11 टका की बिजली ठुकराकर चीन को 25 टका क्यों दे रहा बांग्लादेश? जानिए इनसाइड स्टोरी

11 टका की बिजली ठुकराकर चीन को 25 टका क्यों दे रहा बांग्लादेश? जानिए इनसाइड स्टोरी

जिहादी मानसिकता जब अपनी औकात से ज्यादा उड़ने लगती है तो उसका जमीन पर गिरना तय होता है। इधर भारत में ब्रिक्स समिट को जोरदार कामयाबी मिली। भारत ने अपने पड़ोसी और मित्र देश होने के नाते बिम्सटेक के अध्यक्ष की हैसियत से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भी इनवाइट किया था। लेकिन तारिक रहमान ने कूटनीतिक नाटक स्टार्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें द्विपक्षीय न्योता नहीं मिला है इसलिए वो नहीं जाएंगे। लेकिन तारिक रहमान शायद भूल गए कि दिल्ली में अब वो सरकार नहीं बैठी है जो भाईचारे के नाम पर देशों को चारा डालती रहे और पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश को भी पालती रहे। अब भारत हिसाब बराबर करता है। जैसे ही ये कन्फर्म हुआ कि तारिक रहमान भारत नहीं आ रहे हैं और उनके मंत्रियों के तीखे बयान आने शुरू हुए इधर दिल्ली से पहला स्टेप ऑन कर दिया गया। एक साइलेंट बटन दबा और पूरे बांग्लादेश की आधी बिजली गायब हो गई। कारण दिया गया तकनीकी खराबी। अब जरा इस तकनीकी खराबी की टाइमिंग और इसके खौफनाक इम्पैक्ट को समझिए। बांग्लादेश बीते कुछ महीनों से गहरे बिजली संकट से गुजर रहा है। बांग्लादेश को भारत बड़े पैमाने पर बिजली सप्लाई करता है। लेकिन अचानक झारखंड स्थित अडानी पावर के सोलह सौ मेगावाट क्षमता वाले गोड्डा अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल पावर प्लांट की दो यूनिट्स में से एक बंद हो गई। द डेली स्टार अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक आठ सौ मेगावाट क्षमता वाली इस यूनिट में गुरुवार आधी रात के आसपास बॉयलर में खराबी आ गई। पावर ग्रिड बांग्लादेश के आंकड़ों को देखें तो यूनिट बंद होने से पहले गोड्डा प्लांट से बिजली का उत्पादन चौदह सौ मेगावाट से ज्यादा हो रहा था। लेकिन शटडाउन के बाद सप्लाई सीधे साढ़े सात सौ मेगावाट से भी नीचे गिर गई। पीडीएफ यानी बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के अधिकारियों के पसीने छूट गए। अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि बॉयलर को ठंडा होने में ही अड़तालीस घंटे लगेंगे और मरम्मत के बाद सप्लाई बहाल होने में कई दिन लग सकते हैं।

बांग्लादेश के सीनियर पत्रकार और एक्सपर्ट मजमुल अहसान ने साफ कहा है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री के यह कहने के चौबीस घंटे के भीतर कि उनके पीएम भारत नहीं जाएंगे मोदी के एक अहम सहयोगी के पावर प्लांट में खराबी आ जाती है। यह कोई संयोग नहीं है। यह भारत का एक ऐसा कड़ा संदेश है जिसने पूरे ढाका को हिला कर रख दिया है। आज बांग्लादेश में पीक डिमांड के दौरान लोड शेडिंग पच्चीस सौ मेगावाट को पार कर गई है। देश का पावर सिस्टम पहले से ही गैस कोयले और तरल ईंधन की कमी से जूझ रहा है। गैस आधारित प्लांट्स से करीब पांच हजार मेगावाट कोयला प्लांट्स से साढ़े चार हजार मेगावाट और लिक्विड फ्यूल से दो हजार से तीन हजार मेगावाट बिजली ही बन पा रही है। कुल उत्पादन तेरह हजार से चौदह हजार मेगावाट के बीच अटका है जबकि मांग सोलह हजार मेगावाट से ज्यादा है। इस भयंकर अंतर ने बांग्लादेश की सांसें अटका दी हैं।

लेकिन कहानी सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश भारत के साथ हुए एक सौ एक समझौतों यानी एमओयू को रद्द करने की गीदड़भभकी दे रहा है। बांग्लादेश की सत्ताधारी बीएनपी के संसद में मुख्य व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने खुलेआम ऐलान किया है कि पिछली सरकार के दौरान हुए एक सौ एक समझौतों की समीक्षा हो रही है। इसमें सबसे बड़ा निशाना है चटगांव पोर्ट और मोंगला पोर्ट। भारत इन पोर्ट्स का इस्तेमाल करता है ताकि कोलकाता से उत्तर पूर्वी राज्यों जैसे असम त्रिपुरा मेघालय तक सामान आसानी से भेजा जा सके। पहले भारत को सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के संकरे रास्ते से सोलह सौ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। लेकिन चटगांव पोर्ट के समझौते से यह दूरी कुछ सौ किलोमीटर रह गई। अब बांग्लादेश इसे रोककर भारत की सप्लाई लाइन काटना चाहता है।

