भारत और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इस समय तनाव का माहौल चरम पर है। देश के भीतर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने के भारत सरकार के सख्त रुख ने सीमा पार के आकाओं में खलबली मचा दी है। हमारी सुरक्षा एजेंसियां पूरी रणनीति के साथ घुसपैठियों को सीमा पार भेज रही हैं, लेकिन बांग्लादेश अपने ही नागरिकों को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है। इसी हताशा में बांग्लादेश के भीतर भारत के खिलाफ एक खतरनाक साजिश को अंजाम दिया जा रहा है, जिसका लक्ष्य सीमा पर अशांति फैलाना और भारत की संप्रभुता को चुनौती देना है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) इस उकसावे वाली कार्रवाई को लेकर हाई अलर्ट पर है। आखिर जब भारत कानूनी प्रक्रिया के तहत अवैध प्रवासियों को वापस भेज रहा है, तो बांग्लादेश इस पर अड़ंगा क्यों लगा रहा है? ढाका में किस तरह की रणनीति तैयार की जा रही है जिससे सीमा पर टकराव की आशंका बढ़ गई है?
कट्टरपंथी ताकतों का भारत विरोधी अभियान
यह विवाद तब और गहरा गया जब बांग्लादेश की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और 11 अन्य विपक्षी दलों ने सीमा पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। इसमें नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी शामिल है, जो शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलनों से उभरी है। इन दलों का आरोप है कि भारत जबरन लोगों को सीमा पार धकेल रहा है। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने घोषणा की है कि 12 जून को सीमावर्ती जिलों में रैलियां की जाएंगी और 15 जून को ढाका में बड़ा शक्ति प्रदर्शन होगा। सीमा पर इतनी बड़ी भीड़ का इकट्ठा होना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है, जिससे निपटने के लिए भारतीय बल पूरी तरह तैयार हैं।
‘पुश-इन’ का दुष्प्रचार और भारतीय पक्ष की वास्तविकता
बांग्लादेशी राजनीति में आजकल ‘पुश-इन’ शब्द का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए किया जा रहा है। वे आरोप लगा रहे हैं कि भारत बिना वजह लोगों को उनकी सीमा में भेज रहा है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि भारत केवल उन लोगों की पहचान कर रहा है जो बिना वैध दस्तावेजों के यहां रह रहे हैं। भारत सरकार और बीएसएफ किसी निर्दोष को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि केवल अवैध घुसपैठियों को बाहर कर रहे हैं जो संसाधनों पर अवैध कब्जा किए हुए हैं। बांग्लादेशी दल इस सच्चाई को दबाकर जनता को भारत के खिलाफ भड़काने की राजनीति कर रहे हैं।
जीरो लाइन पर ‘ह्यूमन शील्ड’ की खतरनाक योजना
हालात को और बिगाड़ने के लिए नेशनल सिटिजन पार्टी ने सीमावर्ती इलाकों के लोगों से ‘ह्यूमन शील्ड’ या मानव ढाल बनने की अपील की है। उनकी योजना है कि जब बीएसएफ अवैध नागरिकों को वापस भेजे, तो वहां के लोग दीवार बनकर खड़े हो जाएं। इससे घुसपैठियों और अपराधियों को बचाने की कोशिश की जा रही है ताकि भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर महिलाओं और बच्चों को ढाल बनाना एक गैर-जिम्मेदाराना हरकत है। बीएसएफ के जवान इस उकसावे और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति और भारत विरोध
इस साजिश के पीछे बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति भी एक बड़ा कारण है। जमात-ए-इस्लामी और अन्य सहयोगी दल वहां की वर्तमान सरकार को भारत के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए निशाना बना रहे हैं। ये दल चुनावों से पहले भारत विरोधी भावनाओं को भड़काकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहते हैं। ढाका में सत्ता के करीब पहुंचने के लिए भारत विरोध को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और डिपोर्टेशन के कानूनी मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
भ्रम फैलाने के लिए फर्जी आंकड़े भी जारी किए जा रहे हैं। पूर्व सांसद एएचएम हमीदुर रहमान आजाद ने दावा किया है कि पिछले तीन महीनों में हजारों लोगों को सीमा पार भेजने की कोशिश की गई है। इन भ्रामक दावों का एकमात्र उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करना है, लेकिन भारत इन धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है।
नई दिल्ली का सख्त रुख और बीजीबी की निष्क्रियता
भारत ने बांग्लादेश के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से सीमा पार नहीं भेज रहा है। जो भी विदेशी नागरिक बिना दस्तावेजों के पकड़ा जाएगा, उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही वापस भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच हुए आपसी समझौतों के अनुरूप है।
हाल ही में बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में भारत ने दो-टूक शब्दों में कहा कि बांग्लादेश को अपने नागरिकों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। बीएसएफ जब सबूतों के साथ अवैध नागरिकों को सौंपने जाती है, तो बीजीबी कागजी कार्रवाई में जानबूझकर देरी करती है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अवैध प्रवासियों को अनिश्चितकाल के लिए अपने देश में रखने का इच्छुक नहीं है।
‘ऑपरेशन डिपोर्टेशन’: बंगाल और असम में तेज कार्रवाई
पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध प्रवासियों की पहचान का अभियान तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन के हस्तांतरण जैसी रणनीतियों पर काम चल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, केवल पश्चिम बंगाल से ही करीब 4800 अवैध प्रवासियों को कानूनी औपचारिकताओं के बाद वापस भेजा जा चुका है, जबकि 836 अन्य लोगों की प्रक्रिया जारी है। इतनी बड़ी संख्या में वापसी के कारण बांग्लादेशी तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है।
अभेद्य सुरक्षा और भारत की चेतावनी
भारत और बांग्लादेश के बीच की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा को सील करने के लिए हाई-टेक गैजेट्स, ड्रोन और स्मार्ट फेंसिंग का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, उन्मादी भीड़ द्वारा ‘मानव ढाल’ का उपयोग करना एक गंभीर चुनौती है।
यदि जून में प्रस्तावित ये प्रदर्शन उग्र होते हैं और सीमा की ओर बढ़ते हैं, तो भारत इसका कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है। बीएसएफ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सीमा की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। यह बीजीबी की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों को सीमा से दूर रखे। यदि वे स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं, तो भारतीय जवान अपनी आत्मरक्षा और देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक कठोर कदम उठाने में संकोच नहीं करेंगे।

