मेजर अभिलाषा बराक का UN में डंका: ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से दुनिया ने माना भारतीय सेना का लोहा

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जब मेजर अभिलाषा बराक का नाम गूंजा, तो पूरी दुनिया ने भारत की इस जांबाज बेटी के साहस को सलाम किया। यह पल केवल एक सम्मान नहीं था, बल्कि भारतीय सेना के उस बेमिसाल जज्बे का प्रमाण था जिसे आज वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। सैन्य दिग्गजों और कूटनीतिज्ञों की मौजूदगी में जब अभिलाषा को सम्मानित किया गया, तो हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा हो गया और दुनिया ने माना कि भारतीय सेना का अनुशासन अद्वितीय है।

मेजर अभिलाषा बराक को ‘2025 संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से नवाजा गया है। यह उपलब्धि विकसित होते भारत की उस शक्ति को दर्शाती है, जहां देश की बेटियां अब केवल सरहदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में भी अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। यह उस वैश्विक पहचान का सबूत है, जो आज ‘न्यू इंडिया’ पूरी दुनिया में हासिल कर रहा है।

उनकी इस गौरवपूर्ण यात्रा को समझने के लिए लेबनान के कठिन मिशन को देखना होगा। अशांत पश्चिम एशियाई देश लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत तैनात मेजर अभिलाषा ने वहां फीमेल एंगेजमेंट टीम की कमान संभाली। एक कमांडर के तौर पर उनका मिशन केवल सैन्य गश्त तक सीमित नहीं था, बल्कि वहां के स्थानीय नागरिकों के बीच विश्वास की बहाली करना और शांति की उम्मीद जगाना था।

सांस्कृतिक और ढांचागत चुनौतियों के बीच लेबनान की स्थानीय महिलाओं का भरोसा जीतना एक दुर्गम कार्य था। संघर्ष की मार झेल रहे नागरिकों के बीच जाकर मेजर अभिलाषा ने अपनी लीडरशिप और भारतीय मूल्यों से उन बाधाओं को दूर किया जो अक्सर शांति मिशनों के आड़े आती हैं। उन्होंने सीधे संवाद के जरिए वहां की महिलाओं और किशोरियों की समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके समाधान के लिए काम किया।

एक सैन्य अधिकारी की भूमिका के साथ-साथ अभिलाषा ने वहां एक सामाजिक सुधारक की भूमिका भी निभाई। उन्होंने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए। उनके मार्गदर्शन में स्वास्थ्य कार्यशालाएं और शैक्षणिक कैंप आयोजित किए गए, जिससे उन लाचार महिलाओं को अपनी जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने में मदद मिली। भारतीय सेना की मानवीय संवेदनशीलता को उन्होंने लेबनान में एक नई ऊंचाई दी है।

इतना ही नहीं, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के अपने साथी शांतिरक्षकों के लिए भी व्यापक जेंडर-सेंसिटाइजेशन (लिंग-संवेदनशीलता) ट्रेनिंग मॉड्यूल आयोजित किए। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ग्राउंड पर काम करते समय हर सैन्य कर्मी महिलाओं की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझे। उनके इसी उत्कृष्ट और बेमिसाल कार्य को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें इस शीर्ष पुरस्कार के लिए चुना।

यह प्रतिष्ठित सम्मान न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। जब उन्हें यह मेडल पहनाया गया, तो वह केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत जीत नहीं थी, बल्कि यह भारत की उस नारी शक्ति का सम्मान था जो आज वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने का माद्दा रखती है।

मेजर अभिलाषा बराक का करियर हर भारतीय युवा के लिए प्रेरणा की एक मिसाल है। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प का परिणाम है। 2018 में आर्मी एयर डिफेंस कोर में कमीशन प्राप्त करने के बाद से ही उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और निरंतर नई ऊंचाइयों को छुआ।

साल 2022 में उन्होंने तब इतिहास रचा जब वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट एविएटर बनीं। नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल से स्नातक होकर उन्होंने साबित किया कि आसमान की कोई सीमा नहीं होती। एक कॉम्बैट एविएटर के रूप में वह युद्ध के मैदान में सीधे दुश्मन का सामना करने की पूरी क्षमता रखती हैं। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि भारतीय सेना में महिलाएं अब फ्रंटलाइन पर नेतृत्व कर रही हैं।

आज का ‘नया भारत’ वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है। भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता रहा है। अफ्रीका से लेकर मध्य पूर्व तक हमारे जवानों ने अपनी जान की बाजी लगाकर शांति स्थापित की है, लेकिन अब बदलाव यह है कि भारत की महिला सैन्य अधिकारी इन कठिन अभियानों की कमान संभालकर दुनिया के लिए रोल मॉडल बन रही हैं।

लेबनान में मेजर बराक द्वारा किया गया कार्य प्रमाण है कि भारतीय सेना ‘हार्ड पावर’ के साथ-साथ ‘सॉफ्ट पावर’ और सामुदायिक जुड़ाव में भी विश्व में अग्रणी है। जब एक भारतीय महिला अफसर विदेशी जमीन पर नागरिकों की जिंदगी संवारती है, तो वह वास्तव में भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश को वैश्विक पटल पर चरितार्थ कर रही होती है।

दुनिया के बड़े मंचों पर जब भारत की सैन्य शक्ति और कूटनीति की सराहना होती है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत अब किसी से पीछे नहीं है। मेजर अभिलाषा बराक ने जो मुकाम हासिल किया है, वह देश की करोड़ों उन बेटियों को नया हौसला देगा जो वर्दी पहनकर मातृभूमि की सेवा करने का सपना देखती हैं। उनकी सफलता पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है।

भारत की इस साहसी बेटी की उपलब्धि पर पूरा देश उन्हें सलाम करता है। उनकी लीडरशिप, अदम्य साहस और मानवीय दृष्टिकोण आज पूरे विश्व के लिए एक महान प्रेरणा बन चुके हैं।

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