कानून से खिलवाड़ और यूपी पुलिस का एक्शन
उत्तर प्रदेश में अब अपराधियों के लिए कोई सेफ जोन नहीं बचा है। जो कानून से खिलवाड़ करेगा, जो किसी बेगुनाह की जान लेगा, उसका अंजाम क्या होगा, यह गाजियाबाद पुलिस ने एक बार फिर पूरी ताकत और साफ नीयत के साथ साबित कर दिया है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में जिस तरह से एक बेखौफ अपराधी ने आतंक फैलाने की कोशिश की, उसका दी एंड उसी के अंदाज में हो गया है। आज हम आपको बताएंगे सूर्या चौहान के हत्यारे असद के एनकाउंटर की पूरी इनसाइड स्टोरी। कैसे एक अपराधी मर्डर करने के बाद अंडरग्राउंड हो जाता है, कैसे वो पुलिस को चकमा देने की प्लानिंग करता है और कैसे पुलिस का इंटेलिजेंस नेटवर्क उसके हर प्लान को मिट्टी में मिला देता है। यह कहानी सिर्फ एक एनकाउंटर की नहीं है, बल्कि यह कहानी है उस सिस्टम की जो अब अपराधियों से दो कदम आगे चलता है।
गाजियाबाद कमिश्नरेट की पुलिस ने साफ मैसेज दे दिया है कि क्राइम करोगे तो छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी। असद, जिस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था, वो पुलिस की गोलियों का निशाना बन गया। लेकिन यह सब अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे पुलिस की दिन रात की मेहनत, सटीक मुखबिर तंत्र और एक फूलप्रूफ प्लानिंग थी। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर खोड़ा में ऐसा क्या हुआ था जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था और कैसे पुलिस ने इस खौफ का खात्मा किया।
28 तारीख का वो दिन और सूर्या चौहान की हत्या
कहानी की शुरुआत होती है 28 तारीख से। गाजियाबाद का खोड़ा कॉलोनी इलाका, जो अपनी घनी आबादी और चहल-पहल के लिए जाना जाता है। आम दिनों की तरह ही वहां जिंदगी चल रही थी, लेकिन तभी एक ऐसी घटना होती है जो पूरे इलाके में दहशत फैला देती है। सूर्या चौहान नाम के एक युवक को सरेआम निशाना बनाया जाता है। असद और उसके साथी सूर्या पर हमला कर देते हैं। सरेआम चाकूबाजी होती है और सूर्या को बुरी तरह लहूलुहान कर दिया जाता है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच जाती है। लोग खौफ में आ जाते हैं।
सूर्या को तुरंत अस्पताल ले जाया जाता है। परिवार वाले उसकी जान बचने की दुआ कर रहे थे, डॉक्टर्स अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान सूर्या चौहान जिंदगी की जंग हार जाता है और उसकी डेथ हो जाती है। एक नौजवान की जान चली जाती है और एक परिवार हमेशा के लिए उजड़ जाता है। इसके बाद परिजनों की तरफ से पुलिस में तहरीर दी जाती है। गाजियाबाद पुलिस बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत एक्शन मोड में आती है। तत्काल मुकदमा पंजीकृत किया जाता है और इस मर्डर केस में पांच लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया जाता है।
पुलिस का शिकंजा और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस को अच्छी तरह पता था कि अगर अपराधियों को जरा भी मोहलत मिली, तो वो शहर छोड़कर फरार हो जाएंगे या सबूतों को मिटा देंगे। इसलिए पुलिस की कई टीमें तुरंत ग्राउंड पर उतार दी गईं। सर्विलांस और मुखबिर नेटवर्क को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया गया। इस ताबड़तोड़ एक्शन का रिजल्ट भी तुरंत सामने आया। पुलिस ने मर्डर में शामिल पांच में से तीन आरोपियों को कुछ ही घंटों के अंदर धर दबोचा। लेकिन इस पूरे खूनी खेल का मास्टरमाइंड, मुख्य आरोपी असद अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। वह फरार हो चुका था और अंडरग्राउंड होकर पुलिस के हर मूवमेंट को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा था।
