हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026: दुनिया में बढ़ी भारतीय पासपोर्ट की ताकत, पाकिस्तान 100वें स्थान पर लुढ़का

आज विश्व ने एक बार फिर ‘नए भारत’ के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और आतंकवाद के गढ़ माने जाने वाले पाकिस्तान की वैश्विक स्तर पर हो रही किरकिरी को देखा है। यह कोई साधारण रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह हमारे तिरंगे की बढ़ती प्रतिष्ठा और पाकिस्तान के पासपोर्ट की गिरती साख का प्रमाण है। हेनले एंड पार्टनर्स द्वारा जारी ताजा हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया अब भारत को सम्मान की नजर से देखती है, जबकि पाकिस्तान की साख लगातार गिर रही है।

पाकिस्तान की शर्मनाक स्थिति: वैश्विक स्तर पर अपमान

सबसे पहले उस देश की बात करते हैं जो सदैव भारत के विरुद्ध साजिशों में लिप्त रहता है। पाकिस्तान का पासपोर्ट, जिसे वहां के नेता कभी गौरव का प्रतीक बताते थे, आज दुनिया का 100वां सबसे कमजोर पासपोर्ट बन चुका है। मई 2026 के नवीनतम अपडेट के अनुसार, पाकिस्तान इस सूची में शर्मनाक ढंग से फिसलकर 100वें पायदान पर आ गया है। गौरतलब है कि परमाणु शक्ति संपन्न होने का दंभ भरने वाले इस देश के नागरिकों को दुनिया के केवल 30 गंतव्यों में वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा उपलब्ध है।

यह रैंकिंग पाकिस्तान के लिए एक अंतरराष्ट्रीय तमाचा है, जो यह साबित करती है कि वैश्विक समुदाय अब उस पर भरोसा नहीं करता। वहां की चरमराती अर्थव्यवस्था, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद को पालने वाली नीतियां ही उसकी इस दुर्दशा का मुख्य कारण हैं। आज जब कहीं भी पाकिस्तानी पासपोर्ट दिखाया जाता है, तो उसे शक की निगाहों से देखा जाता है। यही वह ‘नया पाकिस्तान’ है जिसका वादा वहां के हुक्मरानों ने किया था—एक ऐसा मुल्क जिससे दुनिया दूरी बना रही है।

भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती धमक: 56 देशों में बिना वीजा यात्रा

अब बात करते हैं हमारे गौरवशाली ‘भारत’ और इसके बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव की। भारतीय पासपोर्ट ने इस इंडेक्स में अपनी स्थिति सुधारते हुए 78वां स्थान हासिल किया है। यह रैंकिंग पिछली बार की तुलना में बेहतर है, जो यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार की विदेश नीति और भारत की आर्थिक प्रगति के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। अब भारतीय पासपोर्ट धारक दुनिया के 56 देशों में बिना किसी पूर्व वीजा के शान से यात्रा कर सकते हैं।

यह वह वास्तविक परिवर्तन है जो पिछले एक दशक में देखा गया है। अब भारतीयों को विदेशी दूतावासों के बाहर लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता कम हो गई है। हमारी सशक्त विदेश नीति ने वैश्विक स्तर पर हमारे संबंधों को प्रगाढ़ किया है, जिसका फल आज हर भारतीय नागरिक को मिल रहा है। पासपोर्ट केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र के सम्मान और नागरिक की सुरक्षा का प्रतीक है, और भारत ने सिद्ध कर दिया है कि वह एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति है।

एशियाई देशों का दबदबा: सिंगापुर फिर बना नंबर वन

ताजा हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में एशियाई देशों का वर्चस्व बरकरार है। सिंगापुर 192 देशों में वीजा-मुक्त पहुंच के साथ शीर्ष पर काबिज है। जापान, दक्षिण कोरिया और यूएई 187 देशों की वीजा-मुक्त पहुंच के साथ दूसरे स्थान पर हैं। स्वीडन तीसरे स्थान पर है, जिसके बाद फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देश आते हैं। इस सूची में अमेरिका 10वें स्थान पर है, जबकि अफगानिस्तान सबसे निचले पायदान पर है।

भारतीयों के लिए वीजा-मुक्त प्रवेश देने वाले देशों में भूटान, मलेशिया, मॉरीशस, नेपाल, थाईलैंड, फिजी और कजाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं। इसके अलावा, मालदीव, श्रीलंका, कतर, इंडोनेशिया और सेशेल्स जैसे देश भारतीय नागरिकों को वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा प्रदान करते हैं।

आत्मनिर्भर भारत की जीत बनाम पाकिस्तान की विफलता

यह रैंकिंग स्पष्ट करती है कि भारत एक आत्मनिर्भर और सशक्त राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जबकि पाकिस्तान अपनी गलत नीतियों के कारण अलग-थलग पड़ता जा रहा है। भारत की बढ़ती जीडीपी और वैश्विक निवेश ने हमारे पासपोर्ट को मजबूती दी है। पाकिस्तान को अब यह समझ लेना चाहिए कि नफरत की राजनीति केवल विनाश की ओर ले जाती है।

भारत आज ‘विश्व गुरु’ बनने की राह पर अग्रसर है। हमारा पासपोर्ट मजबूत हो रहा है और हमारी आवाज दुनिया के हर मंच पर सम्मान के साथ सुनी जा रही है। यह हर देशवासी के लिए गौरव का क्षण है। जय हिंद!


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