विश्व मानचित्र पर एक ऐसा देश जो दशकों से भारत के खिलाफ आतंकवाद का सहारा ले रहा था, आज वही देश पानी की एक-एक बूंद के लिए वैश्विक मंचों पर गिड़गिड़ाने को मजबूर है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी हुक्मरानों की बेबसी साफ झलक रही है, क्योंकि भारत ने दोटूक शब्दों में कह दिया है कि ‘पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते’। आतंकवाद को अपनी राजकीय नीति मानने वाले पाकिस्तान को भारत ने अब तक का सबसे कड़ा सबक सिखाया है। वर्षों से जिस सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) का फायदा पाकिस्तान उठाता आ रहा था, भारत द्वारा उसे निलंबित किए जाने से पड़ोसी देश की कमर टूट गई है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसन इकबाल का बयान उनकी लाचारी और डर की कहानी खुद बयां कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के इस कदम से पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का जीवन संकट में है, लेकिन वे यह भूल गए कि जब वे भारत में निर्दोषों का खून बहा रहे थे, तब अंजाम की चिंता क्यों नहीं की?
आतंकवाद पर भारत का प्रहार
इस घटनाक्रम की जड़ें पिछले साल की उस कायराना आतंकी घटना में हैं जिसने भारत के धैर्य की परीक्षा ली थी। पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने मासूम पर्यटकों की चुन-चुनकर हत्या कर दी थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने निर्णय लिया कि अब केवल निंदा से काम नहीं चलेगा। मई में पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद, भारत ने सबसे बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का फैसला किया। यह एक ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ था जिसने पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी। भारत का यह कड़ा स्टैंड नए भारत की उस संकल्पशक्ति का प्रतीक है, जहां नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
पाकिस्तान की लाइफलाइन पर संकट
आज पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र में रोना रो रहा है कि सिंधु नदी तंत्र उसकी जीवनरेखा है। अहसन इकबाल के अनुसार, पाकिस्तान की 90% खेती और 30% बिजली इसी पानी पर निर्भर है। वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत की उदारता का गलत फायदा उठाया। 1960 के समझौते के तहत रावी, ब्यास और सतलुज का नियंत्रण भारत को मिला था, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया था। भारत ने वर्षों तक अपने हिस्से का पूरा पानी भी इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन जब बदले में सिर्फ आतंक मिला, तो भारत ने अपनी रणनीति बदल दी। अब भारत पश्चिमी नदियों पर तेजी से बांध और जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है, जिससे पाकिस्तान को अपने वजूद का डर सताने लगा है।
डेटा ब्लॉक होने से बढ़ी मुश्किलें
संधि निलंबन का सबसे तत्काल प्रभाव पाकिस्तान के कृषि और मौसम विभाग पर पड़ा है। भारत ने नदियों के बहाव से संबंधित ‘हाइड्रोलॉजिकल डेटा’ साझा करना बंद कर दिया है। इस डेटा के बिना पाकिस्तान के लिए बाढ़ की पूर्व चेतावनी देना या फसलों की योजना बनाना असंभव हो गया है। इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तानी अधिकारियों को भारतीय जल परियोजनाओं के निरीक्षण की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया है। डेटा की कमी और निरीक्षण पर रोक से बौखलाया पाकिस्तान इसे ‘युद्ध जैसी कार्रवाई’ बता रहा है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा संदेश
पाकिस्तान ने वैश्विक मंच पर इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया, लेकिन भारत की मजबूत कूटनीति के सामने उसके दावे टिक नहीं सके। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और अपरिवर्तनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि निलंबित रहेगी। भारत ने दुनिया को जता दिया है कि आतंक और शांति की संधियां साथ-साथ नहीं चल सकतीं। आज पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ चुका है और उसके पास भारत के इस रणनीतिक प्रहार का कोई जवाब नहीं है। 24 करोड़ जनता की दुहाई देने वाला पाकिस्तान दरअसल अपने ही बिछाए आतंकवाद के जाल में फंस गया है।

