शेख हसीना का ‘होमकमिंग’ और आईएसआई की सबसे खतरनाक साजिश, दक्षिण एशिया में मचेगा भूचाल!

शेख हसीना का 'होमकमिंग' और आईएसआई की सबसे खतरनाक साजिश, दक्षिण एशिया में मचेगा भूचाल!

क्या 5 अगस्त को शेख हसीना की बहुचर्चित होमकमिंग उनके लिए बिछाया गया सबसे बड़ा और विनाशकारी जाल है? प्रेस लिखे स्टीकर वाली उस कार में आखिर कौन सा रिमोट कंट्रोल बम तैयार किया जा रहा है? पाकिस्तान की आईएसआई और लश्कर के 5 आत्मघाती आतंकियों की ढाका सेल को आखिर पर्दे के पीछे से कौन कमांड दे रहा है? ये वो सवाल हैं जो इस वक्त पूरे दक्षिण एशिया के इंटेलिजेंस नेटवर्क में गूंज रहे हैं। ढाका के बंद कमरों में अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि सर्जियो गोरे और भारतीय उच्चायुक्त के बीच ऐसी कौन सी डेढ़ घंटे की सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसके तुरंत बाद भारतीय उच्चायुक्त को सब कुछ छोड़कर अचानक फ्लाइट पकड़कर दिल्ली आना पड़ा? क्या इस मीटिंग में कोई ऐसी सीक्रेट फाइल खुल गई थी, जिसने दोनों देशों की नींद उड़ा दी? एक तरफ हसीना की वापसी का खौफ, तो दूसरी तरफ मोहम्मद यूनुस को रातों-रात राष्ट्रपति बनाने की गुप्त तैयारी। बीएनपी की स्टैंडिंग कमेटी और अमेरिकी राजदूत के बीच वो कौन सी बैकडोर डील साइन हुई है, जिसने पूरे बांग्लादेशी डीप स्टेट को हिलाकर रख दिया है? अगर आप सोच रहे हैं कि बांग्लादेश में सिर्फ एक साधारण सत्ता परिवर्तन हुआ था, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। दक्षिण एशिया का नक्शा एक बार फिर बदलने वाला है और इस बार बिसात पर मोहरे नहीं, सीधे वजीर दांव पर लगे हैं।

पूरे दो साल की खामोशी, दो साल का अज्ञातवास और अब अचानक 5 अगस्त की तारीख। बांग्लादेश की राजनीति में एक भयंकर भूचाल आने वाला है। लेकिन इस भूचाल के जमीन पर उतरने से पहले ही एक ऐसा खौफनाक दावा सामने आया है जिसने नई दिल्ली से लेकर ढाका तक खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। बांग्लादेश के बेहद प्रतिष्ठित और अंदरूनी खबरों पर गहरी पकड़ रखने वाले न्यूज पोर्टल वीकली ब्लिट्ज के संपादक शोएब चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा विस्फोटक खुलासा किया है, जो किसी भी हॉलीवुड स्पाई थ्रिलर से कहीं ज्यादा खतरनाक है। दावा किया गया है कि शेख हसीना को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की एक बेहद पक्की और खौफनाक साजिश रची जा रही है। और इस साजिश का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि भारत का पैदाइशी दुश्मन, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर के 5 आतंकियों की एक खास आत्मघाती टीम को तैयार किया जा रहा है। इस पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आईएसआई की ढाका सेल पूरी तरह से अंडरग्राउंड होकर एक्टिव हो चुकी है। बात सिर्फ आतंकियों की घुसपैठ तक सीमित नहीं है, इसके आगे का सच हर किसी को झकझोर कर रख देगा।

