पाकिस्तान के भूगोल में एक ऐतिहासिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है और दुनिया जल्द ही एक नए राष्ट्र के उदय की गवाह बन सकती है। इतिहास एक बार फिर खुद को दोहराने की राह पर है। जो स्थिति 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की थी, आज वही हालात पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में बन गए हैं। इस्लामाबाद के हुक्मरानों की रातों की नींद उड़ चुकी है और पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से अपनी पूर्ण आजादी का खुला ऐलान कर दिया है। 11 अगस्त को बलूचिस्तान ने अपना आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस घोषित किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री मोदी 1971 वाला इतिहास दोहराते हुए इस नए मुल्क को मान्यता देंगे? यह सिर्फ एक विद्रोह नहीं, बल्कि उस दमनकारी शासन के अंत की शुरुआत है जिसने दशकों तक बलूच जनता का शोषण किया है।
बलूच आजादी के प्रमुख नेता मीर यार बलोच ने एक ऐतिहासिक और कड़ा संदेश जारी करते हुए जनता से अपील की है कि वे अब भय को त्याग कर बाहर आएं। उन्होंने आह्वान किया है कि बलूच नागरिक अपने घरों, बाजारों और शिक्षण संस्थानों में स्वतंत्र बलूचिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज फहराएं। यह पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बलूचिस्तान की युवा पीढ़ी को उनके वास्तविक इतिहास और स्वाभिमान से अवगत कराना है। ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ के आधिकारिक बयान में यह साफ कर दिया गया है कि अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है। 11 अगस्त उनके अस्तित्व और स्वतंत्रता का प्रतीक बन चुका है, जिसे हर वर्ष राष्ट्रीय एकता के साथ मनाया जाएगा।
11 अगस्त की तारीख का चुनाव एक गहरे ऐतिहासिक सत्य पर आधारित है, जिसे पाकिस्तान ने दशकों तक प्रोपेगेंडा के जरिए छिपाने की कोशिश की। सच तो यह है कि ब्रिटिश शासन की विदाई के समय, 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान (कलात राज्य) ने स्वयं को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र घोषित किया था। इस घटना को न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्रों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था और ऑल इंडिया रेडियो ने भी इसका प्रसारण किया था। लेकिन धोखेबाज पाकिस्तान ने मार्च 1948 में सैन्य बल का प्रयोग कर अवैध रूप से बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया। तब से बलूच जनता अपनी छीनी गई आजादी को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है। बलूच नेताओं ने अब दुनिया के सामने पाकिस्तान का वो आतंकी चेहरा उजागर कर दिया है जिसने कश्मीर से लेकर 1971 के बांग्लादेश तक सिर्फ जुल्म और अस्थिरता फैलाई है।
बलूचिस्तान के चगाई जिले की कहानी अत्यंत हृदयविदारक है। 1998 में पाकिस्तान ने अपने परमाणु परीक्षणों के लिए इसी धरती को चुना, जिसके रेडिएशन ने वहां की आबोहवा में जहर घोल दिया और आने वाली पीढ़ियों को बीमारियों का दंश दे दिया। पाकिस्तान और चीन मिलकर CPEC के नाम पर बलूचिस्तान के सोने, तांबे और गैस के भंडारों को बेरहमी से लूट रहे हैं। इसके बदले बलूच लोगों को केवल गरीबी और ‘लापता’ होने का खौफ मिल रहा है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का यह तर्क सटीक है कि जब तक पाकिस्तान का मौजूदा स्वरूप बना रहेगा, तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और विकास संभव नहीं है। इसीलिए बलूच संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को कूटनीतिक मान्यता प्रदान करें।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या भारत बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देगा? पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से बलूचिस्तान का उल्लेख कर पहले ही पाकिस्तान की दुखती रग पर हाथ रख दिया है। भारत जानता है कि बलूचिस्तान की आजादी पाकिस्तान की आतंकी फैक्ट्रियों की कमर तोड़ देगी। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बलूचिस्तान की स्वतंत्रता भारत के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकती है। इससे न केवल पाकिस्तान आर्थिक रूप से दिवालिया होगा, बल्कि चीन का ग्वादर पोर्ट और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का सपना भी हमेशा के लिए दफन हो जाएगा। भारत द्वारा बलूच नेताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच देना पाकिस्तान पर ऐसा दबाव बनाएगा जिससे वह कभी उबर नहीं पाएगा।
आज पाकिस्तानी फौज बलूचिस्तान में दमनचक्र चला रही है, लेकिन इतिहास गवाह है कि जब जनता अपनी आजादी के लिए उठ खड़ी होती है, तो कोई भी सेना उन्हें ज्यादा समय तक गुलाम नहीं रख सकती। बलूचिस्तान के लोगों का संकल्प अब अपने चरम पर है। 11 अगस्त का यह ऐलान उन हजारों शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए जान दी। भारत के लिए यह अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और रणनीतिक आक्रामकता दिखाने का सही समय है। दुनिया को अब यह संदेश जाना चाहिए कि मानवाधिकारों को कुचलने वाले और आतंकवाद को पालने वाले देशों का नक्शा बदलना अनिवार्य है। बलूचिस्तान की आजादी की यह गूंज अब दिल्ली से लेकर वाशिंगटन और संयुक्त राष्ट्र तक गूंजने वाली है।

