पाकिस्तान में ‘रहस्यमयी’ ड्रोन हमला: क्या अफगानिस्तान ने लिया पुराना बदला?

पाकिस्तान में 'रहस्यमयी' ड्रोन हमला: क्या अफगानिस्तान ने लिया पुराना बदला?

सोचिए, रात का गहरा अंधेरा हो, आसमान से अचानक मौत बरसे और अगले ही पल एक ऐसा जोरदार धमाका हो जो सिर्फ जमीन ही नहीं, बल्कि एक पूरे मुल्क की मिलिट्री इस्टैब्लिशमेंट की रातों की नींद उड़ा दे। जिस देश ने दशकों तक आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी की तरह पाला-पोसा और इस्तेमाल किया, आज वही देश दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है कि उसके ऊपर ड्रोन्स से भयानक हमले हो रहे हैं। लेकिन असली हैरानी इन हमलों पर नहीं है। हैरानी उस इल्जाम पर है जो इसके बाद पूरी दुनिया के सामने रोते हुए लगाया गया। क्या कोई देश किसी दूसरे देश को दवाइयों के डिब्बे में भरकर खतरनाक और विशालकाय ड्रोन्स भेज सकता है। क्या ह्यूमैनिटेरियन एड की आड़ में एक ऐसा डेडली पेलोड डिलीवर किया जा सकता है जो सीधे दुश्मन की कमर तोड़ दे। और सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इस पूरे स्ट्रेटेजिक गेम के पीछे कोई ऐसा मास्टरमाइंड है जो बिना एक भी गोली चलाए, अपने सबसे बड़े दुश्मन को उसी के बिछाए जाल में बुरी तरह फंसा रहा है। आज हम एक ऐसे जियोपॉलिटिकल ऑपरेशन का पर्दाफाश करेंगे जो किसी ब्लॉकबस्टर स्पाई थ्रिलर से कम नहीं है।

यह पूरी कहानी शुरू होती है एक बेहद ही अजीबोगरीब और चौंकाने वाले बयान से, जो हाल ही में सामने आया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक टेलीविजन इंटरव्यू में बैठते हैं और उनके चेहरे की बौखलाहट साफ बता रही होती है कि हालात पाकिस्तानी सेना के कण्ट्रोल से पूरी तरह बाहर जा चुके हैं। वो खुलेआम दुनिया के सामने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हैं। उनका कहना है कि भारत ने अफगानिस्तान को जो मानवीय सहायता यानी ह्यूमैनिटेरियन एड भेजी है, उसी के अंदर छिपाकर घातक ड्रोन्स भी भेजे गए हैं। उनके मुताबिक, भारत ने अफगानिस्तान को दवाइयों के डिब्बों में ड्रोन्स पैक करके दिए और फिर अफगान तालिबान ने उन्हीं ड्रोन्स का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में बमबारी कर दी। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री यहां तक कहते हैं कि भारत ये काम छिपकर नहीं बल्कि खुलेआम कर रहा है। अब जरा इस स्टेटमेंट की गहराई को समझिए। एक न्यूक्लियर आर्म्ड देश का रक्षा मंत्री, अपनी ही जनता के सामने अपनी मिलिट्री इंटेलिजेंस की नाकामी छुपाने के लिए एक ऐसी कॉन्सपिरेसी थ्योरी गढ़ रहा है जो सुनने में बिल्कुल बेतुकी और हास्यास्पद लगती है।

