वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा और तेल आपूर्ति के सबसे संवेदनशील मार्ग यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दी है। जब दुनिया की नजरें कहीं और थीं, तब फारस की खाड़ी के ऊपर एक रहस्यमयी सैन्य हलचल चल रही थी। रडार को चकमा देने की क्षमता रखने वाला एक अत्याधुनिक ‘स्टील्थ’ ड्रोन चुपके से ईरानी हवाई सीमा की ओर बढ़ रहा था। इसका असली मकसद जासूसी था या हमला, यह अभी सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई ने वाशिंगटन और तेल अवीव के सुरक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास एक दुश्मन ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया है। यह घटना सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि मध्य पूर्व के सुलगते हालात में एक नई चिंगारी है। अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता के दावों के बीच इस मुठभेड़ ने साबित कर दिया है कि समंदर और आसमान में अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है।
अराश-ए-कमंगीर: स्वदेशी तकनीक जिसने ‘अजेय’ ड्रोन को किया ढेर
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यह है कि ईरान ने इसके लिए किसी विदेशी हथियार का उपयोग नहीं किया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस कार्रवाई को उनके स्वदेशी इंटरसेप्टर ड्रोन सिस्टम ‘अराश-ए-कमंगीर’ (Arash-e-Kamangir) ने अंजाम दिया है। फारसी पौराणिक कथाओं के मशहूर तीरंदाज ‘अराश’ के नाम पर बनाई गई यह रक्षा प्रणाली ईरान के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है। फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, यह एक नई इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम है जो अपनी गुप्त मारक क्षमताओं के लिए जानी जाती है। जरा सोचिए, जिस ड्रोन के बारे में दावा किया गया था कि उसे कोई रडार देख नहीं सकता, उसे ईरान के स्वदेशी सिस्टम ने न केवल ट्रैक किया बल्कि बीच आसमान में तबाह भी कर दिया। यह ईरान की सैन्य आत्मनिर्भरता का एक ऐसा उदाहरण है जिसे अब कोई भी महाशक्ति नजरअंदाज नहीं कर सकती।
केश्म द्वीप के पास वो खौफनाक रात
यह घटना केश्म द्वीप (Qeshm Island) के पास घटित हुई। मेहर समाचार एजेंसी ने स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि सोमवार रात आसमान में तेज रोशनी और धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ये आवाजें ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम के सक्रिय होने की थीं। जैसे ही दुश्मन ड्रोन ने ईरानी सीमा की ओर कदम बढ़ाया, वॉर रूम में खतरे का संकेत मिलते ही ‘अराश-ए-कमंगीर’ को लॉन्च कर दिया गया। यह एक किलर ड्रोन है जिसे खास तौर पर हवाई घुसपैठ को नाकाम करने के लिए विकसित किया गया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि ड्रोन को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र के बजाय ईरान की क्षेत्रीय सीमा के ऊपर रोका गया था। हालांकि, सुरक्षा कारणों से ईरान ने अभी तक ड्रोन के स्रोत या उसके मालिक देश का नाम उजागर नहीं किया है।
ईरानी सेना की चुप्पी और सख्त चेतावनी
कार्रवाई के बाद ईरानी सेना ने सधी हुई चुप्पी अपना रखी है। कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति तो जारी नहीं हुई, लेकिन फार्स एजेंसी के माध्यम से अनाम अधिकारियों ने दुनिया को कड़ी चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा, “यह हमारी चेतावनी है; कोई भी अदृश्य होने वाला ड्रोन अब फारस की खाड़ी की संप्रभुता का उल्लंघन नहीं कर पाएगा।” यह ईरान की रक्षा तैयारियों और अपने हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण का एक कड़ा संदेश है। रक्षा प्रणाली के विवरण को गोपनीय रखना ईरान की उसी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह दुश्मन को हमेशा अनिश्चितता में रखना चाहता है।
शांति वार्ता के बीच आखिर इस टकराव के मायने क्या हैं?
हैरानी की बात यह है कि यह टकराव उस वक्त हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की सुगबुगाहट तेज है। एक तरफ मेज पर बातचीत और दूसरी तरफ ड्रोन की घुसपैठ, यह विरोधाभास दर्शाता है कि पर्दे के पीछे का खेल बेहद जटिल है। क्या यह ड्रोन अमेरिका का था जो शांति वार्ता के बीच ईरान की जमीनी हकीकत जानना चाहता था? या फिर यह किसी अन्य क्षेत्रीय शक्ति की साजिश थी जो समझौते को विफल करना चाहती है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे, लेकिन इस ड्रोन कांड ने मध्य पूर्व की जियोपॉलिटिक्स में नया उबाल ला दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, जिससे इसकी महत्ता बढ़ जाती है। ईरान ने ड्रोन को गिराकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है, लेकिन अब दुनिया यह देख रही है कि ‘दुश्मन’ पक्ष इस पर क्या पलटवार करेगा। ‘अराश-ए-कमंगीर’ ने यह तो साबित कर दिया है कि फारस की खाड़ी का आसमान अब किसी भी घुसपैठिए के लिए आसान नहीं रहने वाला।

