भारत का बढ़ा मान: विदेशी कंपनियों की एंट्री ने तोड़ा 9 साल का रिकॉर्ड, सिंगापुर और अमेरिका भी हुए भारत के मुरीद!

भारतीय अर्थव्यवस्था ने 9 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है! जी हाँ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नया भारत’ वैश्विक स्तर पर अपनी जो धाक जमा रहा है, उसकी पुष्टि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के नए आंकड़े कर रहे हैं। आज दुनिया की बड़ी आर्थिक शक्तियां और मल्टीनेशनल कंपनियां भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए बेताब हैं। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि उस अटूट भरोसे का प्रतीक है जो वैश्विक निवेशक भारत के सिस्टम और भविष्य पर दिखा रहे हैं। हालिया विश्लेषण से स्पष्ट है कि भारत अब केवल एक मार्केट नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे सुरक्षित और आकर्षक ‘बिजनेस हब’ बन चुका है।

ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बढ़ता भारत

इस ऐतिहासिक सफलता को आंकड़ों के जरिए समझिये। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय बाजार में विदेशी कंपनियों के आने की रफ़्तार ने पिछले नौ वर्षों के कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) का डेटा यह स्पष्ट करता है कि भारत में सक्रिय विदेशी कंपनियों की संख्या में आया उछाल अभूतपूर्व है।

पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में जहाँ केवल 57 विदेशी कंपनियों ने भारत में अपना पंजीकरण कराया था, वहीं इस साल यह संख्या बढ़कर 101 तक पहुँच गई है! यह पिछले नौ वर्षों का उच्चतम स्तर है। इससे पहले 2016-17 में यह संख्या 103 दर्ज की गई थी, और उसके बाद यह पहली बार है जब आंकड़ा 100 के पार गया है। यह मोदी सरकार द्वारा ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में किए गए सुधारों का सीधा परिणाम है।

वैश्विक दिग्गजों के बीच भारत की बढ़ती मांग

भारत में निवेश और पंजीकरण के मामले में कौन से देश सबसे आगे हैं? इस लिस्ट में सिंगापुर सबसे बड़े भागीदार के रूप में उभरा है, जिसने 13 नए पंजीकरण किए हैं। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या केवल सात थी, यानी एक ही साल में निवेशकों का भरोसा दोगुना हो गया।

सिंगापुर के बाद अमेरिका ने 10 पंजीकरणों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया है (FY25 में छह था)। इसके बाद ब्रिटेन का नंबर आता है, जिसने नौ पंजीकरणों के साथ अपनी पकड़ मजबूत की है।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बढ़त जर्मनी और दक्षिण कोरिया से मिली है। जर्मनी ने पिछले साल के मात्र एक पंजीकरण के मुकाबले इस साल आठ पंजीकरण किए हैं, जो कि 800% की भारी उछाल है। दक्षिण कोरिया के पंजीकरण भी चार से बढ़कर आठ हो गए हैं। वहीं जापान सात पंजीकरणों के साथ टॉप पार्टनर्स की सूची में बरकरार है।

जर्मनी, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन और जापान—इन छह आर्थिक शक्तियों ने मिलकर इस साल के कुल विदेशी कंपनी पंजीकरणों में 50% से अधिक का योगदान दिया है।

रणनीतिक नीतियों का कमाल: नए देशों की एंट्री

यह केवल पुराने निवेशकों की वापसी नहीं है, बल्कि मोदी सरकार की नीतियों ने भारत के लिए नए क्षेत्रों के द्वार भी खोले हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 इसलिए भी विशेष है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका, घाना और उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने पहली बार भारत में अपनी कंपनियों को पंजीकृत कराया है। यह संकेत है कि भारत अब अफ्रीका और मध्य एशिया के लिए एक बड़ा अवसर बन गया है। भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के नियमों की पारदर्शिता ने इन देशों के भरोसे को और बढ़ाया है।

यह निवेश केवल कागजों तक सीमित नहीं है। एफडीआई (FDI) के आंकड़े बताते हैं कि सिंगापुर, अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने दिसंबर तक कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 62.4% का भारी योगदान दिया है, जिससे देश में बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

चीन का घटता प्रभाव और भारत की बढ़त

चीनी निवेश के मामले में भारत सरकार की सतर्कता के परिणाम अब दिखने लगे हैं। चीन इस सूची में आठवें स्थान पर है, जहाँ से केवल तीन पंजीकरण हुए हैं। बीते तीन सालों में यह संख्या शून्य थी, जो दर्शाता है कि सीमा विवाद और सुरक्षा कारणों से चीनी निवेश की सख्त जांच की जा रही है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में चीनी कंपनियों के पंजीकरण में भारी गिरावट आई है। दुनिया भर की कंपनियां अब ‘चीन+1’ की रणनीति के तहत भारत को अपने प्राथमिक विकल्प के रूप में देख रही हैं। भारत का बढ़ता दबदबा अब चीन की बाजार हिस्सेदारी को चुनौती दे रहा है।

सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में भारत की धमक

कुल पंजीकरणों में सेवाओं (Service Sector) की हिस्सेदारी लगभग 90% रही है, जिसमें रियल एस्टेट, बीमा, व्यापार और परिवहन जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। यह साबित करता है कि भारत सेवा क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।

वहीं ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के चलते विनिर्माण (Manufacturing) और ऊर्जा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की हिस्सेदारी 10% दर्ज की गई है। विदेशी कंपनियां अब भारत में अपनी उत्पादन इकाइयां और फैक्ट्रियां लगाने में गहरी रुचि दिखा रही हैं।

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