लेकिन असली सवाल यहां से शुरू होता है कि आखिर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अचानक ऐसा बेतुका बयान दिया ही क्यों। इसके पीछे की क्रोनोलॉजी को समझना बहुत जरूरी है। दरअसल हुआ ये कि भारत ने पिछले हफ्ते ही अफगानिस्तान के बेगुनाह लोगों के लिए पांच टन जरूरी दवाइयों की एक बहुत बड़ी खेप काबुल भेजी थी। भारत पिछले कई सालों से लगातार अफगानिस्तान को गेहूं, मेडिकल इक्विपमेंट और वैक्सीन जैसी मानवीय सहायता भेजता आ रहा है। इसमें कोई नई बात नहीं थी। लेकिन इस बार भारत की दवाइयां काबुल पहुंचने के ठीक एक दिन बाद, पाकिस्तान के अंदर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर रहस्यमयी ड्रोन हमले हो गए। इन हमलों की सटीकता और टाइमिंग इतनी जबरदस्त थी कि पाकिस्तानी सेना पूरी तरह से शॉक में आ गई। उन्होंने तुरंत अपनी विफलता को छिपाने के लिए इन दोनों अलग अलग घटनाओं को एक साथ जोड़ दिया और एक नैरेटिव तैयार कर लिया कि भारत की दवाइयों वाली फ्लाइट में ही वो ड्रोन्स आए थे। अगर आप इसे लॉजिस्टिक्स के नजरिए से देखें, तो 15 से 20 किलो भारी और 3 मीटर विंगस्पैन यानी पंखों के फैलाव वाले ड्रोन्स को दवाइयों के छोटे कार्टन्स में छिपाकर कमर्शियल या कार्गो फ्लाइट्स के जरिए भेजना पूरी तरह से असंभव है। असल में, पाकिस्तान यह बेतुका आरोप अपनी खीज मिटाने के लिए लगा रहा है, क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा कि उसके पाले हुए तालिबान ने इतनी आधुनिक तकनीक हासिल कैसे कर ली।

गेम असल में कहीं और ही चल रहा है। पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। उसकी इकॉनमी पूरी तरह से कोलैप्स हो चुकी है, लेकिन उससे भी बड़ा खतरा उसकी इंटरनल सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के लिए पैदा हो गया है। डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच आए दिन भारी गोलीबारी और तोपखाने से हमले हो रहे हैं। पाकिस्तानी एयरफोर्स ने बौखलाहट में काबुल और कंधार के कुछ रिहायशी इलाकों पर एयरस्ट्राइक भी की, जिसके जवाब में तालिबान ने अपने स्नाइपर्स और अब ड्रोन्स के जरिए पाकिस्तान के बॉर्डर पोस्ट्स को तबाह करना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ बलूचिस्तान में बलूच विद्रोही गुट और खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी ने पाकिस्तानी फौज की नाक में दम कर रखा है। उनके बड़े अफसर और जवान रोज मारे जा रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तानी अवाम अपनी ही आर्मी से तीखे सवाल पूछ रही है कि आखिर उनकी करोड़ों का बजट डकारने वाली खुफिया एजेंसियां कर क्या रही हैं। इसी भारी पब्लिक प्रेशर से बचने के लिए पाकिस्तान ने हमेशा की तरह अपना पुराना और घिसा पिटा कार्ड खेला और सारा दोष भारत के मत्थे मढ़ दिया।

भारत अफगानिस्तान में ड्रोन्स भेज रहा है या नहीं, ये तो विशुद्ध रूप से एक पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा है। लेकिन भारत वहां जो असल में कर रहा है, वो पाकिस्तान के लिए किसी खौफनाक सपने से कम नहीं है। साल 2021 में जब काबुल पर तालिबान का कब्जा हुआ था, तब पाकिस्तान की सड़कों पर जश्न मनाया गया था। पाकिस्तान की आईएसआई के पूर्व चीफ फैज हमीद काबुल में चाय पीते और मुस्कुराते नजर आए थे। उन्हें लगा था कि अब अफगानिस्तान पूरी तरह से उनकी मुट्ठी में है और वो इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ एक स्ट्रेटेजिक डेप्थ के तौर पर करेंगे। लेकिन भारत ने अपनी बेहतरीन और साइलेंट कूटनीति से पाकिस्तान के इस पूरे जियोपॉलिटिकल सपने को चकनाचूर कर दिया।

