झूठे दुष्प्रचार और नफरत की राजनीति करने वाले पाकिस्तान की हेकड़ी एक बार फिर धरी की धरी रह गई। सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर दुनिया भर में भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले पड़ोसी देश को अगर हिंदुस्तान ने समय रहते नहीं संभाला होता, तो आज पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो चुका होता। यह भारत की महानता और सनातन संस्कारों का ही परिणाम है कि गद्दार पड़ोसी की हरकतों के बावजूद, भारत ने मानवता का धर्म निभाते हुए पाकिस्तान को एक बड़ी आपदा से बाहर निकाला है।
पाकिस्तान में बाढ़ का खतरा सिर पर था और चिनाब नदी पूरे उफान पर थी, लेकिन पाकिस्तान इस खतरे से पूरी तरह बेखबर था। जैसे ही जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित सलाल डैम के स्पिलवे गेट मानसून-पूर्व गाद निकालने के लिए खोले गए, भारतीय अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए पाकिस्तान को चेतावनी भेज दी। इस एक अलर्ट ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हड़कंप मचा दिया। अगर यह सूचना समय पर नहीं मिलती, तो वहां की रेस्क्यू टीमों को तैयारी का मौका नहीं मिलता और सियालकोट समेत कई इलाके तबाह हो जाते।
दुष्प्रचार करने वाले पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब
यह वही पाकिस्तान है जो पिछले साल सिंधु जल संधि पर चर्चाओं के रुकने के बाद बौखलाया हुआ था। अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय पाकिस्तान दुनिया भर में यह झूठ फैला रहा था कि भारत पानी को एक ‘हथियार’ के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। उसके नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि धूमिल करने की हर मुमकिन कोशिश की।
लेकिन जब संकट की घड़ी आई, तो हिंदुस्तान ने साबित कर दिया कि असली ‘बड़ा भाई’ कौन है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने चिनाब नदी में संभावित बाढ़ को लेकर पाकिस्तान को बहुत पहले ही सचेत कर दिया था। सलाल डैम के गेट खोलने के बाद भारत ने चेतावनी दी थी कि 30 मई तक चिनाब में पानी का बहाव बेहद तेज रहेगा। यह भारत का उत्तरदायित्व है, जिसे हम हर परिस्थिति में निभाते हैं।
सियालकोट में हड़कंप और भारतीय अलर्ट का असर
जैसे ही भारत का अलर्ट संदेश इस्लामाबाद और लाहौर पहुंचा, पाकिस्तान की आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के हाथ-पांव फूल गए। भारत ने स्पष्ट किया था कि सलाल डैम से पानी छोड़ने के कारण चिनाब का जलस्तर दो से तीन मीटर तक बढ़ सकता है, जिससे पूरा इलाका डूबने का खतरा था।
सूचना मिलते ही सियालकोट के डिप्टी कमिश्नर ने रेस्क्यू टीमों को तैनात किया। प्रशासन ने आनन-फानन में चेतावनी जारी करते हुए कहा कि भारत की ओर से गेट खोलने की वजह से स्थिति गंभीर हो सकती है। अधिकारियों को 24 घंटे नदी की निगरानी के निर्देश दिए गए और लोगों के नदी किनारे जाने पर रोक लगा दी गई। यह सब सिर्फ इसलिए संभव हुआ क्योंकि हिंदुस्तान ने अपना फर्ज निभाया।
सलाल डैम और सिंधु जल संधि का तकनीकी पक्ष
सलाल डैम 130 मीटर ऊंचा है और यह सिंधु जल संधि (IWT) के तहत बना भारत का पहला प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है। यह एक ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट है, यानी हम पानी जमा नहीं करते बल्कि बहाव से बिजली बनाते हैं। मानसून से पहले जलाशय में जमा गाद (silt) को निकालना एक अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया है, ताकि डैम को कोई नुकसान न हो।
इसी प्रक्रिया के तहत स्पिलवे गेट खोले गए थे। भारत ने इस पूरी तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी पहले ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कृषि विभाग के साथ साझा कर दी थी। यह भारत की पारदर्शिता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
हिंदुस्तान की महानता: इंसानियत के आगे दुश्मनी छोटी
भले ही कूटनीतिक मोर्चे पर तनातनी जारी हो, लेकिन जब बात निर्दोष नागरिकों की जान बचाने की आती है, तो भारत अपने उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करता है। यह संवाद उसी मानवीय दृष्टिकोण का हिस्सा है ताकि निचले इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित रह सकें।
यह भारत की नैतिक और कूटनीतिक जीत है। पाकिस्तान भले ही दुनिया से झूठ बोले, लेकिन असलियत यह है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए भी भारतीय डेटा पर निर्भर है। भारत ने हमेशा संधि के नियमों का सम्मान किया है, तब भी जब पाकिस्तान ने पीठ में छुरा घोंपने का प्रयास किया।
निष्कर्षतः, यह घटना साबित करती है कि हिंदुस्तान एक जिम्मेदार राष्ट्र है। हम पानी को हथियार नहीं बनाते, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता भी नहीं करते। पाकिस्तान को भारत की दरियादिली का सम्मान करते हुए भारत-विरोधी गतिविधियों को तुरंत रोकना चाहिए। देक्कनलाइन की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत ने चिनाब में मानवता की सर्वोच्चता साबित की है।

