सिंधु जल संधि पर भारत का कड़ा रुख: पाकिस्तान में मचा हाहाकार, कराची का 70% हिस्सा पानी के लिए बेहाल

भारत द्वारा सिंधु नदी प्रणाली पर अपने नियंत्रण को मजबूत करने के बाद पाकिस्तान की जल व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। पाकिस्तान का आर्थिक हब कराची आज पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है। हालात इतने खराब हैं कि शहर का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सूखे की चपेट में है। भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपने अधिकारों का कड़ाई से पालन करते हुए पानी के बहाव को मोड़ना शुरू किया है, जिससे शाहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जो पानी कभी सीमा पार मुफ्त बहता था, अब भारत अपनी कूटनीतिक और इंजीनियरिंग शक्ति से उसे संचित कर रहा है। परिणामस्वरूप, कराची एक रेगिस्तान में तब्दील होने की ओर अग्रसर है।

पाकिस्तान में मचे इस कोहराम का केंद्र कराची बना हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था का इंजन है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद और उत्तरी कराची जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में पिछले दो सप्ताह से नलों में पानी नहीं आया है। आलम यह है कि ईद जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर भी लोग जश्न मनाने के बजाय खाली बाल्टियाँ लेकर टैंकरों के पीछे भागते नजर आए। प्रशासन इस संकट के सामने पूरी तरह लाचार दिखाई दे रहा है।

कराची में इस जल संकट के पीछे भारत की सख्ती और पाकिस्तान का आंतरिक कुप्रबंधन मुख्य कारण है। भारत ने रावी, व्यास और सतलज जैसी पूर्वी नदियों के अपने हिस्से का पूर्ण उपयोग करने के लिए परियोजनाओं में तेजी ला दी है। साथ ही पश्चिमी नदियों पर भी ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान का असली संकट पिछले 75 वर्षों में जल संचयन के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण न करना और भारत विरोधी एजेंडे पर अधिक ध्यान केंद्रित करना है।

पानी की भारी किल्लत ने कराची में ‘वॉटर टैंकर माफिया’ को मजबूत कर दिया है। सरकारी सप्लाई ठप होने के कारण लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा निजी टैंकरों से पानी खरीदने में खर्च कर रहे हैं। पानी अब वहाँ एक बुनियादी जरूरत के बजाय ब्लैक मार्केट की सबसे महंगी वस्तु बन गया है। इस स्थिति ने पाकिस्तान की घरेलू राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है।

सिंध प्रांत में लंबे समय से सत्तासीन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) कराची के लिए एक प्रभावी जल वितरण नेटवर्क तैयार करने में विफल रही है। अब जब पानी का संकट गहराया है, तो विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी ने सरकार के भ्रष्टाचार और अक्षमता पर कड़ा प्रहार किया है। पार्टी प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सीधे तौर पर प्रशासन को इस बर्बादी का जिम्मेदार ठहराया है।

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत द्वारा नदी प्रवाह रोकने का आरोप लगा रहा है, लेकिन भारत संधि के नियमों के तहत ही काम कर रहा है। पाकिस्तान को अब तक भारत के हिस्से का अतिरिक्त पानी मुफ्त में उपयोग करने की आदत थी। अब जब भारत ने बांध बनाकर अपने हिस्से की एक-एक बूंद को रोकना शुरू किया है, तो पाकिस्तान को भविष्य में कृषि और पेयजल संकट का डर सता रहा है।

इस संकट का सीधा असर पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कराची में स्थित कपड़ा और विनिर्माण उद्योगों को पानी न मिलने के कारण उत्पादन आधा करना पड़ा है। इससे निर्यात में गिरावट आएगी और बेरोजगारी बढ़ेगी। आर्थिक रूप से बदहाल पाकिस्तान के लिए यह जल संकट उसकी रीढ़ तोड़ने जैसा साबित हो रहा है।

पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि यह जल संकट जल्द ही राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन जाएगा। पंजाब और सिंध के कृषि क्षेत्र, जो देश का पेट भरते हैं, अब सूखने लगे हैं। फसलें बर्बाद होने से महंगाई और भुखमरी का खतरा मंडराने लगा है, जो पहले से ही बेकाबू हो चुकी है।

बिजली उत्पादन में भी भारी गिरावट आई है क्योंकि पाकिस्तान के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स नदियों के गिरते जल स्तर के कारण टरबाइन नहीं चला पा रहे हैं। शहरों में 12 से 14 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, जिससे गर्मी के मौसम में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

शाहबाज शरीफ सरकार के पास इस स्थिति से निपटने के लिए न तो धन है और न ही कोई वैकल्पिक योजना। भारत के इस कड़े फैसले ने पाकिस्तान की उस कमजोरी को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है जिसे वह दशकों से छिपाता आ रहा था। पाकिस्तान अब यह महसूस कर रहा है कि जल सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है।

भविष्य और भी भयावह दिख रहा है। कराची के बाद लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद जैसे बड़े शहर भी गिरते भूजल स्तर और सूखती नहरों के कारण संकट की चपेट में आ रहे हैं। पूरा देश धीरे-धीरे एक गंभीर सूखे के जाल में फंसता जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान को कोई सहानुभूति नहीं मिल रही है। वर्ल्ड बैंक ने स्पष्ट किया है कि भारत की कार्रवाई तकनीकी और कानूनी रूप से सही है। पाकिस्तान ने अपना बजट हमेशा अन्य क्षेत्रों में खर्च किया, लेकिन जल सुरक्षा को हमेशा नजरअंदाज किया, जिसका परिणाम आज वह भुगत रहा है।

कराची की सड़कों पर उमड़ा जन आक्रोश व्यवस्था के खिलाफ है। लोग अब प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सरकार के पास कोई समाधान नहीं है। यह सामाजिक अस्थिरता आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए एक आंतरिक विस्फोट का कारण बन सकती है।

भारत की यह कूटनीतिक जीत स्पष्ट है—बिना किसी सैन्य कार्रवाई के केवल जल प्रबंधन के माध्यम से भारत ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। कराची का जल संकट केवल एक शुरुआत है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो पाकिस्तान को जल्द ही जल आपातकाल घोषित करना पड़ सकता है। अब सवाल यह नहीं है कि पाकिस्तान भारत से कैसे मुकाबला करेगा, बल्कि यह है कि वह अपनी प्यासी जनता की प्यास कैसे बुझाएगा?

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