भारत का तुर्की में महा-ऑपरेशन: दाऊद इब्राहिम के गुर्गे और नार्को-किंगपिन का होगा प्रत्यर्पण, पाकिस्तान हैरान!

भारत के दुश्मनों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है! चाहे तुम गुफाओं में छिप जाओ या किसी दूसरे देश में अपनी पहचान बदल लो, अब भारत की पैनी नज़र से बचना नामुमकिन है। यह नया भारत है, जो न केवल दुश्मन के घर में घुसकर मारना जानता है, बल्कि सात समंदर पार बैठे अपराधियों को भी कानून के शिकंजे में कसकर वापस लाना जानता है। नार्को-टेरर के दम पर भारत की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाले सिंडिकेट का अब अंत निश्चित है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय और मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने ड्रग माफियाओं के साम्राज्य को खत्म करने के लिए एक प्रचंड अभियान शुरू किया है। पिछले महीने ही कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला को विदेश से वापस लाकर कड़ा संदेश दिया गया था। अब तुर्की से दो और बड़े ‘नार्को-किंगपिन’ को वापस लाने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है। ये दोनों भारत विरोधी ताकतों के मोहरे हैं, जिन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी और हिंसा के जरिए देश को अस्थिर करने की साज़िश रची। आज की इस विशेष रिपोर्ट में, हम आपको इन दोनों भगोड़ों के काले इतिहास, तुर्की के साथ चल रहे कूटनीतिक ‘महा-ऑपरेशन’ और भारत के वैश्विक अभियान की पूरी कहानी बताएंगे।

तुर्की का भारत को सहयोग, पाकिस्तान और चीन हुए हैरान!

सबसे पहले बात उस कूटनीतिक सहयोग की, जिसने इस्लामाबाद से बीजिंग तक खलबली मचा दी है। तुर्की, जिसके साथ भारत के संबंध अक्सर उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं, अब अंतरराष्ट्रीय अपराध और नार्को-तस्करी को कुचलने के लिए भारत के साथ खड़ा है।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बावजूद तुर्की कानून प्रवर्तन के मामले में भारत का साथ दे रहा है। यह सहयोग 2001 में हस्ताक्षरित और 2002 से प्रभावी ‘प्रत्यर्पण संधि’ के कारण संभव हुआ है। इस संधि ने दोनों देशों के बीच आतंकवाद और गंभीर अपराधों के भगोड़ों को वापस भेजने का एक मज़बूत कानूनी आधार तैयार किया है।

यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है कि सुरक्षा एजेंसियां और इंटरपोल, तुर्की की एजेंसियों के साथ रियल-टाइम समन्वय कर रहे हैं। सलीम डोला के मामले में भी खुफिया जानकारी और इंटरपोल के ‘रेड नोटिस’ ने उसे तुर्की की नागरिकता के बावजूद गिरफ्तार करवाने में बड़ी भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि डोला फर्जी पासपोर्ट पर भागने की फिराक में था, लेकिन भारत की मुस्तैदी ने उसे पकड़ लिया। अब यही शिकंजा नवप्रीत और सरताज पर कसने जा रहा है।

नार्को-किंगपिन नवप्रीत सिंह कौन है?

भगोड़ों की इस सूची में पहला बड़ा नाम नवप्रीत सिंह का है, जो मूल रूप से पंजाब का रहने वाला है। वह कोई छोटा अपराधी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का एक मुख्य ‘किंगपिन’ है, जिसके तार कई देशों से जुड़े हुए हैं। एजेंसियां उसे नशीले पदार्थों के बल्क सप्लायर के रूप में देखती हैं।

नवप्रीत ड्रग तस्करी के कई गंभीर मामलों में वांछित है। उसकी गिरफ़्तारी भारत के लिए इतनी महत्वपूर्ण है कि पिछले साल से ही उसके प्रत्यर्पण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इस साज़िश की गहराई का पता तब चला जब अजरबैजान से प्रभदीप सिंह का प्रत्यर्पण हुआ। प्रभदीप, जो 358 किलो हेरोइन मामले में जुड़ा था, तुर्की में बैठे नवप्रीत सिंह के लिए ही काम कर रहा था।

स्पष्ट है कि नवप्रीत तुर्की की धरती का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ ‘नार्को-युद्ध’ के लिए कर रहा था। गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर अब ड्रग गिरोहों के ख़िलाफ़ वैश्विक स्तर पर कार्रवाई तेज़ कर दी गई है। भारत अब न केवल कानूनों को कड़ा कर रहा है, बल्कि प्रत्यर्पण के ढांचे को भी मज़बूत बना रहा है। नवप्रीत की वापसी नार्को-टेरर नेटवर्क की कमर तोड़ देगी।

मोहम्मद सरताज और दाऊद इब्राहिम का ‘डी-कनेक्शन’

दूसरा खूंखार भगोड़ा मोहम्मद सरताज है, जिसका नाम आते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो जाती हैं। मध्य प्रदेश का रहने वाला सरताज ड्रग्स तस्करी के अलावा अन्य गंभीर अपराधों में भी वांछित है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसके संबंध दाऊद इब्राहिम के गुर्गे सलीम डोला से बताए जा रहे हैं।

सलीम डोला की वापसी के बाद सुरक्षा एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। एजेंसियों को संदेह है कि सरताज दाऊद की ‘डी-कंपनी’ के उस नेटवर्क का हिस्सा है, जो विदेशों से भारत के खिलाफ आतंकवाद को फंड करता है। सरताज पर धमकी और हिंसा के आरोप उसके खतरनाक इरादों को पुख्ता करते हैं।

दाऊद इब्राहिम का सिंडिकेट लंबे समय से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा रहा है। मोहम्मद सरताज का प्रत्यर्पण केवल एक अपराधी की पकड़ नहीं, बल्कि दाऊद के साम्राज्य की जड़ों पर प्रहार है। सलीम डोला की गिरफ़्तारी और अब सरताज पर कसता शिकंजा यह साबित करता है कि दाऊद के गुर्गों के लिए अब दुनिया का कोई कोना सुरक्षित नहीं है।

नार्को-टेरर का किला होगा ध्वस्त!

भारत सरकार का यह महा-अभियान एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। सलीम डोला, प्रभदीप सिंह, नवप्रीत और सरताज – ये सभी एक ही साज़िश के मोहरे हैं। भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी को ‘नार्को-आतंकवाद’ के रूप में पेश कर दुनिया भर के देशों को एकजुट कर रहा है।

अमित शाह की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का संदेश साफ है – अब कोई समझौता नहीं होगा। भारत ने कूटनीति के माध्यम से उन जगहों तक अपनी पहुँच बना ली है जहाँ अपराधी सुरक्षित महसूस करते थे। तुर्की का सहयोग इस दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है।

इंटरपोल और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के पराक्रम से जल्द ही नवप्रीत और सरताज को भारत लाकर सजा दी जाएगी। यह भारत विरोधी ताकतों को कड़ा संदेश है कि साज़िश रचने वालों को अब न चैन मिलेगा और न ठिकाना। भारत अपनी युवा पीढ़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। नार्को-टेरर का साम्राज्य अब ढह रहा है।

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