लॉस एंजिल्स का ऐतिहासिक स्टेडियम, अमेरिकी सरजमीं और सामने थी यूरोप की दिग्गज फुटबॉल टीम बेल्जियम। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के इस बड़े मुकाबले में हर कोई यही मान रहा था कि बेल्जियम की आंधी में ईरानी टीम टिक नहीं पाएगी। खेल विशेषज्ञों का अनुमान था कि बेल्जियम आसानी से ईरान को मात दे देगा। लेकिन जैसे ही मुकाबला शुरू हुआ, दुनिया ने एक नया इतिहास बनते देखा। अमेरिका की धरती पर ईरान ने न केवल बेल्जियम के गुरूर को चुनौती दी, बल्कि यह साबित कर दिया कि एशियाई फुटबॉल अब किसी भी वैश्विक ताकत से टकराने का दम रखता है। यह मैच केवल 90 मिनट का खेल नहीं, बल्कि एशियाई जुझारूपन की एक मिसाल बन गया।
60 साल पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड और ईरान का अनुभव
मैच शुरू होते ही ईरान ने एक ऐसा रिकॉर्ड कायम किया जिसने फुटबॉल जगत को हैरान कर दिया। मैदान पर उतरी ईरान की शुरुआती एकादश (Starting XI) वर्ल्ड कप इतिहास की 1966 के बाद की सबसे उम्रदराज टीम बन गई। खिलाड़ियों की औसत उम्र 32 साल और 181 दिन थी। आलोचकों का मानना था कि क्या ये ‘अनुभवी शेर’ बेल्जियम के युवा और तेजतर्रार खिलाड़ियों का मुकाबला कर पाएंगे? क्या इतनी उम्र के खिलाड़ी हाई-इंटेंसिटी वाले मॉडर्न फुटबॉल में पूरे समय टिक पाएंगे?
ईरान के इन जांबाजों ने अपनी फिटनेस और खेल की समझ से सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। उन्होंने दिखाया कि मैदान पर अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। अनुभवी ईरान ने बेल्जियम के फॉरवर्ड लाइन के हर हमले को बड़ी चतुराई से विफल किया। यह मैच इस बात का प्रमाण था कि जब तजुर्बा और देश के लिए मर-मिटने का जज्बा एक साथ मिलता है, तो उम्र की सीमाएं बेमानी हो जाती हैं।
बेल्जियम के 23 शॉट और बेइरानवंद की अभेद्य दीवार
मैच के शुरुआती क्षणों से ही बेल्जियम ने अपना दबदबा बनाना चाहा। उन्होंने बॉल पजेशन पर नियंत्रण रखा और ईरान के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। इसी बीच बेल्जियम के मैक्सिम डी क्युपर ने पेनल्टी बॉक्स के बाहर से एक बेहद शक्तिशाली शॉट लगाया। स्टेडियम में मौजूद दर्शक इसे गोल मान चुके थे, लेकिन तभी गोलपोस्ट के सामने अलीरेजा बेइरानवंद ने एक अद्भुत डाइव लगाकर गेंद को रोक लिया।
बेइरानवंद का यह बचाव बेल्जियम के लिए एक चेतावनी थी। पूरे मैच के दौरान बेल्जियम ने गोल के लिए कुल 23 प्रयास किए, लेकिन ईरान की ‘ग्रेट वॉल’ बेइरानवंद के सामने उनकी एक न चली। बेइरानवंद ने अपनी फुर्ती और एकाग्रता से बेल्जियम के हर हमले को बेकार कर दिया। उनके इस प्रदर्शन को फुटबॉल इतिहास के बेहतरीन गोलकीपिंग प्रदर्शनों में गिना जाएगा।
VAR का हस्तक्षेप और मेहदी तारेमी का दुर्भाग्य
पहले हाफ के दौरान ईरान ने एक शानदार काउंटर-अटैक किया। एक फ्री-किक के दौरान स्टार स्ट्राइकर मेहदी तारेमी ने अपनी सूझबूझ से गेंद को नेट में डाल दिया। पूरा स्टेडियम ईरानी प्रशंसकों के जश्न से गूंज उठा। ऐसा लगा कि एशियन टीम ने बड़ा उलटफेर कर दिया है।
हालांकि, आधुनिक फुटबॉल की तकनीक VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) ने इस जश्न को फीका कर दिया। रिव्यू में पाया गया कि तारेमी का पैर महज कुछ मिलीमीटर की दूरी से ऑफसाइड था। गोल रद्द होने के बावजूद, इस घटना ने बेल्जियम की टीम में एक डर पैदा कर दिया था कि ईरान किसी भी समय गोल दागने की क्षमता रखता है।
66वां मिनट: रेड कार्ड और बेल्जियम की मुश्किलें
मैच का सबसे नाटकीय मोड़ 66वें मिनट में आया। ईरान के मेहदी तारेमी तेजी से बेल्जियम के गोलपोस्ट की तरफ बढ़ रहे थे। उन्हें रोकने के चक्कर में बेल्जियम के डिफेंडर नाथन नगोय ने एक खतरनाक फाउल कर दिया। रेफरी ने बिना देर किए नगोय को सीधा रेड कार्ड दिखाया।
यह फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आठवां रेड कार्ड था। अब बेल्जियम की टीम 10 खिलाड़ियों पर सिमट गई थी। जो टीम जीत का सपना लेकर आई थी, अब वह डिफेंसिव होने पर मजबूर हो गई। ईरान के दबाव ने दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक को बैकफुट पर ला दिया था।
ग्रुप-जी का नया ‘बॉस’ बना ईरान
10 खिलाड़ियों वाली बेल्जियम के खिलाफ ईरान ने अपने हमले और तेज कर दिए। आखिरी पलों में ईरान ने गोल करने के कई शानदार मौके बनाए, लेकिन बेल्जियम के डिफेंडर्स ने किसी तरह अपना सम्मान बचाने की कोशिश जारी रखी।
जब फाइनल सीटी बजी, तो स्कोर 0-0 था। भले ही यह मैच ड्रॉ रहा, लेकिन ईरान के लिए यह किसी बड़ी जीत से कम नहीं था। इस ड्रॉ के साथ ईरान ग्रुप-जी की अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया। ईरान के इन ‘अनुभवी शेरों’ ने साबित कर दिया कि वे किसी भी टीम को धूल चटा सकते हैं।
यह मुकाबला इस बात का संदेश है कि एशियाई फुटबॉल अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। अमेरिका की धरती पर ईरान के इस प्रदर्शन ने आने वाले नॉकआउट राउंड के लिए सभी टीमों को सतर्क कर दिया है। अब कोई भी टीम ईरान जैसे जुझारू प्रतिद्वंद्वी का सामना करने से बचना चाहेगी।