लेकिन तारिक रहमान को शायद पता नहीं कि भारत ने अपना खूंखार प्लान बी एक्टिवेट कर दिया है। मोदी सरकार ने बिना एक भी गोली चलाए बांग्लादेश की आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। भारत ने तुरंत उस विशेष सुविधा को वापस ले लिया जिसके तहत बांग्लादेश अपने सामान को कोलकाता एयरपोर्ट के जरिए दुनिया भर में एक्सपोर्ट करता था। इतना ही नहीं भारत ने बांग्लादेश से आने वाले कपड़े खाद्य उत्पाद जूट कॉटन प्लास्टिक और लकड़ी के फर्नीचर जैसे कई आयातों पर पाबंदी लगा दी है। इसका सीधा असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।

नफरत में इंसान कितना अंधा हो सकता है यह आज बांग्लादेश साबित कर रहा है। भारत की सस्ती बिजली पर मामूली चार्ज को लेकर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई। भारत ने चौबीस अगस्त को सीमा पार बिजली लेन देन के लिए सीईआरसी के नियमों के तहत शून्य दशमलव शून्य शून्य पांच आईएनआर प्रति यूनिट का एसएनए शुल्क लगाया था। बांग्लादेश ने इसका विरोध किया। लेकिन अब यही बांग्लादेश चीन की एक कंपनी से कचरे से बिजली बनाने वाली परियोजना के लिए पच्चीस टका प्रति यूनिट का भुगतान करने जा रहा है। बयालीस मेगावाट क्षमता वाले अमीनबाजार लैंडफिल प्रोजेक्ट के लिए बांग्लादेश चीन को जो कीमत दे रहा है वह भारत की ग्यारह दशमलव सात दो टका प्रति यूनिट की बिजली से लगभग एक सौ सत्ताईस प्रतिशत ज्यादा है। भारत से सस्ती बिजली ठुकरा कर चीन की महंगी बिजली खरीदना साफ दिखाता है कि तारिक सरकार चीन के उसी खतरनाक डेट ट्रैप में फंस रही है जिसने श्रीलंका को बर्बाद कर दिया था।

बांग्लादेश की अंदरूनी हालत इस वक्त किसी बुरे सपने जैसी है। देश की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर ताला लग रहा है। इक्कीस जुलाई को अमेरिकी कंपनी एक्सीलरेट एनर्जी के फ्लोटिंग एलएनजी टर्मिनल में आग लग गई थी। यह टर्मिनल डेढ़ महीने से बंद पड़ा है। समुद्र में खराब मौसम के कारण एलएनजी के दो जहाज अपना माल नहीं उतार सके। इससे पंद्रह सौ मेगावाट बिजली हवा हो गई। ढाका के बाहर ग्रामीण इलाकों में रोज दस से पंद्रह घंटे बिजली कट रही है। न्यूएज ग्रुप जैसी बड़ी इंटरनेशनल कपड़े बनाने वाली कंपनियां अपना प्रोडक्शन घटा रही हैं। फैक्ट्रियों में ताले लगने से लाखों मजदूर बेरोजगार होकर सड़कों पर आ गए हैं। झींगा पालने वाले किसानों की हालत सबसे खराब है। बिजली जाने से पानी में ऑक्सीजन देने वाली मशीनें बंद हो जाती हैं और झींगे मर रहे हैं। बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा झींगा निर्यातक देश है लेकिन आज उसका यह उद्योग तबाह हो रहा है। अवाम को खाने के लाले पड़ गए हैं। एलपीजी की कमी से घरों में चूल्हे नहीं जल रहे हैं और सरकार ने बाजारों को रात आठ बजे तक बंद करने का आदेश दे दिया है।

अब भारत का कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक देखिए। एक तरफ पूरा बांग्लादेश अंधेरे में त्राहि त्राहि कर रहा है तो दूसरी तरफ भारत बाढ़ में डूबे नेपाल को रोज अठारह घंटे मुफ्त और एक्स्ट्रा बिजली दे रहा है। छब्बीस अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ से सात बड़ी हाइड्रोपावर परियोजनाओं और पांच सोलर प्लांट्स को भारी नुकसान पहुंचा था। नेपाल की दो सौ पचहत्तर मेगावाट बिजली सप्लाई ठप हो गई। भारत तुरंत मदद के लिए आगे आया। भारत सरकार ने तेरह सितंबर से लेकर इकतीस दिसंबर दो हजार छब्बीस तक नेपाल को हर दिन मध्यरात्रि बारह बजे से लेकर शाम छह बजे तक बिजली देने का ऐलान कर दिया। यह सिर्फ मदद नहीं है बल्कि पूरे दक्षिण एशिया को एक साफ कूटनीतिक संदेश है। जो भारत का दोस्त है वो आबाद रहेगा और जो भारत से दुश्मनी करेगा वो अंधेरे में सड़ेगा।

