होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान का ऐतिहासिक समझौता: अमेरिका और इजरायल की बढ़ी बेचैनी

ईरान और ओमान के बीच सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए समझौते का मसौदा अपने अंतिम चरण में है। ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस नए करार के तहत फारस की खाड़ी में जहाजों के यातायात को विनियमित करने की एक व्यापक रूपरेखा बनाई गई है, जिसके अंतर्गत सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बदले जहाजों से सर्विस फीस ली जाएगी। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बाद ईरान ने इस मार्ग पर अपना प्रभावी नियंत्रण कायम कर लिया था। इस नए समझौते से अब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम पर रुकी हुई वार्ता फिर से शुरू होने की प्रबल संभावना बन गई है।

3. मुख्य वॉइसओवर स्क्रिप्ट (Main Script)

वैश्विक महाशक्तियों के बीच जारी खींचतान के बीच अब एक ऐसी खबर आई है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है। क्या दुनिया की तेल आपूर्ति का यह प्रमुख मार्ग एक बार फिर पूरी तरह सुचारू होने जा रहा है? क्या ईरान ने अमेरिका और इजरायल की रणनीतिक घेराबंदी को नाकाम करते हुए ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला है कि महाशक्तियों को भी समझौता करने पर मजबूर होना पड़ रहा है? आज यह सवाल हर उस देश के जेहन में है जिसकी अर्थव्यवस्था मिडिल ईस्ट के इस क्रूशियल चोकपॉइंट—होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी है। तेहरान और मस्कट से आ रही सूचनाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा घटित हो रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही गोपनीय कूटनीति अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ एक व्यापक समझौते की रूपरेखा अंतिम दौर में है। तेहरान की यह खबर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित हो सकती है, क्योंकि इस मार्ग के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बेलगाम होने लगी थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस डील की घोषणा के संकेतों ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू यह है कि ईरान ने साफ कर दिया है कि यह मार्ग अब युद्ध-पूर्व की स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। पिछले साल की शुरुआत में जब अमेरिका और इजरायल के साथ सैन्य तनाव बढ़ा, तभी से ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर अपना व्यावहारिक नियंत्रण स्थापित कर लिया था। ईरान ने वैश्विक समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है कि इस क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा पर उसका एकाधिकार रहेगा। ओमान के साथ हो रही इस डील का ब्लूप्रिंट कुछ इस तरह है कि व्यापारिक गतिविधियां भी चलती रहें और ईरान का रणनीतिक प्रभुत्व भी बना रहे।

इस समझौते के तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो यह एक नए वैश्विक व्यवस्था की ओर इशारा करता है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, मसौदा लगभग तैयार है और अब इसे केवल ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की औपचारिक स्वीकृति मिलना बाकी है। इसके बाद एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा, बशर्ते वाशिंगटन या उसके सहयोगी देश इस शांति प्रक्रिया में कोई बाधा न डालें। ईरानी प्रवक्ता ने आगाह भी किया है कि समझौते के बावजूद हर गुजरने वाले जहाज के लिए सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल लागू रहेंगे।

नए प्लान के मुताबिक, जहाजों की आवाजाही के लिए एक विशेष कॉरिडोर निर्धारित किया गया है। जहाज ईरानी नियंत्रण वाले मार्ग से फारस की खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के नियंत्रण वाले मार्ग से बाहर निकलेंगे। इसका अर्थ है कि पूरे नौवहन संचालन पर इन दोनों देशों का कड़ा नियंत्रण होगा। हालांकि, कोई अतिरिक्त टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा, लेकिन सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण संरक्षण के नाम पर एक निश्चित ‘सर्विस फीस’ अनिवार्य होगी। यह मॉडल दिखाता है कि ईरान अपनी शर्तों पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को संचालित करने की क्षमता रखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल तेल आपूर्ति बहाल करने तक सीमित नहीं है। यह ईरान और अमेरिका के बीच अटके परमाणु वार्ता को दोबारा शुरू करने का एक बड़ा जरिया भी बन सकता है। जब दुनिया ऊर्जा संकट और महंगाई से जूझ रही है, तब ईरान ने अपनी रणनीतिक शक्ति से यह सिद्ध कर दिया है कि मध्य पूर्व की राजनीति में उसकी भूमिका निर्णायक है। अब पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया पर हैं कि क्या यह व्यापार मार्ग आने वाले समय में वैश्विक बाजार को राहत दे पाएगा।

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