114 राफेल विमानों की मेगा डील: मेक इन इंडिया के तहत 90 जेट्स भारत में बनेंगे, दुनिया ने माना लोहा

भारतीय वायुसीमा में अब एक ऐसी गर्जना सुनाई देने वाली है, जो सरहद पार बैठे दुश्मनों की नींद उड़ा देगी। यह सिर्फ नए फाइटर जेट्स की खरीद नहीं है, बल्कि एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है जिसने वैश्विक रक्षा बाजार में भारत का कद कई गुना बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों को वायुसेना के बेड़े में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस डील का सबसे बड़ा गेम चेंजर पहलू यह है कि इन 114 विमानों में से 90 राफेल सीधे तौर पर भारत में ही बनाए जाएंगे, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

वायुसेना की इस महा-डील के लिए ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ का ड्राफ्ट अंतिम रूप ले चुका है और जल्द ही इसे फ्रांस सरकार को भेजा जाएगा। रक्षा तैयारियों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह अगले महीने फ्रांस के महत्वपूर्ण दौरे पर जा रहे हैं। इसके साथ ही, संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जून के अंत तक फ्रांस का दौरा करें। जब देश का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व एक साथ इतने बड़े मिशन पर काम कर रहा हो, तो स्पष्ट है कि भारत अपनी रक्षा शक्ति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राफेल का शक्तिशाली इकोसिस्टम

अगर आंकड़ों को देखें, तो भारत आने वाले समय में राफेल का एक अभेद्य किला तैयार कर रहा है। वर्तमान में वायुसेना के पास 36 राफेल मौजूद हैं, जो अंबाला और हाशिमारा बेस से निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय नौसेना भी अपने विमानवाहक पोतों के लिए 26 राफेल-एम (समुद्री संस्करण) खरीदने की प्रक्रिया में है। अब 114 नए विमानों के शामिल होने के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल विमानों का बेड़ा होगा। इसके साथ ही भारत, फ्रांस के बाद दुनिया का सबसे बड़ा राफेल ऑपरेटर बन जाएगा, जो हमारी हवाई संप्रभुता का स्पष्ट प्रमाण है।

मेक इन इंडिया: रक्षा क्षेत्र में नई क्रांति

इस सौदे की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वदेशीकरण है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 114 में से करीब 90 विमानों का निर्माण शत-प्रतिशत भारत की धरती पर होगा। यह कार्य फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय साझेदार के संयुक्त उपक्रम के तहत किया जाएगा। शेष विमान सीधे फ्रांस से ‘रेडी टू फ्लाई’ मोड में आएंगे ताकि वायुसेना की तात्कालिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। 90 लड़ाकू विमानों का भारत में बनना न केवल हमारी विनिर्माण क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय एयरोस्पेस क्षेत्र को उच्च स्तरीय तकनीक का एक्सेस भी दिलाएगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में निर्माण होने से राफेल की परिचालन लागत में भारी कमी आएगी। जब कलपुर्जे और असेंबली लाइन देश में ही होगी, तो लॉजिस्टिक्स और विदेशी करों का बोझ कम हो जाएगा। इससे न केवल रखरखाव आसान होगा, बल्कि पायलट ट्रेनिंग और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। डसॉल्ट एविएशन के लिए भी भारत एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा, जहाँ से भविष्य में अन्य देशों को भी सप्लाई चेन में मदद मिल सकती है।

राफेल की तकनीकी श्रेष्ठता: आसमान का बेताज बादशाह

राफेल आखिर इतना घातक क्यों है? इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी रफ़्तार और पेलोड क्षमता है। 2222 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड के साथ यह विमान दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं देता। यह अपने साथ 24,500 किलोग्राम तक का वजन लेकर उड़ सकता है, जिसका अर्थ है कि यह भारी मिसाइलों और हथियारों के साथ भी बेहद फुर्तीला रहता है। यह एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक हमला करने में सक्षम है।

राफेल की वर्टिकल क्लाइंब रेट इसे डॉगफाइट के दौरान अजेय बनाती है; यह महज एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसमें मिड-एयर रिफ्यूलिंग की सुविधा है, जिससे यह हजारों किलोमीटर दूर तक बिना रुके अपने मिशन को अंजाम दे सकता है। इसका 3700 किलोमीटर का कॉम्बैट रेडियस भारत को हिंद महासागर से लेकर हिमालय की चोटियों तक रणनीतिक बढ़त प्रदान करता है।

आरबीई-2 रडार: दुश्मन के लिए काल

राफेल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका ‘RBE2 AESA’ रडार सिस्टम है। यह रडार एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह इतना एडवांस है कि दुश्मन के रडार सिग्नल्स को जैम कर सकता है और पायलट को 360-डिग्री सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करता है। इसके इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट की वजह से राफेल को ट्रैक करना किसी भी रडार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

अंततः, 114 राफेल की यह डील ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की जीत है। यह सौदा न केवल वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि भारत को दुनिया के रक्षा मानचित्र पर एक शक्तिशाली निर्माता के रूप में स्थापित करेगा। जब ये स्वदेशी निर्मित राफेल भारतीय आसमान में उड़ान भरेंगे, तो वह नए और सशक्त भारत की गूंज होगी जिसे पूरी दुनिया सलाम करेगी।

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