वर्तमान में पूरी दुनिया एक ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ी है। चारों ओर अशांति और अनिश्चितता का माहौल व्याप्त है। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव हो या रूस-यूक्रेन का कभी न थमने वाला युद्ध, वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार हिचकोलें खा रही है। लेकिन, इस वैश्विक अस्थिरता के बीच आज सबकी निगाहें भारत की राजधानी नई दिल्ली पर टिकी हैं। अवसर है दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की महाबैठक का। जहाँ पश्चिमी शक्तियां अपना प्रभाव जमाने की कोशिश में हैं, वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया को स्थिरता प्रदान करने का सामर्थ्य अब केवल भारत और ब्रिक्स देशों के पास ही है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक के उद्घाटन सत्र में वैश्विक परिस्थितियों का सटीक विश्लेषण करते हुए भारत की प्रखर और राष्ट्रवादी विदेश नीति का उद्घोष किया। उन्होंने बिना किसी संकोच के दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मची उथल-पुथल का सच रखा। यह महज एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि उस पुराने वैश्विक ढांचे को एक चेतावनी है जो अब पतन की ओर है। यह उस उभरते भारत की गर्जना है, जो अब विश्व का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
वैश्विक संकटों पर जयशंकर का तीखा प्रहार
जब वैश्विक हालात नाजुक हों, तो कूटनीति बंद कमरों की मीठी बातों तक सीमित नहीं रह सकती। जयशंकर ने यही रुख अपनाया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारी तनाव है। यह तनाव केवल बयानों में नहीं, बल्कि धरातल पर जारी संघर्षों में दिखाई देता है, जो न केवल मानवता का नुकसान कर रहे हैं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर भी तोड़ रहे हैं।
आज व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में चुनौतियां विकराल हो चुकी हैं। ‘क्लाइमेट’ के बहाने विकसित देश विकासशील राष्ट्रों पर अपनी शर्तें थोप रहे हैं। आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में कई बड़े मुल्क आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लेकिन इस अंधेरे के बीच विदेश मंत्री ने एक नई उम्मीद जगाई है। उन्होंने कहा कि उभरते बाजारों और विकासशील देशों को विश्वास है कि ब्रिक्स वैश्विक परिदृश्य में स्थिरता लाने वाली भूमिका निभाएगा। यह भरोसा भारत की बढ़ती शक्ति और ब्रिक्स की एकजुटता का प्रमाण है।
पश्चिमी देशों की विफलता और ब्रिक्स का बढ़ता महत्व
आज दुनिया प्रत्यक्ष देख रही है कि पश्चिमी देश और उनके संस्थान वैश्विक समस्याओं का समाधान खोजने में पूरी तरह विफल रहे हैं। जहाँ भी विवाद है, वहाँ शांति के बजाय तनाव को हवा दी जा रही है। अमेरिका-ईरान विवाद इसका ज्वलंत उदाहरण है। ऐसी स्थिति में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों का समूह ‘ब्रिक्स’ दुनिया के लिए एकमात्र सशक्त विकल्प बनकर उभरा है।
जयशंकर ने साफ किया कि ब्रिक्स केवल चर्चा का मंच नहीं है। उन्होंने तथ्यों के साथ बताया कि ब्रिक्स के ढांचे के तहत अब तक 80 से अधिक सफल बैठकें हो चुकी हैं, जो सदस्य देशों की सक्रियता को दर्शाती हैं। भारत एक समावेशी ब्रिक्स बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहाँ किसी एक देश की तानाशाही नहीं बल्कि सबकी सहमति से निर्णय लिए जाते हैं। यही कारण है कि ब्रिक्स आज ‘ग्लोबल साउथ’ की सशक्त आवाज बन चुका है।
विकास का एजेंडा: ब्रिक्स की मुख्य प्राथमिकता
भारत का सदैव मानना रहा है कि गरीबी और विकास का अभाव ही दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है। जयशंकर ने अपने भाषण में विकास के मुद्दों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि आज कई देश ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य और वित्त जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यह एक कड़वा सच है कि जब शक्तिशाली देश आपस में टकराते हैं, तो उसका खामियाजा गरीब और विकासशील देशों को भुगतना पड़ता है। ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों से आम जनजीवन प्रभावित होता है। जयशंकर ने इन देशों की मदद के लिए ब्रिक्स के माध्यम से एक ठोस रोडमैप पेश किया।
विदेश मंत्री ने विश्वसनीय सप्लाई चेन और बाजारों में विविधता पर विशेष बल दिया। आज सप्लाई चेन के लिए किसी एक देश पर निर्भरता बेहद खतरनाक है। भारत चाहता है कि व्यापारिक मार्ग भरोसेमंद हों और किसी की मनमर्जी पर निर्भर न हों। भारत ब्रिक्स देशों के बीच इस सहयोग को और अधिक गहरा करने के लिए संकल्पित है।
दिल्ली के मंच से भारत की राष्ट्रवादी कूटनीति
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच हो रही यह बैठक भारत की कूटनीतिक कुशलता का परिचायक है। भारत ने सिद्ध कर दिया है कि हमारी विदेश नीति पूरी तरह से राष्ट्रवादी और राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है। हम रूस और चीन के साथ ब्रिक्स के मंच पर भी मजबूती से खड़े हैं और वैश्विक शांति की बात भी करते हैं।
जयशंकर का यह दावा कि “भारत स्थिरता लाएगा”, महज एक वक्तव्य नहीं बल्कि नए भारत का आत्मविश्वास है। जहाँ दुनिया संघर्षों में उलझी है, वहीं भारत दिल्ली से मानवता के कल्याण और विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
ब्रिक्स के माध्यम से भारत विश्व के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व कर रहा है। हम पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन किसी के विरोध में नहीं बल्कि एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था के निर्माण के लिए। जयशंकर का ओजस्वी भाषण यह स्पष्ट करता है कि भारत अब दर्शक नहीं बल्कि दुनिया को दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक है। यह संकल्प है उस नए भारत का, जिसने दिल्ली के मंच से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है।

