पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों इस्लामाबाद और रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में इस समय ऐसा भय व्याप्त है, जिसकी कल्पना भी पाकिस्तानी जनरल ने कभी नहीं की होगी। नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की आहट स्पष्ट महसूस की जा रही है। भारतीय सेना ने एक ऐसे गुप्त और अचूक मिशन की रूपरेखा तैयार की है, जिसने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। सैन्य कमांडरों के हालिया वक्तव्यों और सीमा पर बढ़ती हलचल से संकेत मिलते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की अपार सफलता के बाद अब भारतीय सेना ‘ऑपरेशन सिंदूर पार्ट 2’ के लिए पूरी आक्रामकता के साथ तैयार है। इस साइलेंट लेकिन हाई-वोल्टेज मिशन ने पाकिस्तानी शासकों के पसीने छुड़ा दिए हैं। लेकिन पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी मुसीबत सीमा पार से नहीं, बल्कि उसके अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के भीतर से खड़ी हुई है। पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के नागरिक अब इस्लामाबाद के दमनकारी शासन से मुक्ति के लिए सीधे भारत और प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगा रहे हैं।
पीओके में सुलग रही बगावत की आग
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आखिर ऐसा क्या हुआ है कि वहां के मानवाधिकार कार्यकर्ता अब पीएम मोदी से सैन्य हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं? क्या भारत पीओके की पूर्ण वापसी के लिए अपना निर्णायक दांव चलने वाला है? इन सवालों के जवाब उस प्रचंड विद्रोह में छिपे हैं जो गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके की गलियों में फैल चुका है। प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा के हालिया बयान ने पाकिस्तानी सत्ता की नींव हिला दी है। मिर्जा ने सीधे तौर पर पीएम नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है। यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उस जनता की पुकार है जिसे दशकों से पाकिस्तानी हुकूमत ने प्रताड़ित किया है। मिर्जा ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी अत्याचारों से उन्हें केवल भारत ही बचा सकता है। यह विचार करने वाली बात है कि वहां का नेतृत्व अब अपनी ही सत्ता को नकार कर उम्मीद भरी नजरों से दिल्ली की ओर क्यों देख रहा है?
मानवाधिकारों का दमन और पाकिस्तानी क्रैकडाउन
इसके पीछे का सत्य अत्यंत कड़वा है। गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके में मानवाधिकारों का जिस निर्दयता से हनन हो रहा है, वह वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के चेहरे पर काला धब्बा है। वहां यदि कोई अपने बुनियादी अधिकारों के लिए आवाज उठाता है, तो पाकिस्तानी एजेंसियां उसे गायब कर देती हैं। कार्यकर्ताओं पर इतना दबाव है कि वे अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं। अमजद अयूब मिर्जा ने पाकिस्तानी व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया कि कैसे वहां के लोगों को बिजली, पानी और आटे जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। विरोध करने वालों को जेलों में ठूंस दिया जाता है। वहां के नागरिकों के पास अब आर-पार की लड़ाई के सिवा कोई मार्ग शेष नहीं बचा है।
भारतीय विकास बनाम पाकिस्तानी बदहाली
पीओके के लोगों की भारत से आस की सबसे बड़ी वजह सीमा के दोनों ओर का विकास का अंतर है। मिर्जा ने स्वीकार किया कि पीएम मोदी की विकासोन्मुख नीतियां और भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति पूरे क्षेत्र के लिए आशा की किरण है। पीओके के नागरिक देख रहे हैं कि भारतीय जम्मू-कश्मीर में कैसे हाईवे, एम्स और स्मार्ट सिटीज का निर्माण हो रहा है, निवेश बढ़ रहा है और युवाओं को रोजगार मिल रहा है। कश्मीर आज वास्तव में बदल रहा है, जबकि दूसरी ओर उन्हें केवल महंगाई, कंगाली और सेना की तानाशाही मिल रही है। पीओके के लोग अब इस्लामाबाद के झूठ को पहचान चुके हैं और अपना भविष्य भारत के साथ देख रहे हैं।
अवामी एक्शन कमेटी का ऐतिहासिक जनआंदोलन
गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात अब नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। ‘अवामी एक्शन कमेटी’ के नेतृत्व में लाखों लोग सड़कों पर हैं। जनता ने बिजली और पानी के बिल भरने से इनकार कर दिया है। उनका तर्क सरल है—जब सुविधाएं नहीं, तो टैक्स क्यों? इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान सरकार दमन का सहारा ले रही है। मिर्जा के अनुसार, कई नेताओं को अज्ञात स्थानों पर कैद कर दिया गया है। 9 जून को विशाल हड़ताल का आह्वान किया गया है। डर के मारे पाकिस्तानी प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि वहां का सच दुनिया के सामने न आ सके।
भारतीय सेना की रणनीति और ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’
सबसे महत्वपूर्ण बिंदु ‘ऑपरेशन सिंदूर पार्ट टू’ है, जिसने पाकिस्तानी जनरलों की नींद हराम कर दी है। भारतीय सेना का रुख अब रक्षात्मक से आक्रामक हो चुका है। सैन्य अधिकारियों के संकेत स्पष्ट हैं—यदि पीओके की जनता मदद मांग रही है, तो भारत पीछे नहीं हटेगा। सीमा पर अत्याधुनिक हथियारों की तैनाती और रणनीतिक सक्रियता किसी बड़े प्रहार का पूर्वाभास है। रावलपिंडी में होने वाली आपातकालीन बैठकें इस बात का प्रमाण हैं कि पाकिस्तान को अपनी संभावित हार का डर सता रहा है। भारत का यह गुप्त ‘वॉर-गेम’ दुश्मन के हर मंसूबे को ध्वस्त करने के लिए तैयार है।
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान का पर्दाफाश
भारत के पास अब सशक्त नैतिक और कानूनी आधार है। पीओके भारत का अभिन्न अंग है और वहां के निवासी तकनीकी रूप से भारत के नागरिक हैं। जब हमारे नागरिक पुकार रहे हैं, तो भारत सरकार के पास उन्हें बचाने का पूर्ण अधिकार है। अमजद अयूब मिर्जा ने मांग की है कि भारत इस मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मंचों पर उठाए। इससे कश्मीर पर पाकिस्तान का फर्जी प्रोपेगेंडा पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो जाएगा।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक होगा। गिलगित-बाल्टिस्तान में बढ़ती अस्थिरता का असर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर भी पड़ना तय है। पाकिस्तान की सेना भयभीत है कि यदि भारतीय सेना ने वहां के विद्रोह को समर्थन दे दिया, तो उनका पूरा तंत्र ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। पीओके की जनता का आक्रोश अब थमने वाला नहीं है; वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

