‘शुक्रिया इंडिया’: अफगानिस्तान में भीषण बाढ़ से मची तबाही, संकट के बीच देवदूत बनकर पहुंचा भारत

जब दुनिया के बड़े-बड़े देश अपनी कूटनीतिक चालों और स्वार्थ में व्यस्त हो जाते हैं, तब भारत जैसा देश इंसानियत के लिए हर सरहद को पार कर जाता है। आज अफगानिस्तान से एक बेहद खौफनाक खबर सामने आई है, जहाँ कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है कि रूह कांप जाए। पहाड़ों के बीच स्थित नूरिस्तान प्रांत इस वक्त भीषण तबाही का गवाह बन रहा है। अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) ने पूरे शहरों को मलबे के ढेर में बदल दिया है। 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, सैकड़ों लापता हैं और हर तरफ केवल बर्बादी का मंजर है। लेकिन इस भयावह स्थिति में, जब दुनिया ने अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया है, तब भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। नए भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इस क्षेत्र में संकट के समय सबसे पहले खड़ा रहने वाला देश सिर्फ इंडिया है।

अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से के नूरिस्तान प्रांत में जो हुआ, वह किसी डरावने सपने जैसा है। मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ ने घरों, दुकानों और पुलों को तिनके की तरह बहा दिया। राजधानी पारुन में हालात इतने गंभीर हैं कि वहाँ के मेयर सैयद अहमद अरहबी भी इस बाढ़ की चपेट में आ गए और उनकी जान चली गई। जब प्रशासन ही कुदरत की मार का शिकार हो जाए, तो स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पारुन में कम से कम 100 लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से अधिक घायल हैं। संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है और पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना रेस्क्यू टीमों के लिए असंभव सा हो गया है।

इस तबाही के बीच अफगानिस्तान खुद को अकेला महसूस कर रहा था क्योंकि पश्चिमी देशों ने इस मानवीय संकट से मुंह मोड़ लिया है। लेकिन भारत की विदेश नीति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर चलती है। भारत यह समझता है कि सत्ता बदल सकती है, लेकिन वहां की आम जनता निर्दोष है। इसी सोच के साथ भारत ने बिना समय गंवाए अफगानिस्तान के लिए आपातकालीन राहत सामग्री (Emergency Relief Material) रवाना कर दी है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुश्किल घड़ी में अफगान लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। राहत सामग्री की इस खेप में भारी मात्रा में खाद्य सामग्री और टेंट शामिल हैं, जिन्हें अफगानिस्तान के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंप दिया गया है। यह कदम जिओपॉलिटिक्स में भारत के बढ़ते कद और उसकी सॉफ्ट पावर का एक बड़ा प्रमाण है। यह दिखाता है कि भारत केवल बातें नहीं करता, बल्कि जमीन पर उतरकर कार्य करता है।

ग्लोबल पॉलिटिक्स के नजरिए से देखें तो तालिबान ने भी आधिकारिक तौर पर भारत का आभार जताया है। जो लोग कभी पाकिस्तान के प्रभाव में थे, आज वे भी समझ चुके हैं कि असली मित्र कौन है। पाकिस्तान, जो खुद को हमदर्द बताता है, वह खुद आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और दुनिया के सामने हाथ फैलाए खड़ा है। वहीं चीन जैसे देश केवल वहां के खनिजों और संसाधनों में रुचि रखते हैं। ऐसे में केवल भारत ही है जो बिना किसी गुप्त एजेंडे के मानवीय आधार पर सहायता कर रहा है।

अफगानिस्तान में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ता है। भारत जानता है कि एक स्थिर और सुरक्षित अफगानिस्तान पूरे एशिया की शांति के लिए आवश्यक है। जहाँ पाकिस्तान और चीन अस्थिरता का लाभ उठाने की कोशिश करते हैं, वहां भारत अपनी सकारात्मक सोच से शांति स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की छवि एक ऐसे देश की है जो सीमाओं के पार विकास और राहत का संदेश भेजता है। बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों ने देखा है कि संकट में भारत हमेशा ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ रहा है। चाहे नेपाल का भूकंप हो या श्रीलंका का आर्थिक संकट, भारत ने हमेशा साथ दिया। अब वही भूमिका अफगानिस्तान में देखी जा रही है, जो वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता को और मजबूत करती है।

अफगानिस्तान के लिए भारत का समर्थन नया नहीं है। पिछले वर्षों में जब वहां भूकंप आया या गेहूं का संकट पैदा हुआ, भारत ने सबसे पहले दवाइयां और अनाज भेजा। कोरोना काल में वैक्सीन से लेकर आज बाढ़ में टेंट तक, भारत हमेशा अफगान आवाम के साथ रहा है। भारत ने वहां संसद भवन और बांध बनाकर वहां के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वर्तमान में अफगानिस्तान की स्थिति बहुत नाजुक है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में और अधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। रेस्क्यू टीमें बुनियादी मशीनों की कमी के कारण हाथों से मलबा हटाने को मजबूर हैं। अफगानिस्तान को इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्च ऑपरेशंस, मेडिकल सप्लाई और इमरजेंसी शेल्टर की सख्त जरूरत है। 2026 की शुरुआत में ही प्राकृतिक आपदाओं ने वहां 110 से ज्यादा जिंदगियां लील ली हैं।

ऐसे समय में वैश्विक समुदाय को भारत से सीख लेनी चाहिए। सुपरपावर होने का अर्थ केवल हथियारों का संचय नहीं, बल्कि सही समय पर मानवता की रक्षा करना है। भारत ने राहत सामग्री भेजकर दुनिया को संदेश दिया है कि दक्षिण एशिया की स्थिरता का मुख्य आधार भारत ही है। आज अफगानिस्तान के लोग और प्रशासन भारत की इस पहल की सराहना कर रहे हैं, जो ‘न्यू इंडिया’ की आक्रामक और संवेदनशील कूटनीति का परिचय देता है।

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