खुफिया दावों के मुताबिक लश्कर के 2 आतंकियों को बाकायदा मानव बम बनने के लिए तैयार किया जा रहा है। उनके लिए विशेष सुसाइड जैकेट और बेहद शक्तिशाली रिमोट कंट्रोल आईईडी तैयार करने का सीधा जिम्मा सौंपा गया है। मकसद बिल्कुल साफ और भयानक है। जब भी शेख हसीना बांग्लादेश लौटें, या भारत से लौटने की अपनी अंतिम योजना पर काम शुरू करें, तो एक ऐसा भयानक धमाका किया जाए जो पूरे उपमहाद्वीप की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दे। लेकिन सबसे खतरनाक और शातिर हिस्सा अभी बाकी है। खुफिया रिपोर्ट्स के दावों के मुताबिक आईएसआई एक बहुत बड़े कार बम हमले की फिराक में है। टारगेट कोई इमारत नहीं, बल्कि वो बहुत बड़ी भीड़ होगी जो शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने पर उनके स्वागत में सड़कों पर उतरेगी। और सबसे बड़ा धोखा देने के लिए, उस तबाही वाली गाड़ी पर प्रेस का स्टिकर लगा होगा। एक ऐसा स्टिकर जो किसी भी सुरक्षा घेरे को, किसी भी वीआईपी प्रोटोकॉल को बहुत ही आसानी से चकमा देकर टारगेट के बिल्कुल करीब पहुंच सकता है। क्या ये सिर्फ एक कोरी अफवाह है? या फिर बांग्लादेशी डीप स्टेट का कोई बहुत बड़ा गेम? आधिकारिक पुष्टि भले ही अभी न हुई हो, लेकिन खुफिया हलकों में हलचल इतनी तेज है कि सुरक्षा ग्रिड में रेड अलर्ट जैसे हालात बन चुके हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर 5 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई? इसी दिन शेख हसीना अचानक दुनिया के सामने क्यों आ रही हैं? कूटनीति और राजनीति में तारीखें कभी इत्तेफाक नहीं होतीं। आपको याद होगा, ठीक दो साल पहले 5 अगस्त को ही बांग्लादेश में वो खेल खेला गया था, जब उग्र छात्र आंदोलन की आड़ में प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा कर लिया गया था। वो एक चुनी हुई सरकार का तख्तापलट था। शेख हसीना को अपनी जान बचाने के लिए अपनी बहन शेख रेहाना के साथ सैन्य हेलीकॉप्टर से देश छोड़ना पड़ा था। अगरतला होते हुए भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से वो दिल्ली लाई गई थीं। भारत ने तब एक सच्चे और ताकतवर पड़ोसी का फर्ज निभाया था। ठीक दो साल बाद, उसी 5 अगस्त की तारीख को दुनिया के सामने आने के लिए चुनना, अपने आप में एक बहुत बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश है। नई दिल्ली के सर मार्क टुल्ली ऑडिटोरियम में एफसीसी साउथ एशिया के मंच से शेख हसीना वर्चुअल तरीके से मीडिया और दुनिया को संबोधित करेंगी। ये सिर्फ एक साधारण प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है, ये एक राजनीतिक ऐलान-ए-जंग है।

शाम को होने वाले शेख हसीना के होमकमिंग नाम के इस मेगा इवेंट में सिर्फ हसीना अकेले नहीं होंगी। उनके बेटे, पूर्व शिक्षा मंत्री और कुछ बड़े चेहरे इस कूटनीतिक धमाके का हिस्सा होंगे। इसका सीधा मतलब ये है कि अवामी लीग फिर से जिंदा हो रही है, अपने कैडर को एक्टिव कर रही है, और इसकी राजनीतिक जमीन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र यानी भारत से तैयार की जा रही है। शेख हसीना पहले ही साफ शब्दों में संकेत दे चुकी हैं कि वो दिसंबर में बांग्लादेश लौटकर अदालत के सामने कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका मानना है कि उनके खिलाफ बनाए गए सारे मामले पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं।

