संसाधनों की नहीं, बुलंद इरादों की है बात: भगवती बल्दवा ने JECRC यूनिवर्सिटी में युवाओं को दिया ‘सफलता का नया मंत्र’
जयपुर, राजस्थान। आधुनिक भारत के नवनिर्माण में नारी शक्ति के योगदान को उजागर करने और युवा पीढ़ी में स्वरोजगार व उद्यमिता की एक नई लौ जलाने के उद्देश्य से, जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यूनिवर्सिटी के नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) और जेइसीआरसी 90.8 एफएम ने संयुक्त रूप से ‘फ्रॉम डेजर्ट सैंड्स टू ग्लोबल स्टैंड्स – वुमन लीडिंग द वर्ल्ड ऑफ बिजनेस’ थीम पर एक मेगा मोटिवेशनल टॉक का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने न केवल सैकड़ों विद्यार्थियों के भीतर नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि उन्हें अपनी स्थानीय जड़ों से जुड़कर विश्व स्तर पर अपनी एक अमिट पहचान बनाने के लिए भी गहराई से प्रेरित किया।

इरादा पक्का हो तो संसाधन खुद जुट जाते हैं: भगवती बल्दवा
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण इक्सोरियल और कार्तिकेय ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की चेयरपर्सन एवं वरिष्ठ उद्योगपति भगवती बल्दवा रहीं। उन्होंने युवाओं के साथ सफलता के वे मूल मंत्र साझा किए जो किताबी ज्ञान से परे, उनके ज़मीनी अनुभव और जीवन के कड़े संघर्षों का निचोड़ थे। छात्रों को उन्होंने हमेशा बड़ा सोचने, छोटी शुरुआत करने और बिना समय गंवाए तुरंत फैसले लेने का महत्वपूर्ण सूत्र दिया। युवा अक्सर व्यापार शुरू करने के लिए संसाधनों की कमी की शिकायत करते हैं, इस पर बल्दवा ने दृढ़तापूर्वक कहा, “अगर आप में खुद पर भरोसा है, नीयत साफ है और इरादा लोहे की तरह पक्का है, तो संसाधनों की कमी कभी आपकी राह का रोड़ा नहीं बन सकती। संसाधन जुटाए जा सकते हैं, लेकिन जुनून आपके भीतर से ही आना चाहिए।”
राजस्थान की मिट्टी में छिपा है अदम्य साहस और अनंत संभावनाएं
अपने उद्बोधन में भगवती बल्दवा अपनी जड़ों को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “राजस्थान मेरे लिए सिर्फ एक राज्य नहीं है; यह एक जीवंत संस्कृति, एक अटूट साहस और एक ऐसी अमिट पहचान है, जो मेरे खून में बहती है। आज भी मुझे उस माटी की याद सबसे ज्यादा आती है जिसने मुझे गढ़ा है।” उन्होंने छात्रों को अपने संस्कारों, परिवार और समाज के महत्व के प्रति सचेत करते हुए बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में बिताए बचपन और युवावस्था के दिनों ने उन्हें जीवन की सबसे बड़ी सीख दी—चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, अपनी जड़ों को कभी मत भूलो। उन्होंने युवाओं को राजस्थान के भविष्य की एक नई तस्वीर दिखाई। बल्दवा ने कहा कि आज का राजस्थान केवल इतिहास और किलों तक सीमित नहीं, बल्कि यह भविष्य की अपार संभावनाओं का एक विशाल आर्थिक केंद्र बन चुका है। धरती के गर्भ में छिपे ज़िंक, चांदी, तांबा, पोटाश जैसे खनिजों से लेकर बाड़मेर-जैसलमेर के तेल और गैस भंडार इस प्रदेश की नई आर्थिक रीढ़ बन रहे हैं। और जिस तीखी धूप को कभी यहाँ की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था, वही आज सबसे बड़ी ताकत बनकर देश को ग्रीन एनर्जी की दिशा में ले जाने वाला सोलर स्टेट बन गई है।

पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार – इक्सोरियल की वैश्विक यात्रा
अपने पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक शानदार उदाहरण देते हुए बल्दवा ने अपनी कंपनी इक्सोरियल की यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे राजस्थान की शुष्क किंतु उर्वर जलवायु ने यहाँ की जड़ी-बूटियों, विशेषकर अश्वगंधा को एक अद्वितीय शक्ति और गुणवत्ता प्रदान की है। “हमने राजस्थान की इसी मिट्टी और अश्वगंधा की उस शक्ति को पहचाना, जिसकी आज दुनिया को सख्त जरूरत है। पारंपरिक ज्ञान पर्याप्त नहीं था, इसलिए हमने भारतीय उत्पादों को एक ठोस वैज्ञानिक और रिसर्च आधारित एप्रोच दी। आज इक्सोरियल के माध्यम से हम इस अनमोल आयुर्वेदिक धरोहर को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचा रहे हैं। इसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कर चुके हैं।” उन्होंने युवाओं को समझाया कि एक सच्चा लीडर वह है जो टीम वर्क को प्राथमिकता दे, सबको साथ लेकर चले और कामयाबी के लिए शॉर्टकट न ढूंढे। लगातार प्रयास, धैर्य, अनुशासन और काम के प्रति ईमानदारी ही शिखर तक ले जाने का मार्ग है।

AI और डिजिटल क्रांति: चुनौती नहीं, अवसरों का नया द्वार
कार्यक्रम में इंडिलिंक्स न्यूज़लैब के फाउंडर मुकेश सैनी ने भविष्य की चुनौतियों, डिजिटल क्रांति और युवाओं की भूमिका पर विचार रखे। सैनी ने छात्रों के भीतर उस डर को खत्म करने का प्रयास किया जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक को लेकर उनके मन में बसा है। उन्होंने ऊर्जावान लहज़े में कहा, “आज का युवा इस दुविधा में है कि क्या एआई और तकनीक उनके रोज़गार छीन लेंगे? सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। तकनीक कभी आपके अवसर कम नहीं करती, बल्कि वह काम करने के नए, असीमित और ग्लोबल अवसर पैदा करती है।” उन्होंने विस्तार से समझाया कि जो लोग तकनीक को अपना साथी बना लेंगे, वे भविष्य के लीडर होंगे और जो इससे डरेंगे, वे पीछे छूट जाएंगे।
मानवीय संवेदनाओं का सम्मान ही सच्ची प्रगति है
कार्यक्रम में जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (डिजिटल स्ट्रेटेजीज) धीमांत अग्रवाल और रजिस्ट्रार एस.एल. अग्रवाल ने आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. सोनू पारीक (एचओडी-कैमिस्ट्री) और जेइसीआरसी 90.8 एफएम के स्टेशन मैनेजर पंडित अमनदीप (असिस्टेंट प्रोफेसर) ने युवाओं से सीधा संवाद किया। समस्त वक्ताओं ने मिलकर युवाओं को यह विशेष संदेश दिया कि वे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के भ्रम से बाहर निकलें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि समाज में नारी के अथक परिश्रम और उनके नेतृत्व का सम्मान करना हमारी पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन चाहे कितने भी ऊंचे मुकाम पर पहुँच जाए, लेकिन मानवीय संवेदनाओं, दया और संस्कारों के बिना वह अधूरा और निरर्थक है।





