जिस पाकिस्तान को दशकों से अपने परमाणु हथियारों पर बहुत घमंड था, आज वही अपनी इस ताकत को बचाने के लिए दुनिया भर में हाथ फैला रहा है। भारत की महज एक मिसाइल ने पाकिस्तानी रक्षा तंत्र की ऐसी कलई खोली है कि रावलपिंडी के जनरलों की रातों की नींद हराम हो गई है। जब भारत के रडार पर पाकिस्तान का सबसे गोपनीय और सुरक्षित माना जाने वाला परमाणु केंद्र पूरी तरह स्पष्ट दिखाई देने लगा और भारतीय मिसाइलों ने इस ठिकाने को अपनी रेंज में लॉक कर लिया, तो पूरे पाकिस्तान में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि पाकिस्तान को अपने इस अभेद्य किले की रक्षा के लिए सीधे अमेरिका से मदद मांगनी पड़ी है। अब किराना हिल्स की पहाड़ियों पर अमेरिका का अत्याधुनिक रडार सिस्टम तैनात किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस ने चीनी हथियारों को पहले ही कबाड़ साबित कर दिया हो, उसके सामने अमेरिका का यह रडार कितनी देर टिक पाएगा? वह भी तब, जब भारत की इंटरकॉन्टिनेंटल अग्नि-5 मिसाइल अपने सबसे घातक अवतार में तैनात है।
किराना हिल्स: पाकिस्तान का वो घमंड जो एक झटके में टूट गया
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा के समीप स्थित किराना हिल्स कोई मामूली पहाड़ नहीं हैं। यह वह क्षेत्र है जिसे पाकिस्तान अपना सबसे सुरक्षित ‘न्यूक्लियर वॉल्ट’ मानता है। यहाँ पाकिस्तान ने अपने सबसे विध्वंसक परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें छिपा रखी हैं। इसी क्षेत्र में पाकिस्तानी वायुसेना का प्रमुख मुशाफ एयरबेस भी है। दशकों तक पाकिस्तान को यह भ्रम था कि उसका यह परमाणु किला भारत की पहुँच से बाहर है। लेकिन भारत की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने पाकिस्तान के इस आत्मविश्वास को चकनाचूर कर दिया। जब ब्रह्मोस ने अपनी गति और रेंज का जलवा दिखाया और किराना हिल्स के इतने करीब तक पहुँची कि पाकिस्तानी सेना को कानों-कान खबर नहीं हुई, तो वहां के सैन्य नेतृत्व के होश उड़ गए।
उस दिन भारत ने बिना युद्ध किए ही स्पष्ट संदेश दे दिया कि पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित ठिकाना अब भारतीय मिसाइलों के सीधे निशाने पर है। उस समय पाकिस्तान ने रक्षा के लिए चीन से खरीदा हुआ महंगा HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया था। पाकिस्तान को भरोसा था कि यह चीनी सिस्टम भारतीय मिसाइलों को हवा में ही मार गिराएगा। लेकिन जब ब्रह्मोस अपनी सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ी, तो चीन का वह सिस्टम पूरी तरह ‘अंधा’ हो गया। चीनी रडार स्क्रीन पर मिसाइल दिखी ही नहीं और जब तक चेतावनी बजती, तब तक लक्ष्य भेदा जा चुका था।
चीनी हथियारों की नाकामी और अमेरिकी रडार की एंट्री
इस घटना के बाद पाकिस्तानी सेना का चीनी रक्षा प्रणालियों से भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया। उन्हें समझ आ गया कि भविष्य के युद्ध में चीन के ये रडार उन्हें नहीं बचा पाएंगे। इसी डर के कारण पाकिस्तान ने अमेरिका का दरवाजा खटखटाया। पाकिस्तान ने तुरंत अमेरिकी फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रोग्राम के जरिए लॉकहीड मार्टिन से AN/TPS-77 रडार सिस्टम की डील की और उसे किराना हिल्स पर सक्रिय कर दिया।
यह नया अमेरिकी रडार एक 3D एयर सर्विलांस सिस्टम है। इसका मतलब है कि यह हवा में उड़ने वाली किसी भी वस्तु की दूरी, दिशा और ऊंचाई को सटीक तरीके से ट्रैक कर सकता है। इसकी रेंज लगभग 450 से 470 किलोमीटर है, जिससे यह भारत की सीमा के अंदर 400 किलोमीटर तक झाँक सकता है। यह रडार एल-बैंड फ्रीक्वेंसी पर चलता है, जिससे खराब मौसम में भी इसकी क्षमता कम नहीं होती। इसके अलावा, यह एक मोबाइल रडार है, जिसे आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है ताकि युद्ध के समय भारत इसे नष्ट न कर सके।
ब्रह्मोस और अग्नि-5 के समक्ष क्या टिक पाएगा अमेरिकी रडार?
