भारतीय नौसेना का महाशक्ति अवतार: कोलकाता में एक साथ शामिल होंगे 3 स्वदेशी युद्धपोत

आज के वैश्विक परिदृश्य में समुद्र की लहरों पर नियंत्रण ही सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है। जो राष्ट्र समुद्री व्यापारिक मार्गों को नियंत्रित करता है, वही दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा की चाबी अपने पास रखता है। यह वास्तविकता है कि विश्व का अस्सी प्रतिशत से अधिक व्यापार इन्हीं समुद्री रास्तों से संपन्न होता है। कच्चा तेल, गैस और इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर जीवन रक्षक दवाइयां तक, सब कुछ विशाल जहाजों के माध्यम से एक से दूसरे देश पहुंचता है। हिंद महासागर में चीन अपनी नौसेना का विस्तार कर और पाकिस्तान को सैन्य मदद देकर भारत को घेरने की साजिश रच रहा है, लेकिन भारतीय नौसेना ने अब एक ऐसा कदम उठाया है जिसने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। 21 जून को कोलकाता के हुगली तट पर भारतीय नौसेना की शक्ति के एक नए युग का सूत्रपात होने जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत की ‘फौलादी तिकड़ी’ का उदय

किसी भी नौसेना के लिए एक ही दिन में तीन बड़े मिलिट्री प्लेटफॉर्म को कमीशन करना एक असाधारण उपलब्धि है। एक युद्धपोत बनाना कोई साधारण कार्य नहीं है; यह समुद्र पर तैरता हुआ एक आधुनिक शहर होता है जिसमें अपने पावर प्लांट, रडार सिस्टम और मिसाइल लॉन्च पैड होते हैं। भारत एक साथ तीन स्वदेशी जहाजों को समुद्र में उतारने जा रहा है, जो हमारी घरेलू शिपबिल्डिंग क्षमता का प्रमाण है। सबसे गर्व की बात यह है कि ये जहाज पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की वह मिसाल है जो दुनिया को बता रही है कि भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि उन्नत युद्धपोत बनाने वाला एक वैश्विक केंद्र बन चुका है।

INS दूनागिरी: रडार की नजरों से ओझल रहने वाला शिकारी

इस फौलादी तिकड़ी में पहला नाम ‘आईएनएस दूनागिरी’ का है। यह प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित एक अत्यंत आधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी स्टेल्थ टेक्नोलॉजी है, जो इसे दुश्मन के रडार से छिपाए रखती है। इसका विशेष डिजाइन और रडार एब्जॉर्बिंग पेंट दुश्मन की रडार तरंगों को सोख लेते हैं या उन्हें दूसरी दिशा में मोड़ देते हैं। इसके कारण दुश्मन के रडार स्क्रीन पर यह विशाल युद्धपोत एक छोटी नाव जैसा दिखता है। जब तक दुश्मन इसकी वास्तविकता समझ पाता है, तब तक आईएनएस दूनागिरी उसे तबाह करने के लिए उसके करीब पहुंच चुका होता है।

ब्रह्मोस और एयर डिफेंस का घातक मेल

आईएनएस दूनागिरी केवल छिपने में ही नहीं, बल्कि प्रहार करने में भी बेजोड़ है। यह दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ से लैस है। इसकी सी-स्किमिंग क्षमता के कारण दुश्मन का कोई भी डिफेंस सिस्टम इसे ट्रैक नहीं कर पाता। इसके साथ ही, आसमान से आने वाले खतरों जैसे फाइटर जेट्स और ड्रोन को नष्ट करने के लिए इसमें अत्याधुनिक ‘सरफेस-टू-एयर’ मिसाइल सिस्टम भी लगाया गया है। यह एक ऐसा सर्वगुण संपन्न युद्धपोत है जो समुद्र की सतह और आसमान, दोनों तरफ से आने वाले खतरों का काल है।

