पाकिस्तान में SCO बैठक: इस्लामाबाद में हिंदुस्तान ने दिखाया अपना कूटनीतिक दम, सीमा सुरक्षा पर बड़ी जीत

सीधे इस्लामाबाद से बात करते हैं, जो पाकिस्तान की राजधानी है और जहाँ इस समय दुनिया की कई बड़ी शक्तियों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए हैं। अवसर है शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सीमा सुरक्षा प्रमुखों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक का। इस अंतरराष्ट्रीय जमावड़े में जिस देश ने सबसे अधिक चर्चा बटोरी है, वह हमारा भारत है। जी हाँ, पाकिस्तान की सरजमीं पर जाकर, उनके ही मैदान में भारत ने इस वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह कोई साधारण बैठक नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी भू-राजनीतिक रणनीति और कूटनीतिक चालें निहित हैं।

कल्पना कीजिए, एक ऐसा देश जो स्वयं सीमा सुरक्षा के मामले में वैश्विक सवालों के घेरे में रहता है, वह आज सीमा सुरक्षा पर बैठक की मेजबानी कर रहा है। ऐसे में भारत का वहां उपस्थित होना और चीन, रूस एवं ईरान जैसे देशों के सामने अपना दृढ़ पक्ष रखना, भारतीय नेतृत्व का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। आज का भारत पीछे हटने वालों में से नहीं है। मंच चाहे कोई भी हो और स्थान चाहे कोई भी, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर किसी को भी वॉकओवर देने के पक्ष में नहीं है। इस्लामाबाद में हुई यह बैठक इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हिंदुस्तान अब हर वैश्विक चुनौती का डटकर सामना कर रहा है। इस उच्च स्तरीय बैठक के महत्व को समझने के लिए इसके बैकग्राउंड पर नजर डालना जरूरी है। SCO आज के समय में दुनिया का एक बेहद शक्तिशाली ब्लॉक बन चुका है, जिसमें रूस, चीन, भारत, ईरान और कई मध्य एशियाई देश शामिल हैं। जब इतनी बड़ी ताकतें एक साथ बैठती हैं, तो उनके निर्णयों का असर पूरे विश्व के सुरक्षा तंत्र पर पड़ता है।

इस बैठक का मुख्य एजेंडा सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का प्रबंधन था। भारत के लिए सीमा की सुरक्षा मात्र एक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारी संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। जब इस्लामाबाद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखी, तो पूरा ध्यान क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने पर केंद्रित था। भारत का रुख सदैव स्पष्ट रहा है—हम शांति चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। पाकिस्तान की धरती से दिया गया यह संदेश न केवल मेजबान देश के लिए था, बल्कि उन सभी के लिए था जो सीमा नियमों की अनदेखी करते हैं। इस दौरान एक महत्वपूर्ण विकास यह हुआ कि सभी सदस्य देशों ने सीमाओं की स्थिति और वहां के घटनाक्रमों का डेटा साझा किया। भारत ने अपने आधुनिक बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट फेंसिंग और रडार सिस्टम के माध्यम से जो सुरक्षा चक्र तैयार किया है, वह आज दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है।

इस बैठक में दो बड़े प्रोजेक्ट्स, ‘सॉलिडैरिटी-2025’ और ‘सॉलिडैरिटी-2026’ पर सहमति बनी है। ‘सॉलिडैरिटी-2025’ SCO सदस्य देशों के सीमा सुरक्षा बलों का एक संयुक्त अभियान था, जिसका उद्देश्य आपसी समन्वय और नवाचार को बढ़ावा देना था। इसके सफल परिणामों को इस बैठक में आधिकारिक मंजूरी दी गई है। लेकिन असली ध्यान ‘सॉलिडैरिटी-2026’ पर है, जिसकी रूपरेखा और रोडमैप को इस्लामाबाद में अंतिम रूप दे दिया गया है। आने वाले समय में कैसे सेनाएं मिलकर सुरक्षा अभ्यास करेंगी और तकनीक का आदान-प्रदान होगा, इसका पूरा ब्लूप्रिंट तैयार है। भारत के नजरिए से यह हमारी सेनाओं के लिए अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने का एक और बड़ा अवसर है। हमारी सेनाएं जिस पेशेवर ढंग से कठिन परिस्थितियों में कार्य करती हैं, वह विश्व की सर्वश्रेष्ठ सैन्य शक्तियों के लिए भी एक मिसाल है।

इस पूरी घटना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पाकिस्तान इस साल सितंबर में SCO की अध्यक्षता संभालने वाला है। कूटनीति में अध्यक्षता का अर्थ है एजेंडा सेट करने की शक्ति। पाकिस्तान निश्चित रूप से इसका उपयोग अपने नैरेटिव को फैलाने के लिए करना चाहेगा, लेकिन भारत ने इस्लामाबाद में अपनी सशक्त उपस्थिति से यह साफ कर दिया है कि किसी भी प्रोपेगेंडा को सफल नहीं होने दिया जाएगा। भारत की यह आक्रामक और सक्रिय कूटनीति ‘नए भारत’ की पहचान है। हम अब रक्षात्मक होने के बजाय ऑफेंसिव डिप्लोमेसी में विश्वास रखते हैं। यदि कोई बैठक हमारे पड़ोस में हो रही है जहाँ हमारे रणनीतिक हित जुड़े हैं, तो वहां भारत की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित है। भारत की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी निर्णय हमारी सुरक्षा को दरकिनार कर नहीं लिया जा सकता।

यह भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति का उत्कृष्ट उदाहरण है। हम किसी एक गुट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार हर मंच पर अपनी जगह बनाते हैं। पाकिस्तान में हुई इस बैठक के परिणाम आने वाले महीनों में वैश्विक सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालेंगे। जब ‘सॉलिडैरिटी-2026’ के जमीनी अभियान शुरू होंगे, तब दुनिया भारतीय सेना की श्रेष्ठता और हाई-टेक क्षमताओं को देखेगी। इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि हिंदुस्तान अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय निर्णय लेने वाला देश है। इस्लामाबाद का यह कूटनीतिक मैदान भारत के लिए सफल रहा है, जहाँ बिना किसी शोर के रणनीतिक दबाव के माध्यम से भारत ने अपना लक्ष्य प्राप्त किया है।

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