मेघालय के घने और दुर्गम जंगलों के बीच, सिलीगुड़ी कॉरिडोर की वह संवेदनशील संकरी पट्टी जिसे भारत की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है, अचानक एक बड़े सैन्य केंद्र में तब्दील हो गई है। बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा के ठीक सामने स्थित इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में, जहाँ पहले शांति थी, वहाँ अब अत्याधुनिक हथियारों की गूँज सुनाई दे रही है। भारतीय सेना की कमान के तहत यहाँ कई शक्तिशाली देशों की सेनाएं एक साथ जुटी हैं, जो भारत के प्रति वैश्विक समर्थन और सामरिक मजबूती का संकेत दे रही हैं।
रणनीतिक रूप से बेहद जटिल इस इलाके में भारतीय सेना के साथ दुनिया के 12 अन्य देशों के खतरनाक कमांडोज ने अपना डेरा जमा लिया है। उमरोई मिलिट्री स्टेशन की जमीन पर जब इन अलग-अलग देशों के सैनिकों ने कदम रखा, तो इसकी धमक चीन से लेकर बांग्लादेश तक महसूस की गई। इन दुर्गम पहाड़ियों में छिपे सैन्य मिशन की गहराई को समझ पाना अब पड़ोसी देशों के रणनीतिकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
बिना किसी शोर-शराबे के रातों-रात 400 से अधिक विदेशी और भारतीय सैनिकों का यह एकत्रीकरण कोई साधारण ड्रिल नहीं है। यह एक ऐसा अभूतपूर्व और ‘साइलेंट ऑपरेशन’ है जिसने दक्षिण एशिया के कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
बांग्लादेश बॉर्डर पर जारी अस्थिरता के बीच, 13 देशों की टॉप सेनाओं को एक साथ उतारने के पीछे भारत का मुख्य उद्देश्य क्या है? क्या मेघालय के इन दलदली और अनजान जंगलों में किसी गुप्त अंतरराष्ट्रीय मिशन का ब्लू प्रिंट तैयार हो रहा है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत भविष्य के किसी बड़े खतरे से निपटने के लिए एक ‘ग्लोबल आर्मी फ्रंट’ तैयार कर रहा है, जो भारत के एक इशारे पर किसी भी घुसपैठिए को खत्म करने की क्षमता रखेगा।
इन सभी सवालों के जवाब उस स्थान में छिपे हैं जिसे इस महा-अभ्यास के लिए चुना गया है—उमरोई मिलिट्री स्टेशन। सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित यह जगह केवल एक सैन्य छावनी नहीं, बल्कि एक अचूक ‘चोक पॉइंट’ है, जहाँ से पूरे पूर्वोत्तर (North East) की पहाड़ियों और नदियों पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
बांग्लादेश में जारी अराजकता के बीच इस नाजुक इलाके में 13 देशों के सैनिकों की मौजूदगी भारत का दुनिया को एक स्पष्ट संदेश है। भारत ने यह दिखा दिया है कि उसकी सीमाओं के पास अब कोई भी बाहरी ताकत अपनी मनमर्जी नहीं चला सकती। भारत की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।
मेघालय के जंगलों में ‘एक्सरसाइज प्रगति’ के नाम से शुरू हुए इस अभ्यास ने विदेशी रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। यह केवल सैनिकों का दौड़ना-भागना नहीं है, बल्कि एक ऐसा बहुराष्ट्रीय गठबंधन है जहाँ भारत अपने मित्र देशों को सिखा रहा है कि कठिन परिस्थितियों में दुश्मन की चालाकियों को कैसे नाकाम किया जाए।
जब अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों के 400 से अधिक कमांडो अत्याधुनिक हथियारों के साथ इन जंगलों में उतरते हैं, तो वह दृश्य किसी हॉलीवुड थ्रिलर जैसा लगता है। लेकिन इस अभ्यास के पीछे की असली हकीकत और प्लानिंग कहीं अधिक चौंकाने वाली है।
आज के दौर में जब सीमा पार घुसपैठ और साइबर खतरों के तरीके बदल रहे हैं, तब कोई भी देश अकेले हर मोर्चे पर नहीं लड़ सकता। भारत के रणनीतिकारों ने इसे समझते हुए ही अलग-अलग देशों की सेनाओं को एक मंच पर लाकर एक ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ मॉडल तैयार किया है।
इंटरऑपरेबिलिटी का मतलब है एक ऐसा तंत्र जहाँ अलग-अलग भाषाओं और हथियारों वाले सैनिक युद्ध के मैदान में सिर्फ एक इशारे पर एक साथ काम कर सकें।