लेकिन इस पूरी कहानी का असली खेल तो ढाका और दिल्ली के बंद कमरों में चल रहा है, जहां जियोपॉलिटिक्स की बिसात बिछाई जा रही है। पिछले हफ्ते ही अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि और दक्षिण व मध्य एशिया के मामलों के सबसे बड़े अमेरिकी अधिकारी सर्जियो गोरे पूरे तीन दिन के लिए बांग्लादेश में डेरा डाले हुए थे। उन्होंने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और कई टॉप अधिकारियों से मुलाकात की। लेकिन जो घटना सबसे ज्यादा चौंकाने वाली और रहस्यमयी थी, वो थी 31 जुलाई की सुबह की वो गुप्त मीटिंग। तारिक रहमान से मिलने से ठीक पहले, सर्जियो गोरे ने ढाका में मौजूद भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ पूरे डेढ़ घंटे तक सीक्रेट मीटिंग की। इंटरनेशनल डिप्लोमेसी की दुनिया में किसी अमेरिकी टॉप ऑफिशियल और भारतीय उच्चायुक्त के बीच इतनी लंबी बंद कमरे की मीटिंग का मतलब होता है किसी बहुत बड़े, क्रिटिकल और आर-पार के एजेंडे पर बात होना। और इस मीटिंग की ग्रैविटी आप इस बात से समझ सकते हैं कि सर्जियो गोरे से मिलने के तुरंत बाद, उसी दिन भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने अचानक सब कुछ छोड़कर नई दिल्ली की फ्लाइट पकड़ ली। ऐसा क्या था उस मीटिंग में, ऐसी कौन सी इंटेलिजेंस शेयर की गई थी, जिसने भारतीय राजदूत को तुरंत दिल्ली आकर नेशनल सिक्योरिटी ग्रिड और विदेश मंत्रालय को रिपोर्ट करने पर मजबूर कर दिया?

एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि इस अहम मीटिंग का इकलौता मकसद बांग्लादेश में तेजी से बढ़ते चीन के जहरीले असर को काटना था। अमेरिका और भारत, दोनों के लिए बांग्लादेश में चीन की बढ़ती घुसपैठ एक बड़ा सिरदर्द है। लेकिन क्या अमेरिका वाकई पूरी ईमानदारी से भारत के साथ मिलकर चीन को रोक रहा है, या फिर कोई बहुत बड़ा डबल गेम चल रहा है? वीकली ब्लिट्ज की रिपोर्ट में एक दावा ये भी किया गया है कि दिल्ली में बैठे अमेरिकी राजदूत ने ढाका और दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावासों को अवामी लीग के उन नेताओं से संपर्क बढ़ाने का निर्देश दिया है, जो अलग-अलग देशों में निर्वासित हैं। यानी अमेरिका एक तरफ मौजूदा सरकार से डील कर रहा है, तो दूसरी तरफ हसीना की अवामी लीग के साथ बैकडोर चैनल भी खोल रहा है। कूटनीति की भाषा में इसे हैजिंग कहते हैं, यानी हर तरफ अपना फायदा देखना।

अब जरा बांग्लादेश की मौजूदा सरकार की खतरनाक चालबाजी को समझिए। जून के महीने में प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन का दौरा किया और बीजिंग के साथ कई ऐसे रणनीतिक समझौते कर डाले, जिसने नई दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक खतरे की घंटी बजा दी। ढाका का कूटनीतिक और राजनीतिक हलका आज बड़े घमंड से एक ही सवाल पूछ रहा है कि अगर पाकिस्तान एक ही समय में चीन और अमेरिका दोनों की गोद में बैठ सकता है, दोनों के साथ अच्छे संबंध रख सकता है, तो बांग्लादेश ऐसा क्यों नहीं कर सकता? भारत को इस पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए? ये बिल्कुल वही पाकिस्तान वाला सुसाइडल ब्लूप्रिंट है, जिसने आज पाकिस्तान को कटोरा लेकर दुनिया भर में भीख मांगने पर मजबूर कर दिया है। और अब बांग्लादेश का डीप स्टेट उसी आग से खेल रहा है। भारत के नजरिए से ये किसी भी कीमत पर बर्दाश्त करने लायक स्थिति नहीं है। दिल्ली का स्टैंड बहुत क्लियर, अग्रेसिव और कॉन्फिडेंट है। हम अपने पड़ोस में, अपनी सीमाओं से सटा हुआ एक और पाकिस्तान या चीन का प्रॉक्सी स्टेट नहीं बनने देंगे। मोदी सरकार की विदेश नीति, रक्षा आधुनिकीकरण और रणनीतिक स्वायत्तता ने दुनिया को बहुत साफ शब्दों में दिखा दिया है कि भारत के राष्ट्रीय हितों से अब कोई भी समझौता नहीं होगा।

