दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री मार्ग पर एक ऐसी हलचल हुई है, जिसने वैश्विक व्यापार और महाशक्तियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कल्पना कीजिए, समंदर का एक ऐसा हिस्सा जो विश्व अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और महीनों से वहां सन्नाटा पसरा था, वहां अचानक जहाजों का मेला लग गया है। हम बात कर रहे हैं ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) की। यह वही रास्ता है जहाँ से दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। पिछले कुछ समय से यहाँ युद्ध के साये और खौफ का माहौल था, लेकिन अब यह रूट फिर से गुलजार है। सवाल यह उठता है कि क्या ईरान ने अमेरिका के आगे घुटने टेक दिए हैं या यह तेहरान की कोई नई कूटनीतिक चाल है? आइए, इस भू-राजनीतिक खेल की गहराई को समझते हैं।
ग्लोबल ट्रेड का पावर हाउस है ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’
सबसे पहले इसकी अहमियत को समझना जरूरी है। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे संकरे समुद्री रास्तों में से एक होने के बावजूद इतना महत्वपूर्ण है कि इसकी बंदी मात्र से वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं। दुनिया के कुल तेल व्यापार और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की बड़ी खेप इसी रास्ते से जाती है। मध्य पूर्व में जब भी तनाव बढ़ता है, इसका सीधा असर इसी रूट पर दिखता है। इसके एक ओर ईरान है तो दूसरी ओर ओमान और यूएई, लेकिन इस क्षेत्र पर सबसे अधिक प्रभाव ईरान का ही माना जाता है।
हाल ही में इस रूट पर हलचल काफी तेज हो गई है। सोशल मीडिया और मरीन ट्रैफिक डेटा के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य अब जहाजों की आवाजाही से भरा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मारियो नौफल के अनुसार, कई बड़े कमर्शियल जहाज और भारी-भरकम तेल टैंकर अब ईरान द्वारा नियंत्रित ट्रैफिक लेन का इस्तेमाल बिना किसी बाधा के कर रहे हैं।
IRGC का बड़ा फैसला: 26 जहाजों को मिली हरी झंडी
यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की नेवी ने इसकी पुष्टि की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर IRGC ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 26 वाणिज्यिक जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान ने साफ कर दिया कि यह मूवमेंट IRGC नेवी के समन्वय और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही संभव हो पाया है। यह स्पष्ट संकेत है कि ईरान दुनिया को जताना चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का असली नियंत्रण उसी के हाथों में है।
इस स्थिति को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। 28 फरवरी के बाद से, जब ईरान का अमेरिका और इजरायल के साथ सीधा टकराव शुरू हुआ था, तब से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित थी। अमेरिका ने अपनी नौसेना तैनात कर दी थी और एक तरह की घेराबंदी वाली स्थिति बन गई थी। उस दौरान ईरान ने भी पलटवार करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त पाबंदियां लगा दी थीं और स्पष्ट कर दिया था कि यहाँ उसकी मर्जी के बिना कुछ नहीं होगा।
अप्रैल में जब संघर्ष विराम (सीजफायर) की खबरें आईं, तब भी ईरान ने अपनी सख्ती कम नहीं की थी। तेहरान का स्टैंड हमेशा से यही रहा है कि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी अधिकारियों से अनिवार्य क्लियरेंस लेनी होगी।
दक्षिण कोरियाई जहाज की सफल एंट्री और ग्लोबल मार्केट को राहत
इस नए घटनाक्रम से कई देशों ने राहत ली है। दक्षिण कोरिया ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसका एक बड़ा तेल टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर गया है। फरवरी में तनाव शुरू होने के बाद किसी दक्षिण कोरियाई जहाज की यह पहली सफल आवाजाही है। यह केवल एक जहाज की बात नहीं है, बल्कि भारत, चीन और जापान जैसे देशों के लिए भी बड़ी खबर है जिनकी ऊर्जा सुरक्षा इसी रास्ते पर टिकी है। इस रूट का फिर से खुलना अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने में मदद करेगा।
ईरान का मास्टरस्ट्रोक: ‘Persian Gulf Strait Authority’ का गठन
लेकिन ईरान ने यह रास्ता बिना किसी शर्त के नहीं खोला है। इसके पीछे एक गहरी रणनीति छिपी है। ईरान ने अब एक नए प्रशासनिक ढांचे ‘फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ (Persian Gulf Strait Authority) बनाने की घोषणा की है।
यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण है। इस नई अथॉरिटी का मुख्य कार्य इस पूरे क्षेत्र में समुद्री यातायात की कड़ी निगरानी और नियंत्रण करना होगा। इस कदम से ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य कोई लावारिस क्षेत्र नहीं है और यहाँ से गुजरने वाले हर जहाज को ईरान के नियमों का पालन करना होगा। यह सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
वैश्विक राजनीति और समंदर का नया समीकरण
यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भौगोलिक लाभ (Geographical Advantage) कितना मायने रखता है। अमेरिका ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, लेकिन ईरान ने अपने भौगोलिक स्थान का उपयोग करके व्यापार की चाबी अपने पास रखी है। दुनिया को ऊर्जा की जरूरत है और ईरान जानता है कि कोई भी देश इस रास्ते को लंबे समय तक बंद नहीं रख सकता। इसलिए, ईरान ने रास्ता तो खोला, लेकिन अपनी शर्तों पर और नई अथॉरिटी के साथ।
अब देखना यह है कि अमेरिका और ब्रिटेन ईरान की इस नई ‘Persian Gulf Strait Authority’ को मान्यता देते हैं या नहीं। क्या समंदर की इन लहरों पर फिर से कोई नया संघर्ष देखने को मिलेगा? फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की रौनक लौट आई है, लेकिन पानी के नीचे भू-राजनीति की जो हलचल है, वह भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से प्रभावित कर सकती है।