कल्पना कीजिए, एक फ्रांसीसी स्नाइपर को भारतीय जवान कवर दे रहा हो और उन्हें किसी तीसरे देश का ऑफिसर कमांड दे रहा हो। क्या ये 13 देश भविष्य में किसी बड़े संकट में एक साथ सैन्य कार्रवाई कर पाएंगे? इस अभ्यास को देखते हुए इसका उत्तर ‘हाँ’ में मिलता है।
ब्रिगेडियर मयूर ने इस ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए ‘सुरक्षित और स्थिर क्षेत्र’ (Secure and Stable Region) का जिक्र किया। उनके इस बयान में एक बहुत बड़ा कूटनीतिक संदेश छिपा है।
यह सीधा संदेश उन ताकतों के लिए है जो भारत के पड़ोस में अस्थिरता फैलाकर उसे घेरने का सपना देखते हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने पड़ोस में शांति भंग करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा।
सैनिकों को यहाँ जिस भट्टी में तपाया जा रहा है, उसका नाम है—72 घंटे का फाइनल सर्वाइवल मिशन। यह मिशन इतना कठिन है कि अनुभवी कमांडोज के भी पसीने छूट जाएं।
लगातार तीन दिन और रात, बिना किसी बाहरी मदद और सीमित राशन के, सैनिकों को जहरीले कीड़ों और जंगली जानवरों के बीच इन घने जंगलों में अपना सीक्रेट टारगेट पूरा करना है।
इस दौरान उन्हें मिश्रित टीमों (Mixed Teams) में बांटा गया है—जैसे एक ही टीम में भारतीय, फ्रांसीसी और जापानी सैनिक। रणनीति साफ है: युद्ध में साथी का देश या भाषा मायने नहीं रखती, बल्कि आपसी तालमेल और भरोसा मायने रखता है।
यह 72 घंटे का मिशन इस बात का लिटमस टेस्ट है कि क्या अलग-अलग देशों की सेनाएं एक सिंगल कमांड के तहत एक मजबूत इकाई के रूप में काम कर सकती हैं।
इस अभ्यास में आईईडी (IED) डिफ्यूजिंग और हेलीबोर्न ऑपरेशंस जैसी आधुनिक युद्ध तकनीकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
घुसपैठिए अक्सर जंगलों में आईईडी का इस्तेमाल करते हैं। विदेशी सैनिकों को यहाँ सिखाया जा रहा है कि भारतीय जवान कैसे अपनी जान जोखिम में डालकर इन छिपे हुए खतरों को पहचानकर उन्हें निष्क्रिय कर देते हैं।
वहीं, हेलीबोर्न ऑपरेशंस के तहत हेलीकॉप्टर से सीधे दुर्गम इलाकों में उतरने की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह तब काम आता है जब दुश्मन किसी ऐसी पहाड़ी पर बैठा हो जहाँ सड़क के रास्ते पहुँचना असंभव हो।
इसे सैन्य भाषा में ‘रॉक क्राफ्ट’ और ‘स्पेशल ड्रॉप’ कहते हैं। भारत और 12 अन्य देश मिलकर रिहर्सल कर रहे हैं कि दुश्मन के इलाके में आसमान से कमांडोज की बारिश कैसे की जाएगी।
हथियारों और बारूद के अलावा, इस अभ्यास में योग और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, जो भारत की अनूठी कूटनीतिक सोच को दर्शाता है।
जब दुनिया के खतरनाक सैनिक एक साथ वॉलीबॉल खेलते हैं या योग करते हैं, तो उनके बीच केवल एक पेशेवर रिश्ता नहीं, बल्कि एक अटूट मानवीय बंधन (Human Bond) बनता है।
भारत इसे ‘म्यूचुअल ट्रस्ट’ कहता है। योग के जरिए मानसिक शांति और फोकस बढ़ने से युद्ध के दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। यह भारत की ‘हार्ड पावर’ और ‘सॉफ्ट पावर’ का एक घातक मेल है।
चीन के बढ़ते प्रभाव और बांग्लादेश की उथल-पुथल के बीच इस अभ्यास की टाइमिंग एक ‘स्ट्रेटेजिक मास्टरस्ट्रोक’ है, जिसने विरोधियों की योजनाओं को विफल कर दिया है।
यह अभ्यास केवल ट्रेनिंग नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन है। भारत ने बिना गोली चलाए दुनिया को बता दिया है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा में उसकी भूमिका सबसे अहम है।
13 देशों को एक झंडे के नीचे देखकर भारत को अस्थिर करने का मौका तलाशने वाले दुश्मनों की चिंता बढ़ना तय है। दुनिया अब भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में देख रही है।
भारतीय सेना का जंगल वॉरफेयर और कॉम्बैट एक्सपीरियंस आज बेजोड़ है। जब अमेरिका और फ्रांस जैसे देश भारत से यह हुनर सीखने आते हैं, तो यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