इन सबके बीच बांग्लादेश की विदेश नीति पूरी तरह से भटकी हुई नजर आ रही है। विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर सरेआम कहते हैं कि भारत में नाश्ता भारत में लंच भारत में डिनर होगा तो आप अपना खाना कब खाएंगे। वो भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने की बात करते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि बांग्लादेश अब अमेरिका की गोद में जाकर बैठ गया है। सोलह साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि अमेरिका बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है और भारत तीसरे नंबर पर खिसक गया है। वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस से दो हजार छब्बीस में अमेरिका के साथ बांग्लादेश का व्यापार बारह दशमलव छह सात बिलियन यूएसडी तक पहुंच गया जबकि भारत के साथ यह गिरकर दस दशमलव सात दो बिलियन यूएसडी रह गया। बांग्लादेश ने अमेरिका के साथ एक बड़े समझौते के तहत पंद्रह वर्षों में तीन दशमलव पांच बिलियन यूएसडी के कृषि उत्पाद और पंद्रह बिलियन यूएसडी के ऊर्जा उत्पाद खरीदने का वादा किया है। साथ ही बोइंग विमान खरीदने की भी डील हुई है।

लेकिन भारत के लिए सबसे बड़ा रेड फ्लैग है बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां। तेरह सितंबर दो हजार छब्बीस को बांग्लादेश में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर इमरान हैदर ने राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से मुलाकात की। ढाका और कराची के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू कर दी गई है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति को पाकिस्तान आने का न्योता दिया है। अक्टूबर में ढाका में पाकिस्तानी उत्पादों का एक व्यापार मेला आयोजित होने जा रहा है। दोनों देशों के बीच सशस्त्र बलों की ट्रेनिंग और मिलिट्री सीक्रेट्स शेयर किए जा रहे हैं। जिस पाकिस्तान ने एक हजार नौ सौ इकहत्तर में लाखों बांग्लादेशियों का कत्लेआम किया था आज उसी पाकिस्तान से तारिक रहमान की सरकार सैन्य और कूटनीतिक रिश्ते मजबूत कर रही है।

यह कोई सामान्य घटनाक्रम नहीं है। बांग्लादेश की ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद भारत से इंडिया बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए अतिरिक्त डीजल की भीख मांग रहे हैं। दो हजार सत्रह में हुए समझौते के तहत भारत हर साल एक दशमलव आठ शून्य लाख मीट्रिक टन डीजल देता है। भारत पहले ही तीस हजार टन एक्स्ट्रा डीजल भेज चुका है। लेकिन बांग्लादेश एक तरफ भारत से तेल मांगता है और दूसरी तरफ भारत के रणनीतिक हितों पर चोट करता है।

भारत की नीति अब बिल्कुल स्पष्ट है। मोदी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं होगा। अगर बांग्लादेश चटगांव पोर्ट से भारत को बाहर करने का ब्लूप्रिंट बनाएगा तो भारत कोलकाता पोर्ट के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर देगा। अगर बांग्लादेश भारत की ग्यारह टका की बिजली ठुकरा कर चीन की पच्चीस टका की बिजली लेगा तो भारत भी अडानी प्लांट के प्लग निकाल कर उन्हें उनकी औकात याद दिला देगा।

यह नई दिल्ली का वो साइलेंट पावर गेम है जिसे दुनिया देख रही है। भारत ने नेपाल को बिजली देकर यह साबित कर दिया है कि हम एक मजबूत और भरोसेमंद सहयोगी हैं। लेकिन जो देश भारत के खिलाफ साजिशें रचेगा उसे कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर कुचल दिया जाएगा। बांग्लादेश का घमंड अब उसके ही घर में दफन हो रहा है। बिना कोई हल्ला मचाए बिना कोई सेना भेजे भारत ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की सांसें अटका दी हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर आपकी क्या राय है। क्या भारत को बांग्लादेश के खिलाफ और सख्त कदम उठाने चाहिए। क्या चटगांव पोर्ट का एक्सेस छिनने के बाद भारत को बांग्लादेश से सभी व्यापारिक रिश्ते खत्म कर लेने चाहिए। अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं।

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