AC कैब और फ्लाइट्स छोड़ ‘देसी ऑटो’ में निकले विदेशी!

AC कैब और फ्लाइट्स छोड़ 'देसी ऑटो' में निकले विदेशी!

आजकल के दौर में अगर किसी को एक शहर से दूसरे शहर जाना हो, तो सबसे पहले फ्लाइट की टिकट चेक की जाती है। अगर फ्लाइट बजट में न हो, तो एसी ट्रेन या फिर किसी लग्जरी कैब का सहारा लिया जाता है। थोड़ा सा लंबा सफर आते ही लोगों के पसीने छूटने लगते हैं और उन्हें हर हाल में कंफर्ट चाहिए होता है। लेकिन जरा सोचिए कि हजारों किलोमीटर का सफर, वो भी एक राज्य से दूसरे राज्य तक नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के एक छोर से लेकर उत्तर-पश्चिम भारत के रेगिस्तान तक का सफर कोई ऑटो रिक्शा में तय करे, तो आप क्या कहेंगे? आप शायद इसे पागलपन कहें या फिर कोई मजाक। लेकिन आज जिस सच्चाई से हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं, उसने उन तमाम लोगों के मुंह पर ताला लगा दिया है जो भारत की छवि को दुनिया भर में खराब करने का एजेंडा चलाते हैं।

आज का नया भारत सिर्फ अपनी इकॉनमी और मिलिट्री पावर से ही दुनिया को हैरान नहीं कर रहा है, बल्कि भारत का सॉफ्ट पावर और यहां का कल्चर विदेशियों के सिर चढ़कर बोल रहा है। एक तरफ वो विदेशी हैं जो भारत को समझने के लिए किताबों का सहारा लेते हैं, और दूसरी तरफ वो ऑस्ट्रेलियन टूरिस्ट्स हैं जिन्होंने किताबी ज्ञान को किनारे रखकर सीधा भारत की सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। वो भी किसी महंगी एसयूवी या एसी वैन में नहीं, बल्कि हमारे और आपके रोजमर्रा के साथी, यानी एक देसी ऑटो रिक्शा में। जी हां, कोच्चि से जैसलमेर तक का सफर ऑटो से तय किया जा रहा है और इस सफर ने पूरे इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है।

नागपुर हाईवे पर दिखा नए भारत का जलवा

कहानी तब सामने आई जब नागपुर हाईवे पर एक इंस्टाग्राम यूजर की नजर एक बेहद रंग-बिरंगे ऑटो पर पड़ी। उस ऑटो में कोई आम सवारी नहीं थी, बल्कि दो विदेशी चेहरे बैठे थे जो खुशी से मुस्कुरा रहे थे। जब उस यूजर ने उनसे बात की, तो जो जवाब मिला उसने हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। उन दोनों ऑस्ट्रेलियन टूरिस्ट्स ने बताया कि उन्होंने अपना ये सफर केरल के कोच्चि से शुरू किया है और उनकी मंजिल राजस्थान का जैसलमेर है। कोच्चि से जैसलमेर की दूरी लगभग ढाई हजार किलोमीटर से भी ज्यादा है। ये वो दूरी है जिसे तय करने में अच्छे-अच्छे लोगों की हिम्मत जवाब दे जाती है। लेकिन इन विदेशियों के चेहरों पर न तो कोई थकान थी और न ही कोई परेशानी। बल्कि उनकी आंखों में भारत को उसके असली रूप में देखने की एक गजब की चमक थी।

ये वीडियो इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आज का भारत कितना बदल चुका है। एक समय था जब विदेशी टूरिस्ट सिर्फ गिने-चुने शहरों तक सीमित रहते थे और वो भी भारी सुरक्षा और लग्जरी गाड़ियों के बीच। लेकिन आज वो बेखौफ होकर भारत के नेशनल हाईवे पर ऑटो रिक्शा दौड़ा रहे हैं। ये तस्वीर उन पश्चिमी मीडिया हाउस के गाल पर एक करारा तमाचा है, जो भारत को एक अनसेफ या असुरक्षित देश बताने का कोई मौका नहीं छोड़ते। जो लोग कहते हैं कि भारत विदेशियों के लिए सुरक्षित नहीं है, उन्हें नागपुर हाईवे का ये वायरल वीडियो लूप पर देखना चाहिए।

वेस्टर्न लक्ज़री पर भारी भारत की देसी वाइब

आखिर इन विदेशियों ने फ्लाइट या लग्जरी कार छोड़कर ऑटो रिक्शा को ही क्यों चुना? इसके पीछे का कारण बहुत गहरा है। दरअसल, दुनिया अब नकली चमक-दमक और फाइव स्टार होटल्स की आर्टिफिशल दुनिया से ऊब चुकी है। ऑस्ट्रेलिया हो, अमेरिका हो या यूरोप, वहां के लोगों के पास पैसों की कोई कमी नहीं है। वो चाहें तो चार्टर्ड प्लेन से भी घूम सकते हैं। लेकिन असली रोमांच और रियल एक्सपीरियंस हवा में उड़कर या बंद शीशों वाली एसी गाड़ियों में बैठकर नहीं मिलता। असली भारत तो इन सड़कों पर बसता है।