सिस्टम ने भी असद को पकड़ने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। कमिश्नरेट गाजियाबाद की तरफ से असद पर 50 हजार रुपये के इनाम की घोषणा कर दी गई। यह पुलिस की तरफ से एक ओपन डिक्लेरेशन था कि असद अब मोस्ट वांटेड है और उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दिल्ली-एनसीआर से लेकर यूपी के कई जिलों में लगातार छापेमारी कर रही थीं। असद को लग रहा था कि वो कानून की लंबी पहुंच से बच निकलेगा, लेकिन यहीं उसने पुलिस के डिटरमिनेशन को अंडरएस्टिमेट कर दिया।
असद का मास्टरप्लान और पैसों की जरूरत
अब आते हैं उस प्लानिंग पर जो असद अपने बचाव के लिए कर रहा था। हत्या के बाद जब असद अंडरग्राउंड हुआ, तो उसे समझ आ गया था कि गाजियाबाद में छिपना अब मुमकिन नहीं है। पुलिस का प्रेशर हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ता जा रहा था। उसके तमाम ठिकाने रडार पर थे। उसे शहर छोड़कर बहुत दूर भागना था, किसी ऐसी जगह जहां पुलिस उस तक ना पहुंच सके। लेकिन भागने के लिए सबसे जरूरी चीज थी पैसा।
फरारी काटने के लिए कैश की जरूरत होती है और असद के पास कैश खत्म हो चुका था। वो अपने गुर्गों और करीबियों से लगातार कांटेक्ट करने की कोशिश कर रहा था। यही वो पॉइंट था जहां अपराधी गलती करता है और पुलिस का जाल कसने लगता है। असद ने एक बेहद रिस्की प्लान बनाया। उसने तय किया कि वो पैसे लेने के लिए वापस खोड़ा कॉलोनी आएगा। उसे लगा कि पुलिस उसे शहर से बाहर ढूंढ रही होगी और वो गुपचुप तरीके से खोड़ा आकर अपना काम निकालकर निकल जाएगा। लेकिन असद यह भूल गया था कि पुलिस का मुखबिर तंत्र सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड की हर छोटी-बड़ी हरकत पर नजर रखता है।
इंटेलिजेंस और कॉम्बिंग ऑपरेशन
जैसे ही असद ने अपने किसी लोकल कांटेक्ट से पैसों के लिए अरेंजमेंट किया, पुलिस के रडार पर बीप बज उठी। पुलिस की इंटेलिजेंस टीम को पुख्ता जानकारी मिल गई कि असद किसी भी वक्त खोड़ा में एंट्री ले सकता है। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने जो जाल बिछाया, वो अपराधियों के लिए एक केस स्टडी है। पुलिस ने कोई जल्दबाजी नहीं की। पूरे खोड़ा इलाके और उसके आस-पास के सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स को सील कर दिया गया।
लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। पुलिस की गाड़ियां, सिविल ड्रेस में तैनात जवान और हर चौराहे पर बैरियर लगाकर सघन चेकिंग अभियान चला दिया गया। रात के अंधेरे में पुलिस की पैनी नजरें हर आने-जाने वाले वाहन को स्कैन कर रही थीं। पुलिस को यह भी इनपुट था कि असद अकेला नहीं है, बल्कि उसका एक साथी भी उसके साथ हो सकता है। ऐसे में हर टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर की बारीकी से जांच हो रही थी। पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो चुका था।
वसुंधरा से एंट्री और आमना-सामना
और फिर वो वक्त आ गया जब पुलिस का और असद का आमना-सामना होना था। चेकिंग के दौरान पुलिस की एक टीम को वसुंधरा की तरफ से एक संदिग्ध बाइक आती हुई दिखाई दी। उस बाइक पर दो लोग सवार थे। पुलिस को उनके हाव-भाव और मूवमेंट से तुरंत शक हो गया कि ये वही लोग हो सकते हैं जिनकी तलाश पूरे शहर की पुलिस कर रही है। पुलिस टीम ने बैरियर के पास उन्हें रुकने का इशारा किया।