INS संग्रह: पनडुब्बियों के लिए अभिशाप

हिंद महासागर में असली चुनौती केवल सतह पर नहीं, बल्कि पानी के नीचे भी है। चीन द्वारा हमारी तटरेखा के पास अपनी पनडुब्बियों की गतिविधि बढ़ाना एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। उथले पानी (Shallow Water) में बड़े जहाजों का संचालन कठिन होता है, और इसी कमी को पूरा करने के लिए ‘आईएनएस संग्रह’ को मैदान में उतारा जा रहा है। यह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट श्रेणी का जहाज है जिसका मुख्य लक्ष्य दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढ निकालना और उन्हें नष्ट करना है।

एडवांस सोनार और अचूक टारपीडो प्रणाली

आईएनएस संग्रह की सबसे बड़ी शक्ति इसका आधुनिक सोनार सिस्टम है। यह समुद्र की गहराइयों में ध्वनि तरंगें भेजकर छिपी हुई पनडुब्बियों की सटीक लोकेशन का पता लगा लेता है। एक बार लोकेशन मिलने के बाद, यह अपने स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर्स और हल्के टारपीडो के जरिए दुश्मन को जलसमाधि देने की क्षमता रखता है। यह जहाज भारत के समुद्री बेस और तटों की सुरक्षा के लिए एक अभेद्य दीवार साबित होगा।

INS संशोधक: नौसेना की तीसरी आंख

इस तिकड़ी का तीसरा महत्वपूर्ण हिस्सा ‘आईएनएस संशोधक’ है। समुद्र के नीचे की भौगोलिक स्थिति को समझना युद्ध के समय अत्यंत आवश्यक होता है। आईएनएस संशोधक एक ‘लार्ज सर्वे वेसल’ है, जिसका काम हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। यह समुद्र की गहराई को मापता है और पानी के नीचे छिपे पहाड़ों व चट्टानों का सटीक नक्शा तैयार करता है। इसके बिना कोई भी नौसैनिक ऑपरेशन पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकता।

डीप सी मैपिंग और अंडरवाटर ड्रोन्स की शक्ति

आईएनएस संशोधक अत्याधुनिक अंडरवाटर ड्रोन्स से लैस है, जो उन गहराइयों तक पहुंच सकते हैं जहाँ इंसानों का जाना असंभव है। यह जहाज नौसेना को समुद्र के नीचे का वह 3D मैप प्रदान करेगा, जिसकी मदद से हमारी पनडुब्बियां दुश्मन के इलाके में बिना किसी बाधा के प्रवेश कर सकेंगी। यह जहाज भारतीय नौसेना के लिए एक डिजिटल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

निर्माण का नया रिकॉर्ड: दुनिया दंग

इन जहाजों का निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है। रक्षा विशेषज्ञ इस बात से चकित हैं कि भारत ने इन जहाजों का निर्माण निर्धारित समय से बहुत पहले पूरा कर लिया है। निर्माण की यह गति यह दर्शाती है कि भारत का रक्षा उद्योग अब परिपक्व हो चुका है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, बल्कि हजारों भारतीय युवाओं को रोजगार भी मिला है।

21 जून: सॉफ्ट पावर और हार्ड पावर का मिलन

21 जून का दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होने वाला यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक शक्ति (योग) और सैन्य शक्ति (युद्धपोत) के अद्भुत संगम को दर्शाएगा। यह दुनिया को संदेश है कि भारत शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार और सक्षम भी है।

हिंद महासागर में अभेद्य सुरक्षा चक्र

कुल मिलाकर, ये तीनों जहाज मिलकर समुद्र में एक ऐसा चक्रव्यूह बनाएंगे जिसे भेदना किसी भी दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा। आईएनएस संशोधक का डेटा, आईएनएस संग्रह की पनडुब्बी रोधी क्षमता और आईएनएस दूनागिरी का घातक प्रहार मिलकर भारत को हिंद महासागर का बेताज बादशाह बनाते हैं। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐसा मील का पत्थर है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगा।

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