राजस्थान के जैसलमेर में मिला गैस का विशाल भंडार: दुनिया भर में मची खलबली, भारत बनेगा ऊर्जा का नया पावरहाउस

आज पूरी दुनिया एक ऐसे बारूद के ढेर पर बैठी है जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकती है। एक तरफ अमेरिका और चीन जैसे दिग्गज देश कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश में हैं, तो दूसरी तरफ मध्य पूर्व के तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को संकट में डाल दिया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने गैस की कीमतों में जबरदस्त आग लगा दी है। लाल सागर के रास्ते में बढ़ते खतरों के कारण माल ढुलाई का खर्च भी काफी बढ़ गया है। आज दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं एक नाज़ुक मोड़ पर हैं। यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों को डर है कि यदि ऊर्जा की सप्लाई रुकी, तो कारखाने बंद हो जाएंगे और उनकी अर्थव्यवस्थाएं ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगी। बड़े-बड़े सुपरपावर अब अरब देशों की ओर उम्मीद भरी नज़रों से देख रहे हैं कि किसी तरह उनकी ऊर्जा की ज़रूरतें पूरी होती रहें।

इसी वैश्विक संकट के बीच, भारत से एक ऐसी खबर आई है जिसने ऊर्जा जगत के विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। जब पूरी दुनिया तेल और गैस के लिए परेशान है, तब राजस्थान के जैसलमेर के रेगिस्तान ने अपने भीतर दबा प्राकृतिक गैस का एक महा-भंडार उगल दिया है। मोदी सरकार ने इस बड़ी उपलब्धि की घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि यह खोज भारत की किस्मत बदलने वाली साबित होगी। दशकों से जो विदेशी ताकतें भारत को अपनी शर्तों पर चलाना चाहती थीं, उनके लिए यह एक करारा जवाब है। आखिर जैसलमेर की इस रेतीली धरती के नीचे क्या मिला है जिसने वैश्विक बाज़ार में हलचल मचा दी है? आइए जानते हैं भारत का वो मास्टरप्लान जो हमें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के हाथ एक बड़ा जैकपॉट लगा है। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ‘ऑयल इंडिया लिमिटेड’ ने जैसलमेर के दांडेवाला फील्ड में प्राकृतिक गैस का एक बिल्कुल नया क्षेत्र खोज निकाला है। यह खोज भारत के घरेलू ऊर्जा उत्पादन के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। दांडेवाला का यह इलाका अब देश के ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ बनेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद इस सफलता का ऐलान किया और दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब ऊर्जा के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेगा।

यह नया गैस भंडार भारत की ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ को चट्टान जैसी मज़बूती देगा। ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ यह है कि यदि कल को वैश्विक युद्ध या महामारी के कारण बाहर से तेल आना बंद भी हो जाए, तब भी भारत के उद्योग, गाड़ियां और घर बिना रुके चलते रहेंगे। ऑयल इंडिया लिमिटेड की इस खोज ने यह साबित कर दिया है कि हमारी धरती के नीचे संसाधनों का अपार भंडार है, जिसे बस सही तकनीक और दृढ़ इच्छाशक्ति से निकालने की ज़रूरत है।

इस खोज के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि दांडेवाला फील्ड के ‘सानू फॉर्मेशन’ से प्राकृतिक गैस का प्रवाह शुरू हो चुका है। सानू फॉर्मेशन ज़मीन के नीचे की वह परत है जहां लाखों वर्षों से जीवाश्मों के दबाव और तापमान के कारण यह गैस दबी हुई थी। अब इस कुदरती खजाने की चाबी भारत के हाथ लग गई है।

इस नए स्रोत से प्रतिदिन लगभग 25,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस निकल रही है। यह गैस हज़ारों घरों में रसोई गैस पहुंचाने और दर्जनों फैक्ट्रियों को सस्ती ऊर्जा देने में सक्षम है। इस सफलता ने भारत के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को नई गति दी है। 50 डिग्री की भीषण गर्मी और धूल भरे तूफानों के बीच ऑयल इंडिया के इंजीनियरों ने जो काम किया है, वह वाकई काबिले तारीफ है।

यह कामयाबी उस समय मिली है जब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में तेज़ी से बढ़ रहा है। अब तक भारत को अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता था, जिससे हमारा कीमती विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) खर्च होता था। लेकिन जैसलमेर की यह खोज इस आयात पर लगाम लगाएगी। जब हम ऊर्जा के लिए अपनी ज़मीन पर निर्भर होंगे, तो न केवल देश का पैसा बचेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी भारतीय जनता पर कम होगा।

इस उपलब्धि के साथ ही ऑयल इंडिया लिमिटेड की आर्थिक स्थिति भी मज़बूत हुई है। कंपनी ने अपनी चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ (Net Profit) में 76% की भारी बढ़त दर्ज की है। कंपनी का राजस्व भी 10,013 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। शेयर बाज़ार में भी इस कंपनी ने पिछले पांच सालों में 450% से अधिक का रिटर्न देकर निवेशकों को मालामाल कर दिया है।

जैसलमेर में मिला यह खजाना केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राजस्थान के विकास का नया अध्याय लिखेगा। रेगिस्तानी इलाका अब देश का ऊर्जा पावरहाउस बनेगा। यहां नए गैस आधारित बिजली संयंत्र, उर्वरक कारखाने और पेट्रोकेमिकल उद्योग स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिलेगा और राज्य सरकार को भारी रॉयल्टी प्राप्त होगी।

दांडेवाला के अलावा, भारत के पास बॉम्बे हाई, केजी बेसिन, खंभात बेसिन और असम-अराकान बेसिन जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र भी हैं जो देश की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा कर रहे हैं। रिलायंस और ओएनजीसी जैसी कंपनियां भी गहरे समुद्र में नए भंडारों की खोज में जुटी हुई हैं। राजस्थान का बाड़मेर बेसिन भी पहले से ही तेल उत्पादन में अग्रणी रहा है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 15% करना है। इसके लिए ‘वन नेशन वन गैस ग्रिड’ और ‘ऊर्जा गंगा’ जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। पूरे देश में पाइपलाइनों का जाल बिछाया जा रहा है ताकि कश्मीर से कन्याकुमारी तक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। यह नया भारत है, जो अपनी ऊर्जा की दास्तां खुद लिख रहा है।

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