पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से इस वक्त रूह कंपा देने वाली खबरें आ रही हैं। रावलकोट, मुज़फ्फराबाद, पुंछ और सुधनोती की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का ऐसा जनसैलाब उमड़ा है कि इस्लामाबाद के हुक्मरानों की रातों की नींद उड़ गई है। दशकों के दमन के बाद अब अवाम का धैर्य जवाब दे चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और पाक प्रशासन के बीच बातचीत का आखिरी प्रयास भी विफल हो गया है, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब समझौता नहीं, बल्कि आर-पार का संघर्ष होगा। आंदोलन ने अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर दस्तक दी है, जहाँ से पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं है।
इस ऐतिहासिक मार्च में हज़ारों की संख्या में लोग मुज़फ्फराबाद की ओर कूच कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और मासूम बच्चे भी ज़ुल्म के खिलाफ सीना तानकर खड़े हैं। रावलकोट के ईदगाह मैदान से आ रही तस्वीरें पाकिस्तान की क्रूरता का पर्दाफाश कर रही हैं। हाथों में सफेद झंडे लिए स्कूली बच्चे और उनकी माताएं इस विद्रोह का हिस्सा बन चुकी हैं। शहबाज़ शरीफ और जनरल असीम मुनीर की सत्ता इस जन-विद्रोह से सहमी हुई है, क्योंकि कश्मीरी जनता ने अब पाकिस्तान की गुलामी की जंजीरें तोड़ने का मन बना लिया है।
बातचीत के रास्ते बंद, अब सीधे आर-पार की जंग
इस बड़े विवाद का मुख्य कारण पाकिस्तान सरकार की वो शोषक नीतियां हैं, जिन्होंने PoK के लोगों का निवाला तक छीन लिया है। बिजली के आसमान छूते दाम, आटे की भारी किल्लत और कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ जनता महीनों से आवाज़ उठा रही थी। जब सरकार ने उनकी जायज़ मांगों को नज़रअंदाज़ किया, तो जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। कमेटी का रुख साफ़ था—अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो मुज़फ्फराबाद असेंबली से सीधे आज़ादी की घोषणा की जाएगी।
अब समय सीमा समाप्त हो चुकी है और प्रशासन के साथ बातचीत का दिखावा खत्म हो गया है। जनता का आक्रोश इस कदर है कि उन्होंने किसी भी संवाद की गुंजाइश को सिरे से नकार दिया है। मुज़फ्फराबाद विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों का संकल्प अटूट है। पाकिस्तान ने जिस क्षेत्र को दशकों से लूटा है, आज वहां की वादियों में ‘पाकिस्तान गो बैक’ के नारे गूंज रहे हैं।
रेंजर्स की अंधाधुंध फायरिंग और पाकिस्तानी बर्बरता
जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, पाकिस्तानी हुकूमत ने अपनी पुरानी फितरत के अनुसार दमन चक्र शुरू कर दिया। पुंछ, रावलकोट और सुधनोती में जो हुआ, उसने पाकिस्तान के तथाकथित लोकतांत्रिक चेहरे को दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पाकिस्तानी रेंजर्स ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और फिर निहत्थी भीड़ पर सीधे अंधाधुंध गोलियां बरसाईं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कायराना फायरिंग में करीब 8 से 9 प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग लहूलुहान हैं। पाकिस्तान का मानना था कि गोलीबारी के डर से जनता पीछे हट जाएगी, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ है। अपने साथियों के बलिदान के बाद जनता का हौसला और भी बढ़ गया है और अधिक संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
17 हज़ार सैनिकों की तैनाती और किलेबंदी
इस्लामाबाद के डर का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे मुज़फ्फराबाद क्षेत्र को एक सैन्य छावनी में बदल दिया गया है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए 17,500 से अधिक अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों और पाकिस्तानी रेंजर्स को तैनात किया गया है। हर प्रवेश द्वार पर भारी पहरा है।
मुख्य राजमार्गों को बड़े-बड़े कंटेनरों, कटीले तारों और लोहे के बैरिकेड्स से बंद कर दिया गया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे पाकिस्तान अपनी ही अवाम के खिलाफ युद्ध लड़ रहा हो। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब जन-सैलाब उमड़ता है, तो बड़े-बड़े तानाशाहों की दीवारें ढह जाती हैं।
डिजिटल ब्लैकआउट और सूचनाओं पर पाबंदी
अपनी विफलताओं को दुनिया से छिपाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने PoK में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। एक व्यापक डिजिटल ब्लैकआउट लागू किया गया है ताकि वहां चल रहे नरसंहार और दमन की ख़बरें बाहर न आ सकें।
हालांकि, अवामी एक्शन कमेटी ने इस चुनौती का भी डटकर मुकाबला किया है। इंटरनेट न होने के बावजूद, कार्यकर्ताओं ने मुख्य रास्तों पर धरना देकर पाकिस्तान से संपर्क काट दिया है। बाज़ार, परिवहन और कार्यालय सब ठप हैं। पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए PoK का यह बंद एक बड़ा झटका साबित हो रहा है।
वैश्विक स्तर पर गूंजी आवाज़ और UKPNP का दखल
इस आंदोलन में स्कूली बच्चों और महिलाओं की भागीदारी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। किताबों की जगह आज ये बच्चे अपने हक के लिए नारे लगा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ब्लैकआउट के बावजूद लीक हो रहे वीडियो पाकिस्तानी सेना की जुल्मों की दास्तां बयां कर रहे हैं।
वहीं, यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। UKPNP ने पाकिस्तानी प्रशासन से मांग की है कि वह तुरंत बल प्रयोग बंद करे और अवैध गिरफ्तारियों पर लगाम लगाए। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी निर्दोष लोगों की रिहाई और मृतकों के शव उनके परिवारों को सौंपने की पुरजोर मांग की है।
आज PoK में जो स्थिति है, वह इस बात का प्रमाण है कि बंदूक के दम पर किसी अवाम को लंबे समय तक गुलाम नहीं रखा जा सकता। पाकिस्तान के हाथ से अब PoK की रेत फिसलती नज़र आ रही है। आज़ादी की यह चिंगारी अब एक ऐसी मशाल बन चुकी है, जिसे बुझाना अब मुमकिन नहीं लगता।

