शुक्रवार को एक पुल पर हुए हमले में 8 बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई।

दूसरी ओर, सुपरपावर अमेरिका को भी इस संघर्ष में चोट पहुंच रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक 14 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं और 427 से अधिक घायल हुए हैं। यह आंकड़े साबित करते हैं कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने में सक्षम हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट और भविष्य की राह

अमेरिका का गेम प्लान भले ही ईरान को कमजोर करना हो, लेकिन ईरान के पास मिसाइलों का एक विशाल और आधुनिक जखीरा है। कतर का अल उदेद एयर बेस और बहरीन में तैनात अमेरिका का पांचवां बेड़ा (Fifth Fleet) अब ईरान की सीधी पहुंच में हैं।

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजार पर पड़ेगा। दुनिया का 20% कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो जाएगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की गर्त में गिर सकती है। क्या दुनिया एक और बड़े विनाश की ओर बढ़ रही है? फिलहाल हालात बेकाबू हैं और मिडिल ईस्ट का बारूदी धुआं पूरी दुनिया को डरा रहा है।

 

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