इसी बीच एक जुलाई को, दौरे के आखिरी दिन जब सर्जियो गोरे और तारिक रहमान की मुलाकात हो रही थी, ठीक उसी दिन सत्ताधारी पार्टी बीएनपी की स्टैंडिंग कमेटी की एक बेहद अहम और गुप्त बैठक होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक में एक ऐसा फैसला लिया गया जिसने पूरे पॉलिटिकल सिस्टम को चौंका दिया। इस बैठक में असल में मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश का अगला राष्ट्रपति बनाने के नामांकन पर गंभीर चर्चा हुई। आप क्रोनोलॉजी समझिए। एक तरफ 5 अगस्त को हसीना की वापसी का खौफ मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ मोहम्मद यूनुस को टॉप पोजीशन पर बैठाकर पश्चिमी देशों और दुनिया को एक बहुत ही शरीफ और प्रोग्रेसिव इमेज दिखाने की कोशिश हो रही है। इसी बैठक में ये भी तय हुआ कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली जाएंगे। यानी ढाका एक तरफ चीन से डील कर रहा है, दूसरी तरफ अमेरिका से मिल रहा है, और तीसरी तरफ ब्रिक्स के मंच पर भारत के सामने भी अपनी अहमियत जताना चाहता है।

लेकिन इस पूरे भू-राजनीतिक शतरंज में सबसे खतरनाक मोहरे वो हैं, जिनसे अमेरिकी दूत सर्जियो गोरे ने जानबूझकर मुलाकात तक नहीं की। वो हैं बांग्लादेश के विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजन पार्टी। जमात-ए-इस्लामी का पाकिस्तान की आईएसआई के साथ क्या और कैसा रिश्ता है, ये पूरी दुनिया जानती है। और एनसीपी के नेताओं ने हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत के खिलाफ जितना जहर उगला है, वो किसी से छिपा नहीं है। कट्टरपंथियों का दबाव आज बांग्लादेश में इतना ज्यादा है कि गाईबांधा में हिंदू धार्मिक परिसर का काम तक रुकवा दिया गया है। हिंदुओं और अल्पसंख्यकों में खौफ का माहौल है। अमेरिका इन कट्टरपंथियों से खुलेआम नहीं मिल रहा ताकि उसके दामन पर दाग न लगे, लेकिन क्या पर्दे के पीछे से इन्हें राजनीतिक ऑक्सीजन नहीं दी जा रही? ये एक बहुत बड़ा और खतरनाक डीप स्टेट गेम है। छात्र आंदोलन का चेहरा रहे आसिफ महमूद के खुलासे भी इसी तरफ इशारा कर रहे हैं कि 5 अगस्त का तख्तापलट कोई आम लोकतांत्रिक क्रांति नहीं थी, बल्कि विदेशी ताकतों का एक वेल-प्लान्ड इंटेलिजेंस ऑपरेशन था।

अब भारत के नजरिए से इस पूरी ग्लोबल पिक्चर को डिकोड करते हैं। भारत ने विपरीत परिस्थितियों में शेख हसीना को शरण देकर पूरी दुनिया को ये साबित किया है कि नई दिल्ली अपने दोस्तों को कभी बीच मझधार में नहीं छोड़ता। ढाका की मौजूदा सरकार लगातार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है, उन पर दबाव बना रही है। लेकिन नई दिल्ली ने बहुत ही कूटनीतिक, सख्त और सधे हुए अंदाज में जवाब दिया है कि ये पूरा मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है। भारत का यह स्टैंड साफ संदेश देता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और अखंडता के मुद्दे पर भारत किसी भी बाहरी दबाव या ब्लैकमेलिंग के आगे झुकने वाला नहीं है।

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