भारत ने बहुत ही शांति और धैर्य के साथ एक प्रैगमैटिक एप्रोच अपनाया। बिना तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता दिए भारत ने वहां के आम नागरिकों के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को टूटने नहीं दिया। आज की तारीख में भारत वहां 50 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं भेज चुका है। काबुल का इंदिरा गांधी बाल चिकित्सा अस्पताल आज भी मुख्य रूप से भारत की मदद से ही चल रहा है। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत ने अफगानिस्तान के लिए एक नया इकोनॉमिक कॉरिडोर खोल दिया है जिसने अफगानिस्तान की पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर निर्भरता को लगभग खत्म कर दिया है। आज तालिबान खुद भारतीय दूतावास को पूरी फुलप्रूफ सुरक्षा मुहैया करा रहा है। भारत बहुत अच्छी तरह जानता है कि अगर वो अफगानिस्तान से पूरी तरह बाहर हो गया, तो वहां पाकिस्तान और चीन का नेक्सस हावी हो जाएगा, जो हमारी नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा बन सकता है।

इस जियोपॉलिटिकल शतरंज के खेल में एक ऐसे ग्लोबल खिलाड़ी की एंट्री होती है, जिसने पूरे पावर बैलेंस को ही पलट कर रख दिया है। और वो शक्तिशाली खिलाड़ी है रूस। पूरी दुनिया को चौंकाते हुए अप्रैल 2025 में रूस की सुप्रीम कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर तालिबान का नाम अपनी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की लिस्ट से हटा दिया। इसके बाद जुलाई 2025 में रूस दुनिया का पहला ऐसा ताकतवर देश बना जिसने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता दे दी। रूस के लिए इस वक्त सबसे बड़ा सिरदर्द आईएसआईएस-के यानी इस्लामिक स्टेट खुरासान बन चुका है। और अफगानिस्तान की उबड़ खाबड़ जमीन पर अगर कोई भी फोर्स आईएसआईएस-के को हरा सकती है तो वो सिर्फ और सिर्फ अफगान तालिबान है। इसीलिए मई 2026 में मॉस्को में इंटरनेशनल सिक्योरिटी कांफ्रेंस के दौरान रूस और अफगान तालिबान के बीच एक बेहद ऐतिहासिक मिलिट्री टेक्निकल कोऑपरेशन एग्रीमेंट साइन हुआ। रूस अब खुलेआम तालिबान को तकनीकी मदद, हेलीकॉप्टर्स की मरम्मत और एयर डिफेंस सिस्टम के मेंटेनेंस में भारी सहायता कर रहा है।

जिस वक्त मॉस्को में तालिबान के रक्षा मंत्री अपने एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद थे, ठीक उसी वक्त उसी मॉस्को शहर में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद थे। ये कोई मामूली इत्तेफाक नहीं था। कूटनीति की दुनिया में इत्तेफाक जैसी कोई चीज नहीं होती। भारत की तरफ से रूस को एक साइलेंट सहमति मिल गई कि अगर रूस तालिबान को सीमित सैन्य तकनीक देकर मजबूत करता है जिससे वो आईएसआईएस का खात्मा कर सकें, तो भारत को इस डील से कोई आपत्ति नहीं है। रूस द्वारा तालिबान को मिलिट्री और एयर डिफेंस में सीधे तौर पर मदद करने का सीधा मतलब ये है कि अब पाकिस्तानी एयरफोर्स अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र के अंदर घुसकर अपनी मनमानी बमबारी बिल्कुल नहीं कर पाएगी। पाकिस्तान के हाथ से वो पावरफुल रिमोट कण्ट्रोल हमेशा के लिए छिन चुका है।

अब सबसे बड़ा सवाल, अफगानिस्तान के पास ये अत्याधुनिक ड्रोन्स आये कहां से। इंटरनेशनल और ग्लोबल डिफेंस एनालिस्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के ड्रोन प्रोग्राम की नींव किसी सुपरपावर ने नहीं रखी, बल्कि यह उनकी खुद की 5 साल की मेहनत और अमेरिका की गलती का नतीजा है। 2021 में जब अमेरिका काबुल छोड़कर भागा, तो वह पीछे करोड़ों डॉलर के आधुनिक सैन्य उपकरण छोड़ गया था। इनमें अमेरिकी सेना के स्कैन ईगल सर्विलांस ड्रोन्स भी शामिल थे। तालिबान ने सबसे पहले इन्हीं ड्रोन्स को कब्जे में लिया और इनकी तकनीक यानी रिवर्स-इंजीनियरिंग को समझना शुरू किया। 2021 से ही काबुल पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी और काबुल यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग छात्रों की एक खास टीम इस काम में जुटी हुई है। ये अटैक ड्रोन्स लोकल असेंबल किए गए हैं। इनमें चीन या ओपन मार्केट से मंगाए गए फ्लाइट-कंट्रोल बोर्ड और जीपीएस मॉड्यूल इस्तेमाल होते हैं। कार्बन फाइबर से बने 10 से 15 किलो के इन ड्रोन्स की रेंज 300 किलोमीटर तक है। यही वजह है कि तालिबान डूरंड लाइन के पास से इन्हें लॉन्च करके पाकिस्तान के अंदर तक आसानी से एयर स्ट्राइक कर पा रहा है।