लेकिन असद को समझ आ गया था कि वो अब घिर चुका है। उसे पता था कि अगर वो रुका तो सीधा सलाखों के पीछे जाएगा और जिंदगी भर बाहर नहीं आ पाएगा। एक खूंखार अपराधी की तरह उसने सरेंडर करने के बजाय कानून से टकराने का फैसला किया। पुलिस को देखते ही असद और उसके साथी ने बाइक की स्पीड तेज करने की कोशिश की और पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। उनका मकसद था पुलिस वालों को घायल करके या दहशत फैलाकर वहां से किसी तरह से भाग निकलना।
जवाबी कार्रवाई और असद का अंत
लेकिन सामने यूपी पुलिस थी। पुलिस टीम ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत पोजीशन ली। अपराधियों की तरफ से आ रही गोलियों के बीच पुलिस ने सेल्फ डिफेंस में और अपराधियों को न्यूट्रलाइज करने के लिए जवाबी फायरिंग की। दोनों तरफ से गोलियां चलीं। इस क्रॉस फायरिंग में पुलिस की एक गोली मुख्य आरोपी असद को जा लगी। गोली लगते ही असद बाइक से नीचे गिर पड़ा और बुरी तरह से घायल हो गया।
असद के गिरते ही उसका दूसरा साथी, जो बाइक चला रहा था या पीछे बैठा था, वो मौके का फायदा उठाकर अंधेरे में भागने में कामयाब हो गया। पुलिस ने असद को तुरंत अपने कब्जे में लिया। उसे उसी वक्त घायल अवस्था में पास के अस्पताल में ले जाया गया ताकि उसकी जान बचाकर उसे कानून के सामने पेश किया जा सके। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर्स ने जांच के बाद असद को मृत घोषित कर दिया।
मौके से पुलिस को वो बाइक और एक कंट्री मेड पिस्टल भी बरामद हुई है जिससे पुलिस पर फायरिंग की गई थी। अब पुलिस की कई टीमें असद के उस साथी की तलाश में जुटी हैं जो मौके से फरार हो गया था। पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसे भी उसके किए की सजा मिलेगी।
न्याय और पुलिस का साफ मैसेज
यह एनकाउंटर सिर्फ एक अपराधी का अंत नहीं है। यह सूर्या चौहान के परिवार के लिए इंसाफ की पहली सीढ़ी है। जिस बेटे को उन्होंने खोया, उसकी भरपाई तो कोई नहीं कर सकता, लेकिन सिस्टम ने जिस तेजी से काम किया है, वो समाज में कानून के प्रति भरोसे को मजबूत करता है। पांच में से तीन आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं, मास्टरमाइंड का अंत हो चुका है और आखिरी बचे आरोपी की भी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
इस पूरी घटना ने एक बात तो पूरी तरह से साफ कर दी है कि अब क्राइम करके आप छिप नहीं सकते। कोई भी अपराधी, चाहे वो कितना भी शातिर क्यों ना हो, कानून के हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं। गाजियाबाद पुलिस का यह एक्शन उन तमाम असामाजिक तत्वों के लिए एक बहुत बड़ा अलर्ट है जो सोचते हैं कि वो कानून को अपने जूतों की नोक पर रख सकते हैं। पुलिस अब डिफेंसिव नहीं, बल्कि पूरी तरह से ऑफेंसिव मोड में काम कर रही है। पब्लिक की सुरक्षा के लिए और शहर में लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, वो उठाए जाएंगे।
सूर्या चौहान के हत्यारों को उनके किए की सजा मिल रही है और आम जनता को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस चौबीसों घंटे, सातों दिन मुस्तैद है। खोड़ा का यह एनकाउंटर पुलिस की इसी मुस्तैदी और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का सबसे बड़ा सबूत है।