पाकिस्तान को लगता है कि अमेरिकी सिस्टम लाकर उसने सुरक्षा पक्की कर ली है, लेकिन वह भारत की आधुनिक मिसाइल तकनीक को कम आंक रहा है, जो किसी भी रडार को चकमा देने में सक्षम है।
ब्रह्मोस मिसाइल ‘टेरेन हगिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करती है, यानी यह जमीन से सटकर पहाड़ों और घाटियों के बीच से उड़ती है। इससे यह रडार की नजरों के नीचे (ब्लाइंड स्पॉट्स) बनी रहती है। जब तक अमेरिकी रडार इसे पकड़ पाएगा, तब तक मिसाइल लक्ष्य को तबाह कर चुकी होगी। मैक 3 की गति के कारण पाकिस्तान के पास इसे हवा में रोकने वाला कोई हथियार नहीं है।
यही नहीं, भारत की अग्नि-5 मिसाइल अब और भी घातक हो चुकी है। यह एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है जो अंतरिक्ष से वापस धरती पर आते समय मैक 24 की रफ्तार पकड़ लेती है। इतनी तेज गति के सामने अमेरिकी रडार के पास प्रतिक्रिया देने का समय ही नहीं होगा।
अग्नि-5 अब MIRV तकनीक से भी लैस है, जिससे एक ही मिसाइल कई अलग-अलग वारहेड छोड़ सकती है। एक साथ कई लक्ष्यों को देख पाकिस्तानी रडार का कंप्यूटर सिस्टम पूरी तरह ठप हो जाएगा कि आखिर वह किसे ट्रैक करे।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रुद्रम मिसाइल का जाल
भारत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के क्षेत्र में भी बहुत आगे है। हमारे पास ऐसे जैमर्स हैं जो दुश्मन के रडार स्क्रीन को पूरी तरह ब्लैंक कर सकते हैं। रडार स्पूफिंग के जरिए पाकिस्तान को एक साथ सैकड़ों नकली विमान दिखाई देंगे, जिससे वे असली खतरे को पहचान नहीं पाएंगे।
यदि रडार फिर भी काम करता है, तो भारत की ‘रुद्रम’ एंटी-रेडिएशन मिसाइल उसे नष्ट करने के लिए तैयार है। रुद्रम दुश्मन के रडार की रेडियो किरणों का पीछा करते हुए सीधे उसके एंटीना पर हमला करती है। हमारे फाइटर जेट्स सीमा पार किए बिना ही इन रडार प्रणालियों को हमेशा के लिए खामोश कर सकते हैं।
कंगाल होने के बावजूद पाकिस्तान अपनी अवाम की रोटी काटकर करोड़ों डॉलर के रडार खरीद रहा है। यह स्पष्ट करता है कि भारत की सैन्य शक्ति का डर उनके मन में घर कर गया है। चीन के हथियार फेल हो चुके हैं और अब अमेरिकी शरण भी उन्हें भारतीय तकनीक के प्रहार से नहीं बचा पाएगी।