पाकिस्तान की घबराहट का एक बड़ा कारण भारत की खुद की खौफनाक सैन्य क्षमताएं भी हैं। रावलपिंडी में बैठे जनरलों को आज भी 7 मई 2025 का वो दिन याद है जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। उस वक्त भारत ने इजराइली हेरॉन और स्वदेशी स्काईस्ट्राइकर कामिकेज़ ड्रोन्स का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के अंदर दर्जनों आतंकी कैंपों को तबाह कर दिया था। पाकिस्तान यह भूल गया है कि भारत के पास आज सिर्फ ड्रोन्स ही नहीं, बल्कि अवॉक्स (AWACS) जैसे एडवांस रडार सिस्टम्स और सुखोई-30MKI में लगे अस्त्र मार्क-1 (Astra Mk1) जैसी घातक मिसाइलों का पूरा एयर-डिफेंस ग्रिड तैयार है। हमारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) सीमाओं पर जो पैनी नजर बनाए हुए है, उसके आगे पाकिस्तान कोई भी नापाक हरकत करने से पहले सौ बार सोचता है। पाकिस्तानी सेना को यह खौफ सता रहा है कि जिस भारत के पास इतनी अचूक ड्रोन टेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस डोमिनेंस है, वह कहीं इंटेलिजेंस शेयरिंग के जरिए तालिबान को पाकिस्तानी सेना की सारी कमजोरियां तो नहीं बता रहा।

चाणक्य नीति कहती है दुश्मन को उसी के बुने जाल में फंसाओ। भारत ने पाकिस्तान को उलझाने के लिए हथियारों का नहीं, बल्कि कूटनीति और इंटेलिजेंस का मास्टरस्ट्रोक खेला है। पाकिस्तान लगातार डूरंड लाइन पर तारबंदी कर रहा है और अफगान शरणार्थियों को बेरहमी से निकाल रहा है। इसके ठीक उलट, भारत ने संकट के समय अफगानिस्तान में सलमा डैम जिसे अफगान इंडिया फ्रेंडशिप डैम भी कहते हैं, संसद भवन और सैकड़ों स्कूल-अस्पताल बनाए हैं। शहतूत डैम से लेकर डेलाराम जरंज हाईवे तक, भारत अपने प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। तालिबान समझ चुका है कि देश चलाने के लिए उन्हें पाकिस्तान की आतंकी डेप्थ स्ट्रेटजी नहीं, बल्कि भारत की डेवलपमेंट अप्रोच चाहिए।

भारत ने बिना कोई फालतू शोर शराबा किए, बिना कोई भड़काऊ और सस्ती बयानबाजी किए, सिर्फ अपनी बैकचैनल डिप्लोमेसी और आर्थिक ताकत के दम पर पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से चारों तरफ से घेर लिया है। आज पूरी दुनिया साफ साफ देख रही है कि आतंकवाद की जो खूनी फैक्ट्री पाकिस्तान ने दशकों तक दूसरों के लिए चलाई, आज उसी फैक्ट्री का जहरीला धुआं पाकिस्तान के अपने ही शहरों और अपनी ही सेना का दम घोंट रहा है। नया भारत अब चुपचाप वार सहने वाला देश नहीं रहा, बल्कि ये वो भारत है जो खामोशी से और परदे के पीछे रहकर दुश्मन की जड़ें काटने का दम रखता है।

You Might Also Like

View More

Latest & Breaking Updates

All Stories