ई-सिगरेट पर फंसे रियान पराग? भारत में सख्त कानून, हो सकती है सजा

ई-सिगरेट पर फंसे रियान पराग? भारत में सख्त कानून, हो सकती है सजा

 

इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन के बीच राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग एक नए विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। मामला उस समय सामने आया जब पंजाब किंग्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले के बाद उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

यह मैच न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित स्टेडियम में खेला गया था, जिसमें राजस्थान रॉयल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 विकेट से जीत दर्ज की। इस मुकाबले में पराग ने 16 गेंदों में 29 रन की तेज पारी खेलकर टीम की जीत में योगदान दिया।

हालांकि, मैच के बाद ड्रेसिंग रूम से सामने आए एक वीडियो ने पूरी चर्चा का रुख बदल दिया। वीडियो में पराग को कथित तौर पर वेपिंग यानी ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते हुए देखा गया। भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लागू है, ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन से जुड़ा माना जा रहा है।

वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और यह तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

अब माना जा रहा है कि बीसीसीआई इस मामले को गंभीरता से ले सकता है और आचार संहिता के तहत कोई कार्रवाई भी संभव है। फिलहाल बोर्ड की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग का ई-सिगरेट से जुड़ा विवाद अब कानूनी पहलू तक पहुंचता नजर आ रहा है। भारत में ई-सिगरेट पर 2019 से पूर्ण प्रतिबंध लागू है, जिसके तहत इसका निर्माण, बिक्री, वितरण और उपयोग सभी अवैध माने जाते हैं। इस कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहली बार दोषी पाया जाता है तो उसे अधिकतम एक साल की जेल या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

मामले के सामने आने के बाद बीसीसीआई के भीतर भी इस घटना को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। बोर्ड से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा दौर में, जब हर गतिविधि कैमरों और सोशल मीडिया की नजर में होती है, इस तरह का व्यवहार बेहद लापरवाही भरा है।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में आईपीएल से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि कुछ खिलाड़ी निजी तौर पर ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वे आम तौर पर इसे ड्रेसिंग रूम जैसे स्थानों पर नहीं करते, खासकर तब जब आसपास कैमरे मौजूद हों। ऐसे माहौल में इस तरह का कृत्य जोखिम भरा और गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, पराग का यह वीडियो सार्वजनिक होने के बाद बोर्ड पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उनकी जिम्मेदारी और भी अधिक थी, क्योंकि उनके व्यवहार का प्रभाव युवा प्रशंसकों पर पड़ सकता है।

इस बीच, एक अन्य सूत्र ने बताया कि मौजूदा टूर्नामेंट से पहले मुंबई में आयोजित कप्तानों की बैठक में ड्रेसिंग रूम की निजता का मुद्दा भी उठाया गया था। कुछ टीमों के कप्तानों ने लाइव प्रसारण के दौरान ड्रेसिंग रूम की ओर कैमरे घुमाए जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, यह चर्चा सीधे तौर पर ई-सिगरेट के इस्तेमाल से जुड़ी नहीं थी, बल्कि खिलाड़ियों की निजी जगह और उनकी सुविधा से संबंधित थी।

सूत्र ने यह भी कहा कि कई बार खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में पूरी तरह तैयार नहीं होते या कैमरों से दूर रहना चाहते हैं, ऐसे में उनकी निजता का सम्मान किया जाना जरूरी है। लेकिन पराग के मामले में इसे साफ तौर पर एक लापरवाही माना जा रहा है, जिसे सही ठहराना मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक बड़े खिलाड़ी का इस तरह सार्वजनिक रूप से धूम्रपान करते हुए नजर आना समाज में गलत संदेश दे सकता है, खासकर उन युवाओं के लिए जो उन्हें आदर्श मानते हैं।
ड्रेसिंग रूम से सामने आए वीडियो के बाद रियान पराग का वेपिंग विवाद तेजी से सुर्खियों में आ गया है और अब सबकी नजरें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं।

आईपीएल से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, खिलाड़ियों को पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि ड्रेसिंग रूम के अंदर से लाइव या रिकॉर्डेड फुटेज दिखाने का निर्णय सीधे तौर पर बोर्ड नहीं, बल्कि प्रसारण करने वाले ब्रॉडकास्टर का होता है। हालांकि, इस घटना के बाद इस पूरे सिस्टम की समीक्षा की जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।

इस मामले ने न सिर्फ खिलाड़ियों की निजी जगह और कैमरों की मौजूदगी पर बहस छेड़ दी है, बल्कि ई-सिगरेट से जुड़े कानूनों को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। भारत में लागू ई-सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के तहत किसी भी व्यक्ति को ई-सिगरेट का निर्माण, उत्पादन, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री या वितरण करने की अनुमति नहीं है। इसके साथ ही, इस तरह के उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर भी पूरी तरह रोक है, चाहे वह प्रत्यक्ष रूप से हो या अप्रत्यक्ष तरीके से।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है और खासतौर पर युवाओं को इसके प्रभाव से बचाना है। ऐसे में, किसी हाई-प्रोफाइल खिलाड़ी से जुड़े इस तरह के मामले न केवल कानूनी सवाल खड़े करते हैं, बल्कि खेल और समाज में आदर्श माने जाने वाले चेहरों की जिम्मेदारी पर भी बहस को तेज कर देते हैं।

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