जब एक विदेशी ऑटो में बैठता है, तो वो सिर्फ सफर नहीं करता, बल्कि वो भारत की हवा को महसूस करता है। वो ढाबों की चाय पीता है, रास्तों के किनारे बजने वाले लोकल गानों को सुनता है, और भारत के आम इंसान से सीधे कनेक्ट होता है। ऑटो रिक्शा में बैठकर आप हर उस आवाज, हर उस खुशबू और हर उस रंग को महसूस कर सकते हैं जो इस देश की असली पहचान है। इन ऑस्ट्रेलियन टूरिस्ट्स ने भी यही किया है। उन्होंने अपनी लग्जरी को छोड़कर भारत की उस रियल वाइब को गले लगाया है, जिसे दुनिया का कोई भी टूर पैकेज नहीं खरीद सकता। ये कोई लो-बजट ट्रिप नहीं है, बल्कि ये भारत के कल्चर को सबसे करीब से देखने का एक विजन है।

असुरक्षित भारत के प्रोपेगेंडा का हुआ पर्दाफाश

इस वीडियो ने एक और बहुत बड़े प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ा दी हैं। अक्सर सोशल मीडिया पर कुछ लोग जानबूझकर ऐसे नैरेटिव सेट करते हैं कि भारत में टूरिस्ट्स के साथ बुरा बर्ताव होता है या यहां की सड़कें सफर के लायक नहीं हैं। लेकिन जब दो ऑस्ट्रेलियन नागरिक बिना किसी डर के, बिना किसी भारी सुरक्षा घेरे के हजारों किलोमीटर का सफर एक थ्री-व्हीलर में तय कर रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब क्या है? इसका मतलब ये है कि भारत का लॉ एंड ऑर्डर और यहां का माहौल टूरिस्ट्स के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।

चाहे वो साउथ इंडिया के हरे-भरे रास्ते हों, महाराष्ट्र के व्यस्त हाईवे हों या फिर राजस्थान के सुनसान रेगिस्तानी इलाके, हर जगह भारत की आवाम इन विदेशियों का दिल खोलकर स्वागत कर रही है। ये है हमारे देश की असली तस्वीर। अतिथि देवो भवः का जो मंत्र हमारे शास्त्रों में लिखा है, वो आज हाईवे पर चलते एक आम हिंदुस्तानी के बर्ताव में भी झलकता है। इन टूरिस्ट्स के मुस्कुराते हुए चेहरे बता रहे हैं कि उन्हें भारत में कितना प्यार और सम्मान मिल रहा है।

वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर और बदलता नैरेटिव

इस अनोखे सफर में एक और बात जो सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है, वो है भारत का वर्ल्ड क्लास इन्फ्रास्ट्रक्चर। कोच्चि से जैसलमेर तक का रास्ता कोई छोटा-मोटा रास्ता नहीं है। इसके बीच में कई राज्य आते हैं, कई मौसम बदलते हैं और कई तरह की भौगोलिक चुनौतियां सामने आती हैं। एक ऑटो रिक्शा, जिसका इंजन बहुत भारी-भरकम नहीं होता, अगर वो इतनी लंबी दूरी तय कर पा रहा है, तो इसका सीधा क्रेडिट भारत के शानदार नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को जाता है।

पिछले कुछ सालों में भारत ने सड़कों का जो जाल बिछाया है, उसने सिर्फ देश की इकॉनमी को ही नहीं बल्कि टूरिज्म को भी पंख लगा दिए हैं। आज नागपुर का हाईवे हो या राजस्थान की सड़कें, सब एकदम मक्खन जैसी हो चुकी हैं। यही वजह है कि एक छोटा सा ऑटो रिक्शा भी बिना किसी ब्रेकडाउन के इतनी लंबी दूरी तय करने का हौसला दिखा पा रहा है। ये नया इंडिया है जो अब गड्ढों और हिचकोलों से आगे निकलकर फर्राटेदार रफ्तार भर रहा है।

भारत की सॉफ्ट पावर की ग्लोबल जीत

अंत में, ये पूरा वाकया सिर्फ एक ट्रैवल वीडियो तक सीमित नहीं है। ये भारत की सॉफ्ट पावर की एक बहुत बड़ी जीत है। आज दुनिया भर के लोग भारत को सिर्फ एक बाजार या एक विकासशील देश की नजर से नहीं देख रहे हैं। वो भारत को एक ऐसी जगह मान रहे हैं जहां जिंदगी के असली मायने छिपे हैं। जहां का कल्चर, जहां की विविधता और जहां का अपनापन उन्हें अपनी ओर खींच रहा है।

जब ये ऑस्ट्रेलियन टूरिस्ट वापस अपने देश जाएंगे, तो वो अपने साथ कोई फाइव स्टार होटल की कहानी नहीं लेकर जाएंगे। वो अपने साथ नागपुर हाईवे की वो मुलाकात, उस ऑटो रिक्शे की सवारी, ढाबे का खाना और भारत के लोगों की वो मुस्कान लेकर जाएंगे जो उन्होंने इस ढाई हजार किलोमीटर के सफर में बटोरी है। और यही वो असली ब्रांड इंडिया है जिसे कोई भी पेड मीडिया कभी झुठला नहीं सकता। ये वीडियो एक शुरुआत है, एक ऐसे ग्लोबल नैरेटिव की जहां भारत का आम जनजीवन, विदेशी टूरिस्ट्स के लिए सबसे बड़ा लक्ज़री एक्सपीरियंस बन चुका है।

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