नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक से एक ऐसी वैश्विक बिसात बिछाई गई है, जिसने बीजिंग के रणनीतिकारों की रातों की नींद उड़ाने के साथ-साथ अंकारा, इस्लामाबाद और बाकू में भी हड़कंप मचा दिया है। आज का भारत अब वो रक्षात्मक देश नहीं रहा, जो केवल अपनी सीमाओं के भीतर सिमटा रहे। यह ‘चाणक्य नीति’ का एक आधुनिक और आक्रामक स्वरूप है, जहाँ भारत अपने विरोधियों को उनके ही प्रभाव क्षेत्र में घेर रहा है। यदि चीन ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ के जरिए हिंद महासागर में भारत की घेराबंदी का प्रयास करेगा, तो भारत भी चीन के पड़ोसियों को शक्तिशाली हथियारों से लैस कर ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ तैयार करने में पीछे नहीं रहेगा। यदि तुर्की और पाकिस्तान कश्मीर के नाम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहर उगलेंगे, तो भारत उनके शत्रुओं—ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया—के साथ रणनीतिक साझेदारी कर उन्हें भूमध्य सागर और काकेशस में कड़ा जवाब देगा। इस महा-रणनीति में इज़रायल और रूस जैसे राष्ट्र भारत के मौन लेकिन सबसे भरोसेमंद साथी बनकर खड़े हैं।
हिंद महासागर में भारत की अभेद्य दीवार
हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ को रोकने के लिए भारत ने एक अदृश्य समुद्री सुरक्षा घेरा तैयार किया है। मॉरीशस के अगालेगा द्वीप पर भारत ने तीन हजार मीटर लंबी हवाई पट्टी और डीप-वाटर पोर्ट का विकास किया है, जहाँ से भारत के घातक P-8I नेप्च्यून टोही विमान किसी भी चीनी पनडुब्बी की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नज़र रख सकते हैं। सेशेल्स के असम्पशन द्वीप पर भारत का कोस्टल रडार नेटवर्क अब सीधे गुरुग्राम स्थित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर को डेटा भेज रहा है। इंडोनेशिया के साथ मिलकर सबांग बंदरगाह का विकास करना एक और मास्टरस्ट्रोक है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के बिल्कुल करीब है, जहाँ से चीन का अधिकांश व्यापार गुजरता है। युद्ध की स्थिति में भारत इस चोकपॉइंट को बंद कर चीन की आर्थिक कमर तोड़ सकता है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ रक्षा सहयोग भारत की स्थिति को प्रशांत क्षेत्र तक मजबूत बना रहा है।
ड्रैगन के घर में भारत की सीधी चुनौती
भारत ने अब चीन के प्रभाव वाले दक्षिण चीन सागर में सीधा हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति करना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। यह मिसाइल इतनी तेज है कि चीन की वर्तमान एयर डिफेंस प्रणाली इसे रोकने में सक्षम नहीं है। वहीं, वियतनाम को आईएनएस कृपाण युद्धपोत उपहार में देना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब अपने सहयोगियों को पूरी तरह सैन्य सहायता देने के लिए तैयार है। चीन के कड़े विरोध के बावजूद, वियतनाम के समुद्र में भारत का तेल अन्वेषण जारी रखना बीजिंग को एक स्पष्ट संदेश है कि हम तुम्हारी आक्रामकता से डरने वाले नहीं हैं।
काकेशस का जाल और तुर्की-अज़रबैजान की घेराबंदी
मध्य एशिया और काकेशस क्षेत्र में भारत ने तुर्की, पाकिस्तान और अज़रबैजान के ‘थ्री ब्रदर्स’ गठबंधन को चुनौती देने के लिए आर्मेनिया को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बनाया है। आर्मेनिया को पिनाक रॉकेट लॉन्चर और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति करके भारत ने अज़रबैजान की सैन्य बढ़त को कम कर दिया है। भारत के इन घातक हथियारों ने न केवल युद्ध का संतुलन बदला है, बल्कि अंकारा और बाकू के रणनीतिक अहंकार को भी चोट पहुँचाई है।
भूमध्य सागर में भारत का बढ़ता प्रभाव
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के कश्मीर विरोधी बयानों का जवाब देने के लिए भारत ने ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। साइप्रस के साथ रक्षा और व्यापारिक समझौते करना और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोलना तुर्की के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके अलावा, इन देशों में भारत की यूपीआई (UPI) प्रणाली का विस्तार आर्थिक कूटनीति का एक बेहतरीन उदाहरण है।
सबसे बड़ी हलचल भारत और ग्रीस के बीच संभावित मिसाइल सौदे को लेकर है। भारत की स्वदेशी LR-LACM मिसाइल, जिसकी मारक क्षमता 1500 किलोमीटर तक है, ने तुर्की के विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। यदि यह तकनीक ग्रीस को मिलती है, तो अंकारा और इस्तांबुल जैसे शहर ग्रीस की सीधी जद में होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ग्रीस के बीच सैन्य सहयोग को लेकर बनी सहमति इस साझेदारी की गंभीरता को दर्शाती है।
IMEC कॉरिडोर: भविष्य का व्यापारिक मार्ग
भारत, इज़रायल और ग्रीस मिलकर भूमध्य सागर में एक नया नौसैनिक और आर्थिक गलियारा बना रहे हैं। इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप कॉरिडोर (IMEC) के माध्यम से भारत ग्रीस के अलेक्जेंड्रोपोली पोर्ट को अपना गेटवे बनाने की तैयारी में है। यह कॉरिडोर न केवल स्वेज नहर पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को भी कड़ी टक्कर देगा। इससे व्यापार की लागत और समय में भारी कमी आएगी।
इसके अतिरिक्त, मंगोलिया में भारत द्वारा बनाई गई तेल रिफाइनरी ने उस देश की चीन और रूस पर निर्भरता को कम कर दिया है। चाबहार बंदरगाह और INSTC कॉरिडोर के जरिए भारत रूस और यूरोप तक अपनी पहुँच को और अधिक सुगम बना रहा है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रतीक है।
आज का भारत केवल अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि ‘प्रोएक्टिव-डिफेंस’ और ‘ऑफेंसिव-डिप्लोमेसी’ के जरिए दुनिया भर में अपने हितों को सुरक्षित कर रहा है। तुर्की के शत्रुओं को सशक्त बनाना और चीन के पड़ोसियों में निवेश करना एक सुविचारित रणनीति है। वैश्विक शतरंज की इस बिसात पर भारत अब एक निर्णायक खिलाड़ी बनकर उभरा है, जो अपनी चालों से दुश्मनों को उनके ही खेल में मात दे रहा है।

